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बीमार नवजात को ठीक करने के लिए खौलते तेल में डाली अंगुली
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 20 Aug 2015 10:24 PM IST
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बहराइच (ब्यूरो)। अंधविश्वास इस कदर हमारे समाज में फैला हुआ है कि अपने बच्चे की जान भी लोग दांव पर लगा दे रहे हैं।
गुरुवार को ऐसा ही एक मामला जिला अस्पताल में देखने को मिला। यहां दो दिन के बच्चे की अंगुली जली देख अमर उजाला फोटोग्राफर ने जब उसकी मां से कारण पूछा तो चौंकाने वाली बात सामने आई। इसे पढ़कर आपके भी रोयें खड़े हो जाएंगे।
बहराइच के जिला अस्पताल में 18 अगस्त को रिसिया कस्बे के पूरनपुरवा निवासी महिला सोमा ने एक बच्चा जना। बच्चा जन्म से बीमार था, जिसका इलाज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने शुरू किया।
डॉ. ने कहा की बच्चा धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। लेकिन, परिवार की बुजुर्ग महिलाओं ने इसे जमोगा बयार बताते हुए बच्चे की जान को खतरा बताया।
बयार से निजात दिलाने के लिए उसकी अंगुली खौलते हुए तेल में दागने की सलाह दे डाली। जिगर के टुकड़े की जान बचाने के लिए बेबस मां ने परिवार की महिलाओं की बात मानते हुए अपने दिल पर पत्थर रखकर सरसों के खौलते तेल में अपने लाल की अंगुलियां डुबो दीं। बच्ची की चीख निकली तो मां के आंसू भी निकल पड़े। मासूम की तबियत और बिगड़ गई।
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गुरुवार को मां बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची तो डॉ. केके वर्मा बच्चे की हालत देखकर बिफर पड़े। बेबस मां ने डॉक्टर को आपबीती सुनाई तो चिकित्सक ने आगे से अंधविश्वास पर अमल न करने की हिदायत दी।
डॉ वर्मा ने कहा की अक्सर नवजात की जिंदगी को लेकर मां-पिता अंधविश्वास का सहारा लेतें हैं, जिससे मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ती है। इससे बचना होगा। लोगों में जागरूकता लानी होगी।
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गुरुवार को ऐसा ही एक मामला जिला अस्पताल में देखने को मिला। यहां दो दिन के बच्चे की अंगुली जली देख अमर उजाला फोटोग्राफर ने जब उसकी मां से कारण पूछा तो चौंकाने वाली बात सामने आई। इसे पढ़कर आपके भी रोयें खड़े हो जाएंगे।
बहराइच के जिला अस्पताल में 18 अगस्त को रिसिया कस्बे के पूरनपुरवा निवासी महिला सोमा ने एक बच्चा जना। बच्चा जन्म से बीमार था, जिसका इलाज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने शुरू किया।
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डॉ. ने कहा की बच्चा धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। लेकिन, परिवार की बुजुर्ग महिलाओं ने इसे जमोगा बयार बताते हुए बच्चे की जान को खतरा बताया।
बयार से निजात दिलाने के लिए उसकी अंगुली खौलते हुए तेल में दागने की सलाह दे डाली। जिगर के टुकड़े की जान बचाने के लिए बेबस मां ने परिवार की महिलाओं की बात मानते हुए अपने दिल पर पत्थर रखकर सरसों के खौलते तेल में अपने लाल की अंगुलियां डुबो दीं। बच्ची की चीख निकली तो मां के आंसू भी निकल पड़े। मासूम की तबियत और बिगड़ गई।
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गुरुवार को मां बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची तो डॉ. केके वर्मा बच्चे की हालत देखकर बिफर पड़े। बेबस मां ने डॉक्टर को आपबीती सुनाई तो चिकित्सक ने आगे से अंधविश्वास पर अमल न करने की हिदायत दी।
डॉ वर्मा ने कहा की अक्सर नवजात की जिंदगी को लेकर मां-पिता अंधविश्वास का सहारा लेतें हैं, जिससे मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ती है। इससे बचना होगा। लोगों में जागरूकता लानी होगी।