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दो गायों की मौत, लोगों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला/बहराइच
Updated Wed, 05 Apr 2017 12:10 AM IST
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प्रदर्शन करते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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एसीएमओ डॉ. जेएन मिश्रा के बुबकापुर स्थित फार्म हाउस पर सुरक्षित मिलीं 45 गायों व बछड़ों में से 22 गायों को सोमवार की रात दो मिनी ट्रक से पशुपालन विभाग की बिछिया स्थित गौशाला भेजा गया। लेकिन गौशाला पहुंचते-पहुंचते दो गायों की मौत हो गई।
इसकी सूचना मिलने पर मंगलवार को सुबह बिछिया के लोग भड़क उठे और मौके पर पहुंचकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंचे एसडीएम मोतीपुर ने लोगों को समझाकर शांत कराया। दोनों गायों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। वहीं, राजकीय गौशाला में व्यवस्थाएं न होने से प्रबंधक ने गायों को रखने से इन्कार कर दिया। आनन-फानन में प्रशासन ने व्यवस्थाएं करवाईं।
एसीएमओ के फार्म हाउस पर अवैध तरीके से आयुर्वेदिक दवा फैक्ट्री और गौशाला के संचालन पर दो दिन पूर्व कार्रवाई हुई। बड़ी संख्या में कब्र से गायों के कंकाल बरामद हुए। वहीं, 45 गायें सुरक्षित मिली थीं।
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इन गायों को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने उन्हें राजकीय गौशाला बिछिया पहुंचाने की रूपरेखा तैयार की। इसी के तहत सोमवार की रात दो मिनी ट्रक में 11-11 गायों को लादकर बिछिया भेजा गया। सुबह गायों से लदे मिनी ट्रक बिछिया स्थित राजकीय गौशाला पहुंचे तो यहां पर दो गायें मृत मिलीं।
गौशाला के प्रबंधक को भी गायों को लाने की जानकारी नहीं दी गई, जिससे प्रबंधक मुकेश कुमार ने बुबकापुर से भेजी गायों को गौशाला में लेने से इन्कार कर दिया। वहीं, दो गायों की मौत की सूचना पाकर सुबह क्षेत्र के तमाम लोग मौके पर पहुंच गए और जिला प्रशासन पर हीलाहवाली बरतने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी कर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। क्षेत्रीय लोगों ने महसी विधायक सुरेश्वर सिंह और बलहा विधायक अक्षयवरलाल गोंड को मामले से अवगत कराया। दोनों विधायकों ने डीएम से वार्ता की। इसके बाद एसडीएम कुंवर वीरेंद्र मौर्या दलबल के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझा कर शांत कराया। डीएम अजयदीप सिंह के निर्देश पर तत्काल तीन डॉक्टरों का पैनल गठित हुआ। नानपारा, गायघाट और सुजौली के पशु चिकित्साधिकारियों ने गायों के शवों का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद उन्हें दफना दिया गया। वहीं, एसडीएम ने गायों की देखभाल के लिए दो निजी कर्मचारियों की व्यवस्था कराई। इसके बाद गौशाला के प्रबंधक मुकेश ने गायों को गौशाला में लिया।
ट्रक से बिछिया ले जायी गईं गायों में दो की मौत का खुलासा पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने कर दिया है। सुजौली के चिकित्सक डॉ. अमरनाथ कटियार ने बताया कि एक गाय को सेप्टीसीमिया की पहले से शिकायत थी। साथ ही दम घुटने की भी पुष्टि हो रही है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
जिस मिनी ट्रक से गायों को बिछिया स्थित राजकीय गौशाला भेजा गया। उस मिनी ट्रक में मानक के अनुरूप अधिकतम पांच से छह गाय ही आ सकती हैं। जबकि 11-11 गायों को मिनी ट्रक में भरकर बिछिया पहुंचाया गया। यही दो गायों की मौत का कारण बना।
बिछिया में जंगल के बीच राजकीय गौशाला 14 एकड़ में स्थापित है। लेकिन गौशाला का भवन जर्जर है। यहां पर गौशाला प्रबंधक के अलावा 13 सहयोगी कर्मचारियों के स्टाफ का मानक है। लेकिन दो साल से एक भी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। सिर्फ प्रबंधक द्वारा औपचारिकताएं निभायी जाती हैं। इस गौशाला में अधिकतम 10 गायों को रखने की क्षमता है।
