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बहराइच: तिलहन की ओर बढ़ा किसानों का रुझान, तीन सालों में 5000 हेक्टेयर रकबा बढ़ा

Tue, 14 Feb 2023 11:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Tue, 14 Feb 2023 11:26 PM IST
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Farmers trend towards oilseeds, 5000 hectare area increased in three years
बहराइच। बाजार में लगातार बढ़ रहे खाद्य तेल के दामों को देखते हुए तिलहन उत्पादन के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। इस बार जिले में तिलहन की रिकार्ड बुवाई हुई है। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो इस बार लगभग 13000 हेक्टेअर पर तोरिया(लाही) और लगभग 10000 हेक्टेअर पर सरसों की बुवाई की गई है जो 2020 के मुकाबले लगभग 5000 हजार हेक्टेयर ज्यादा है।खाद्य तेल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। तीन-चार साल पहले 80 से 100 रुपए प्रति लीटर बिकने वाला खाद्य तेल इन दिनों 180 से 190 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। तेजी से बढ़े खाद्य तेलों के दामों से तिलहन उत्पादन की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है और इस बार तिलहन की रिकार्ड बुआई की गई है। तीन साल पहले जहां जिले के किसान तिलहन की बुवाई करने से कतराते थे वहीं इस बार किसानों ने बढ़-चढ़ कर तिलहन की बुआई की। चित्तौरा ब्लॉक निवासी किसान रामनाथ, रंगीले हुजूरपुर के पप्पू पाठक, जगदीश वर्मा आदि ने बताया कि गेहूं की अपेक्षा सरसों व लाही की बुवाई में लागत कम आती है। वहीं गेहूं में जहां तीन से चार सिंचाई करनी पड़ती है तो वहीं तिलहन में एक से दो हल्की सिंचाई ही पर्याप्त है। किसानों ने बताया कि पूर्व में तिलहन का भाव अच्छा नहीं मिलता था, लेकिन अब बाजार में तिलहन का के अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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तिलहन उत्पादन के प्रति किसानों का रुझान बढ़ाने में छुट्टा मवेशियों का भी अहम रोल रहा। किसानों की माने तो वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा मवेशियों की भरमार है। साल 2022 की गेहूं की फसल में उनका काफी नुकसान हुआ था। महसी निवासी किसान हनुमान मिश्रा, शिवपुर निवासी निरुपम मिश्रा, नानपारा निवासी उमेश मिश्रा आदि ने बताया कि छुट्टा मवेशी हरे गेहूं की ओर आकर्षित होते हैं और काफी नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन लाही और सरसों को कम नुकसान पहुंचाते हैं। इसी कारण इस बार सरसो की बुआई को प्राथमिकता दी गई है।खरीफ सीजन के दौरान इस बार जिले में अतिवृष्टि हुई थी। कई क्षेत्रों में पानी का भराव अधिक होने से खेतों में नमी की अधिकता थी और खेत तैयार होने में समय लगा। इससे कई किसानों ने कम समय में सरसों व लाही की बुआई करना सर्वोत्तम समझा।
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जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय ने बताया कि सरकार की मंशा है कि तिलहन उत्पादन में वृद्धि हो। इसके लिए इस बार काफी प्रयास किए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल लगा कर किसानों को तिलहनी फसलों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही शासन की मंशानुरुप तोरिया व सरसों के बीज किट बांटे गए। इसका असर देखने को मिल रहा है और इस बार जिले में बीते तीन सालों का रिकार्ड तिलहन बुआई की गई है जिसका निश्चित तौर पर फायदा किसानों को मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
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वर्ष सरसों तोरिया(लाही)
2020- 21 7804 9142
2021- 22 8035 9244
2022-23 10232 13121
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