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आठ माह बाद गुलजार हुए डिग्री कॉलेज, पढ़ाई शुरु
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बहराइच के महिला डिग्री कालेज में सोमवार को पढ़ाई करने आयीं छात्राओं की थर्मल स्क्रीनिंग करते कर?
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। जिले के डिग्री कॉलेज सोमवार से खुल गए। कोरोना प्रोटोकॉल को देखते हुए आठ माह बाद खुले कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति चालीस फीसदी से भी कम दिखाई दी। कॉलेजों में कर्मियोें ने थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद छात्रों को प्रवेश दिया। इसके साथ ही कॉलेजों में ऑफलाइन शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो गई। सोमवार को छात्रों के पहुंचने से कॉलेज गुलजार हो गए।
मार्च में पूरे देश में फैली कोरोना महामारी ने लॉकडाउन के हालात पैदा कर दिए थे। लॉकडाउन होने के कारण कॉलेज, स्कूल, बाजार, शापिंग मॉल आदि बंद हो गए थे। लगभग आठ माह बाद शासन की अनलॉक प्रक्रिया के तहत डिग्री कॉलेजों को भी खोले जाने पर सहमति दे दी गई थी। जिले में स्थापित 28 डिग्री कॉलेजों को खोलने के लिए कॉलेज प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी थीं। सोमवार की सुबह दस बजे से डिग्री कॉलेजों के गेट छात्र-छात्राओं के लिए खोल दिए गए। कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद प्रवेश दिया गया। शहर के महिला महाविद्यालय में छात्राओं के पहुंचने पर सबसे पहले उनको सैनिटाइज किया गया। इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग कर कमरों में प्रवेश दिया गया। डिग्री कॉलेजों के कमरों में भी छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए सीटिंग प्लान बनाया गया था। सभी छात्रों को दूर-दूर ही बैठाया गया। डिग्री कॉलेजों में सोमवार को पहले दिन कम ही छात्र दिखे। चालीस फीसदी से भी कम छात्रों की पहले दिन उपस्थिति दर्ज हुई। हालांकि कई माह बाद कॉलेज खुलने से उनके चेहरों पर खुशी की लहर भी दिखी।
अधूरा पाठ्यक्रम पूरा कराने को नई व्यवस्था
किसान डिग्री कॉलेज के प्रबंध सचिव मेजर डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई में कई दिक्कतें आ रही थीं। अब कॉलेज खुल गए हैं। ऐसे में कॉलेज में शैक्षिक सत्र के अधूरे पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए नई व्यवस्था तय की गई है। अब रविवार को विशेष कक्षाओं का संचालन किया जाएगा, जिससे कोर्स को पूरा कराया जा सके।
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कॉलेज बंद होने से बाधित हो रही थी पढ़ाई
किसान डिग्री कॉलेज के छात्र विष्णु शंकर पांडेय ने बताया कि कॉलेज कई माह से बंद था। इससे पढ़ाई बाधित हो रही थी। अब चार माह में ही पूरे साल की पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ेगा। छात्र अंकुर बाजपेई और शशांक मिश्रा ने कहा कि कॉलेज खुलने के बाद अब दोगुनी क्षमता से पढ़ाई करनी पड़ेगी। कम समय में ही परीक्षाएं भी शुरू होने की उम्मीद है। इसका दबाव अवश्व रहेगा। छात्र प्रवेश जायसवाल ने बताया कि कोर्स को पूरा करने के लिए शिक्षकों को भी काफी मेहनत करनी पड़ेगी, मगर हम सभी पर मानसिक दबाव अधिक होगा।
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मार्च में पूरे देश में फैली कोरोना महामारी ने लॉकडाउन के हालात पैदा कर दिए थे। लॉकडाउन होने के कारण कॉलेज, स्कूल, बाजार, शापिंग मॉल आदि बंद हो गए थे। लगभग आठ माह बाद शासन की अनलॉक प्रक्रिया के तहत डिग्री कॉलेजों को भी खोले जाने पर सहमति दे दी गई थी। जिले में स्थापित 28 डिग्री कॉलेजों को खोलने के लिए कॉलेज प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी थीं। सोमवार की सुबह दस बजे से डिग्री कॉलेजों के गेट छात्र-छात्राओं के लिए खोल दिए गए। कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद प्रवेश दिया गया। शहर के महिला महाविद्यालय में छात्राओं के पहुंचने पर सबसे पहले उनको सैनिटाइज किया गया। इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग कर कमरों में प्रवेश दिया गया। डिग्री कॉलेजों के कमरों में भी छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए सीटिंग प्लान बनाया गया था। सभी छात्रों को दूर-दूर ही बैठाया गया। डिग्री कॉलेजों में सोमवार को पहले दिन कम ही छात्र दिखे। चालीस फीसदी से भी कम छात्रों की पहले दिन उपस्थिति दर्ज हुई। हालांकि कई माह बाद कॉलेज खुलने से उनके चेहरों पर खुशी की लहर भी दिखी।
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अधूरा पाठ्यक्रम पूरा कराने को नई व्यवस्था
किसान डिग्री कॉलेज के प्रबंध सचिव मेजर डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई में कई दिक्कतें आ रही थीं। अब कॉलेज खुल गए हैं। ऐसे में कॉलेज में शैक्षिक सत्र के अधूरे पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए नई व्यवस्था तय की गई है। अब रविवार को विशेष कक्षाओं का संचालन किया जाएगा, जिससे कोर्स को पूरा कराया जा सके।
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कॉलेज बंद होने से बाधित हो रही थी पढ़ाई
किसान डिग्री कॉलेज के छात्र विष्णु शंकर पांडेय ने बताया कि कॉलेज कई माह से बंद था। इससे पढ़ाई बाधित हो रही थी। अब चार माह में ही पूरे साल की पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ेगा। छात्र अंकुर बाजपेई और शशांक मिश्रा ने कहा कि कॉलेज खुलने के बाद अब दोगुनी क्षमता से पढ़ाई करनी पड़ेगी। कम समय में ही परीक्षाएं भी शुरू होने की उम्मीद है। इसका दबाव अवश्व रहेगा। छात्र प्रवेश जायसवाल ने बताया कि कोर्स को पूरा करने के लिए शिक्षकों को भी काफी मेहनत करनी पड़ेगी, मगर हम सभी पर मानसिक दबाव अधिक होगा।