जिला प्रशासन दावे चाहे जितने करे, लेकिन राजकीय गौशाला में भी गायों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं है। बहराइच से भेजी गई गायों को जब अव्यवस्था के चलते गौशाला प्रबंधन ने लेने से इन्कार किया तो क्षेत्र के लोगों ने मिलकर भूसा, खली व अन्य चारे की व्यवस्था कराई।
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इसकी सूचना मिलने पर मंगलवार को सुबह बिछिया के लोग भड़क उठे और मौके पर पहुंचकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंचे एसडीएम मोतीपुर ने लोगों को समझाकर शांत कराया। दोनों गायों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। वहीं, राजकीय गौशाला में व्यवस्थाएं न होने से प्रबंधक ने गायों को रखने से इन्कार कर दिया। आनन-फानन में प्रशासन ने व्यवस्थाएं करवाईं।
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एसीएमओ के फार्म हाउस पर अवैध तरीके से आयुर्वेदिक दवा फैक्ट्री और गौशाला के संचालन पर दो दिन पूर्व कार्रवाई हुई। बड़ी संख्या में कब्र से गायों के कंकाल बरामद हुए। वहीं, 45 गायें सुरक्षित मिली थीं।
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इन गायों को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने उन्हें राजकीय गौशाला बिछिया पहुंचाने की रूपरेखा तैयार की। इसी के तहत सोमवार की रात दो मिनी ट्रक में 11-11 गायों को लादकर बिछिया भेजा गया। सुबह गायों से लदे मिनी ट्रक बिछिया स्थित राजकीय गौशाला पहुंचे तो यहां पर दो गायें मृत मिलीं।
गौशाला के प्रबंधक को भी गायों को लाने की जानकारी नहीं दी गई, जिससे प्रबंधक मुकेश कुमार ने बुबकापुर से भेजी गायों को गौशाला में लेने से इन्कार कर दिया। वहीं, दो गायों की मौत की सूचना पाकर सुबह क्षेत्र के तमाम लोग मौके पर पहुंच गए और जिला प्रशासन पर हीलाहवाली बरतने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी कर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। क्षेत्रीय लोगों ने महसी विधायक सुरेश्वर सिंह और बलहा विधायक अक्षयवरलाल गोंड को मामले से अवगत कराया। दोनों विधायकों ने डीएम से वार्ता की। इसके बाद एसडीएम कुंवर वीरेंद्र मौर्या दलबल के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझा कर शांत कराया। डीएम अजयदीप सिंह के निर्देश पर तत्काल तीन डॉक्टरों का पैनल गठित हुआ। नानपारा, गायघाट और सुजौली के पशु चिकित्साधिकारियों ने गायों के शवों का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद उन्हें दफना दिया गया। वहीं, एसडीएम ने गायों की देखभाल के लिए दो निजी कर्मचारियों की व्यवस्था कराई। इसके बाद गौशाला के प्रबंधक मुकेश ने गायों को गौशाला में लिया।
ट्रक से बिछिया ले जायी गईं गायों में दो की मौत का खुलासा पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने कर दिया है। सुजौली के चिकित्सक डॉ. अमरनाथ कटियार ने बताया कि एक गाय को सेप्टीसीमिया की पहले से शिकायत थी। साथ ही दम घुटने की भी पुष्टि हो रही है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
जिस मिनी ट्रक से गायों को बिछिया स्थित राजकीय गौशाला भेजा गया। उस मिनी ट्रक में मानक के अनुरूप अधिकतम पांच से छह गाय ही आ सकती हैं। जबकि 11-11 गायों को मिनी ट्रक में भरकर बिछिया पहुंचाया गया। यही दो गायों की मौत का कारण बना।
बिछिया में जंगल के बीच राजकीय गौशाला 14 एकड़ में स्थापित है। लेकिन गौशाला का भवन जर्जर है। यहां पर गौशाला प्रबंधक के अलावा 13 सहयोगी कर्मचारियों के स्टाफ का मानक है। लेकिन दो साल से एक भी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। सिर्फ प्रबंधक द्वारा औपचारिकताएं निभायी जाती हैं। इस गौशाला में अधिकतम 10 गायों को रखने की क्षमता है।
जिला प्रशासन दावे चाहे जितने करे, लेकिन राजकीय गौशाला में भी गायों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं है। बहराइच से भेजी गई गायों को जब अव्यवस्था के चलते गौशाला प्रबंधन ने लेने से इन्कार किया तो क्षेत्र के लोगों ने मिलकर भूसा, खली व अन्य चारे की व्यवस्था कराई।