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सोचा नहीं था ऐसी होगी मेरे यार की बरात

Sun, 16 Jan 2022 11:21 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 11:21 PM IST
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Didn't think that my friend's wedding would be like this
बहराइच के रिसिया में रविवार को जम्मू से सेना के जवान का शव आने के बाद जोश में भारत माता की जय करते ज? - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। हम लोग साथ में ही सेना की भर्ती के लिए दौड़ने जाते थे। फरवरी 2018 में हम सब लोग एक साथ भर्ती देखने के लिए गए थे, जिसमें मेरे दोस्त सर्वजीत का सेलेक्शन हो गया था और हम लोगों की किस्मत ने साथ नहीं दिया था। जब भी वह आता था तो हम लोग यही कहकर मजा लेते थे कि भाई जल्दी से शादी कर ले। हम लोग बरात चलेंगे। उसने कहा था कि फरवरी में आ रहा हूं, तब लड़की देखने जाऊंगा। उसके बाद सबको बरात लेकर चलूंगा। हम लोगों को यह नहीं पता था कि मेरा भाई हम लोगों को ऐसे बरात ले चलेगा। जिसमें बिना बुलाए ही हजारों लोग आएंगे और मस्ती की जगह आंसू बहाने पड़ेंगे। यह बातें सर्वजीत के दोस्त वैभव सिंह, शुभम सिंह, वेद प्रकाश शर्मा, विशाल तिवारी व सहजराम साहू आंखों में आंसू लिए बयां कर रहे थे।
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रिसिया थाना क्षेत्र के सिखनपुरवा गांव में रविवार की सुबह सर्वजीत सिंह के अंतिम दर्शन करने का सिलसिला चल रहा था। तभी एक साथ युवाओं का एक हुजूम आया और आंखों में आंसू लिए भारत माता की जय.... वंदे मातरम... इंकलाब जिंदाबाद, जिंदाबाद-जिंदाबाद। सर्वजीत भइया अमर रहे। अमर रहे, अमर रहे के नारे लगाते हुए कहा कि जिस मिट्टी का खाया था, उस मिट्टी का कर्ज चुकाना है। तुम बन जाना डॉक्टर, इंजीनियर साहब! हमें तो फौज में जाना है। यह सब बातें कोई और नहीं बल्कि सर्वजीत के गांव के साथी कह रहे थे। वैभव ने बताया कि हम लोग 2018 में पहली बार फर्रुखाबाद में भर्ती देखने गए थे। ट्रेन से उतरते समय हम लोग सर्वजीत को जगाना भूल गए। जैसे ही ट्रेन चली तो याद आया कि सर्वजीत भाई ट्रेन में ही सो रहा है। हम सब लोग एक साथ तेजी से चिल्लाए तो वह उठा और बिना देर किए चलती ट्रेन से कूद गया। जब हम लोगों ने डांटा तो कहा कि सेना में भर्ती होना है, इतना तो रिस्क लेना ही पड़ेगा। हम लोगों को नहीं पता था कि वह इतना बड़ा रिस्क ले लेगा कि दोबारा जिंदा सामने नहीं आएगा। बस गर्व है कि मेरा भाई अमर हो गया। (संवाद)
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फरवरी में देखने आना था लड़की
परिवारीजनों व दोस्तों ने बताया कि सर्वजीत को फरवरी में आना था। वह फरवरी में छुट्टी लेकर आता और अपनी शादी के लिए लड़की देखने जाता, लेकिन सिर पर सेहरा बंधने से पहले सीने पर तिरंगा लपेटकर वह घर वापस आ गया। वह भी ऐसा कि अब हम लोगों के बीच कभी नहीं आ सकता। वह हमेशा याद आएगा।
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नाराज मत होना दोस्त
सर्वजीत के सबसे करीब दोस्त सहजराम साहू ने बताया कि लगभग एक माह पहले फोन मिलाया था तो वह ड्यूटी पर था। नेटवर्क के कारण बात नहीं हो पा रही थी। उसने कहा था कि नाराज न होना दोस्त, यहां नेटवर्क नहीं है। इसलिए अभी फोन रख रहा हूं। जब वहां आऊंगा तो मिलूंगा और खूब ढेर सारी बात करूंगा।
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