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खुली नेपाल सीमा बन सकती आतंकियों की आमद का सबब
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 27 Nov 2015 10:06 PM IST
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श्रावस्ती। इंडो-नेपाल की श्रावस्ती में खुली 62 किलोमीटर की सीमा व यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार आईएसआईएस की घुसपैठ का सबब बन सकते हैं। वहीं, पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के पंजीयन व निगरानी के नाकाफी इंतजाम भी खतरे की संभावना को बढ़ा रहे हैं।
भारत-नेपाल के बीच नोमेंस लैंड पर लगे चंद पत्थर ही भूभाग को अलग दर्शाने का जरिया हैं। दोनों ओर से आने जाने के लिए खेत खलिहान का रास्ता यहां तक कि कुछ गांव भी हैं जो नोमेंस लैंड पर ही बसे हैं।
ककरदरी, भरथा रोशनगढ़ आदि गांवों की आबादी दोनों तरफ चौबीसों घंटे आती-जाती है। जहां देखने पर यह पता नहीं चलता कि कौन सा हिस्सा नेपाल में है और कौन सा हिस्सा भारत में।
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इन गांवों से होकर वाहनों का जिला मुख्यालय की ओर आवागमन भी बना रहता है। साथ ही बघौड़ा, ककरदरी, जमुनहा सरीखे कई साप्ताहिक बाजार भी आतंकियों की घुसपैठ मददगार हो सकते हैं।
साप्ताहिक बाजार के दिन नेपाल से लोग जत्थों में भारतीय सीमा में आते हैं। यही नहीं, भिनगा सहित कई क्षेत्र के व्यवसायी भी इन बाजारों में सामान बेचने जाते हैं।
नेपाल के जिला डांग व बांके का संपर्क साप्ताहिक बाजारों के जरिये सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ जाता है। ऐसे में खेतों के रास्ते कभी भी दहशतगर्द जिला मुख्यालय, फिर देश के किसी भी हिस्से में पहुंचकर अपने मंसूबे को अंजाम दे सकते हैं।
विदेशी पर्यटकों पर नजर रखने की नहीं कोई व्यवस्था
बौद्ध तपोस्थली में हर साल लगभग डेढ़ से दो लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। पर्यटकों के आने की सूचना उनके विदेश मंत्रालय द्वारा जिले के अधिकारियों को भेजी जाती है लेकिन कौन पर्यटक आया, अपने साथ क्या लाया, कितने दिनों तक जिले में रहा, इसका विवरण स्थानीय स्तर पर दर्ज करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
यही नहीं ग्रुप में आने वाले इन विदेशी पर्यटकों की इंट्री भी होटलों में ग्रुप लीडर प्लस ग्रुप में शामिल अन्य लोगों की संख्या के रूप में दर्ज की जाती है।
आईडी के रूप में कुछ ही सदस्यों के पासपोर्ट की छाया प्रति ली जाती है। पर्यटन स्थल पर आने वाला पर्यटक वापस अपने देश गया या फिर कहीं और इसको भी सत्यापित करने के लिए जिले में कोई व्यवस्था नहीं है।
औपचारिकता मात्र निभाते अधिकारी
थाईलैंड, श्रीलंका, कंबोडिया, वर्मा, कोरिया, चाइना सहित कई देशों के यहां मठ व उनका गेस्ट हाउस भी है। वहां से आने वाले पर्यटक सीधे अपने देश के गेस्ट हाउस में रुकते हैं।
पर्यटक के रूप में आने वाला व्यक्ति वास्तव में पर्यटक ही है, इसको सत्यापित करने की व्यवस्था जिले में नहीं है। पर्यटन स्थल पर लगी स्थानीय अभिसूचना इकाई फर्ज अदायगी तक ही सीमित रहती है।
चौकन्नी है पुलिस - एसपी
