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Bahraich News: मेले पर रोक के फैसले से सभी को राहत
Thu, 22 May 2025 06:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Thu, 22 May 2025 06:06 AM IST
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सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह में नाल दरवाजे के सामने मौजूद जायरीन।
बहराइच। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर रोक के अदालती फैसले ने सभी को राहत दी है। अब यहां आने वाले जायरीन सुकून से जियारत कर रहे हैं। प्रशासन को भी राहत है और मेला न लगने पर हजारों लोगों के न आने से पूरा शहर जाम से बच गया। इतना ही नहीं शहरी और व्यापारी वर्ग का जनजीवन भी प्रभावित नहीं हो रहा।
गाजी की दरगाह पर मेला न लगने के कारण इस वर्ष मेलार्थियों की भीड़ नही आ रही है। भारी भीड़ न आने से जियारत करने वालों को काफी सहूलियत दिख रही है। देखा जाए तो विगत वर्ष तक प्रत्येक जेठ में पंद्रह लाख की संख्या तक लोग आते थे। यह लोग शहर के अंदर खाली पड़े प्लाट, बाग, खेत में अपना डेरा जमा लेते थे। संख्या ज्यादा होने के कारण शौचालय आदि की उचित व्यवस्था न होने के कारण पूरा शहर परेशान हो जाता था। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती थी, जो मेला देखने के बजाए जियारत करने के लिए आते थे। उन्हें भीड़ होने के कारण घंटों लाइन में खड़े होकर अंदर जाना पड़ता था।
वही जब वह मजार पर पहुंच भी जाते थे तो भीड़ के कारण कुछ समय में ही लोगों को बाहर निकाल दिया जाता था। यही हाल सामान खरीदने से लेकर अन्य सुविधाएं पाने तक थी। लेकिन हाईकोर्ट के एक फैसले ने सभी को राहत दे दी। पुलिस व प्रशासन भीड़ न लगने के कारण आराम में है, जबकि शहर के लोग मेलार्थियों के आने के कारण लगने वाले जाम से व्यापारियों के साथ आम लोगों को निजात मिली हुई है।
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इनसेट में-
जियारत के लिए मेले की जरूरत नहीं
दरगाह में बुधवार को करीब पांच सौ के आसपास जायरीन देखे गए। इस बार अब तक कुल दस हजार के करीब जायरीन आ चुके हैं। जहां वह आते ही दरगाह के दीदार के लिए अंदर चले गए। सभी को पूरा समय अपनी जियारत के लिए मिल रहा है। यहां मुंबई से आए जहीर खान ने बताया कि वह नवी मुंबई से परिवार के साथ आए हैं। जियारत करके अच्छा लगा। अंदर पूरा समय मिला। लेकिन मेला लगता तो गरीबों को फायदा होता। वहीं कन्नौज से आए मुईन अहमद ने बताया कि पहले से ज्यादा सुकून से जियारत हुई है। वही कानपुर के नसीम ने बताया कि जियारत के लिए मेले की जरूरत नहीं होती। मेला तो गरीबों को रोजगार देने के लिए लगता है।
इनसेट में-
मेले में केवल जियारत करने की इजाजत है। इस लिए केवल जायरीन ही आ रहे है। जो आराम से इबादत कर रहे हैं।
रामानंद कुशवाहा एएसपी नगर
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गाजी की दरगाह पर मेला न लगने के कारण इस वर्ष मेलार्थियों की भीड़ नही आ रही है। भारी भीड़ न आने से जियारत करने वालों को काफी सहूलियत दिख रही है। देखा जाए तो विगत वर्ष तक प्रत्येक जेठ में पंद्रह लाख की संख्या तक लोग आते थे। यह लोग शहर के अंदर खाली पड़े प्लाट, बाग, खेत में अपना डेरा जमा लेते थे। संख्या ज्यादा होने के कारण शौचालय आदि की उचित व्यवस्था न होने के कारण पूरा शहर परेशान हो जाता था। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती थी, जो मेला देखने के बजाए जियारत करने के लिए आते थे। उन्हें भीड़ होने के कारण घंटों लाइन में खड़े होकर अंदर जाना पड़ता था।
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वही जब वह मजार पर पहुंच भी जाते थे तो भीड़ के कारण कुछ समय में ही लोगों को बाहर निकाल दिया जाता था। यही हाल सामान खरीदने से लेकर अन्य सुविधाएं पाने तक थी। लेकिन हाईकोर्ट के एक फैसले ने सभी को राहत दे दी। पुलिस व प्रशासन भीड़ न लगने के कारण आराम में है, जबकि शहर के लोग मेलार्थियों के आने के कारण लगने वाले जाम से व्यापारियों के साथ आम लोगों को निजात मिली हुई है।
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जियारत के लिए मेले की जरूरत नहीं
दरगाह में बुधवार को करीब पांच सौ के आसपास जायरीन देखे गए। इस बार अब तक कुल दस हजार के करीब जायरीन आ चुके हैं। जहां वह आते ही दरगाह के दीदार के लिए अंदर चले गए। सभी को पूरा समय अपनी जियारत के लिए मिल रहा है। यहां मुंबई से आए जहीर खान ने बताया कि वह नवी मुंबई से परिवार के साथ आए हैं। जियारत करके अच्छा लगा। अंदर पूरा समय मिला। लेकिन मेला लगता तो गरीबों को फायदा होता। वहीं कन्नौज से आए मुईन अहमद ने बताया कि पहले से ज्यादा सुकून से जियारत हुई है। वही कानपुर के नसीम ने बताया कि जियारत के लिए मेले की जरूरत नहीं होती। मेला तो गरीबों को रोजगार देने के लिए लगता है।
इनसेट में-
मेले में केवल जियारत करने की इजाजत है। इस लिए केवल जायरीन ही आ रहे है। जो आराम से इबादत कर रहे हैं।
रामानंद कुशवाहा एएसपी नगर