इंडो-नेपाल सीमा श्रावस्ती जिले में लगभग 62 किलोमीटर है। आठ ऐसे रास्ते हैं, जहां मोटर साइकिल व अन्य दो पहिया वानों से प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में किसी गुप्त घुसपैठ से इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन नोमेंस लैंड सीमा पर जगह-जगह पर एसएसबी चौकी बना कर तैनात है। अपारंपरिक रास्तों पर आने जाने वालों पर निगाह रखने के लिए स्थानीय चौकी पुलिस भी चौकन्नी है। जबकि आने वाले पर्यटकों की इंट्री की कोई व्यवस्था नहीं है। अभिसूचना इकाई विदेशी पर्यटकों का लेखा जोखा रखती है।
-जीएन त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक, श्रावस्ती
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भारत-नेपाल के बीच नोमेंस लैंड पर लगे चंद पत्थर ही भूभाग को अलग दर्शाने का जरिया हैं। दोनों ओर से आने जाने के लिए खेत खलिहान का रास्ता यहां तक कि कुछ गांव भी हैं जो नोमेंस लैंड पर ही बसे हैं।
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ककरदरी, भरथा रोशनगढ़ आदि गांवों की आबादी दोनों तरफ चौबीसों घंटे आती-जाती है। जहां देखने पर यह पता नहीं चलता कि कौन सा हिस्सा नेपाल में है और कौन सा हिस्सा भारत में।
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इन गांवों से होकर वाहनों का जिला मुख्यालय की ओर आवागमन भी बना रहता है। साथ ही बघौड़ा, ककरदरी, जमुनहा सरीखे कई साप्ताहिक बाजार भी आतंकियों की घुसपैठ मददगार हो सकते हैं।
साप्ताहिक बाजार के दिन नेपाल से लोग जत्थों में भारतीय सीमा में आते हैं। यही नहीं, भिनगा सहित कई क्षेत्र के व्यवसायी भी इन बाजारों में सामान बेचने जाते हैं।
नेपाल के जिला डांग व बांके का संपर्क साप्ताहिक बाजारों के जरिये सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ जाता है। ऐसे में खेतों के रास्ते कभी भी दहशतगर्द जिला मुख्यालय, फिर देश के किसी भी हिस्से में पहुंचकर अपने मंसूबे को अंजाम दे सकते हैं।
विदेशी पर्यटकों पर नजर रखने की नहीं कोई व्यवस्था
बौद्ध तपोस्थली में हर साल लगभग डेढ़ से दो लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। पर्यटकों के आने की सूचना उनके विदेश मंत्रालय द्वारा जिले के अधिकारियों को भेजी जाती है लेकिन कौन पर्यटक आया, अपने साथ क्या लाया, कितने दिनों तक जिले में रहा, इसका विवरण स्थानीय स्तर पर दर्ज करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
यही नहीं ग्रुप में आने वाले इन विदेशी पर्यटकों की इंट्री भी होटलों में ग्रुप लीडर प्लस ग्रुप में शामिल अन्य लोगों की संख्या के रूप में दर्ज की जाती है।
आईडी के रूप में कुछ ही सदस्यों के पासपोर्ट की छाया प्रति ली जाती है। पर्यटन स्थल पर आने वाला पर्यटक वापस अपने देश गया या फिर कहीं और इसको भी सत्यापित करने के लिए जिले में कोई व्यवस्था नहीं है।
औपचारिकता मात्र निभाते अधिकारी
थाईलैंड, श्रीलंका, कंबोडिया, वर्मा, कोरिया, चाइना सहित कई देशों के यहां मठ व उनका गेस्ट हाउस भी है। वहां से आने वाले पर्यटक सीधे अपने देश के गेस्ट हाउस में रुकते हैं।
पर्यटक के रूप में आने वाला व्यक्ति वास्तव में पर्यटक ही है, इसको सत्यापित करने की व्यवस्था जिले में नहीं है। पर्यटन स्थल पर लगी स्थानीय अभिसूचना इकाई फर्ज अदायगी तक ही सीमित रहती है।
चौकन्नी है पुलिस - एसपी
इंडो-नेपाल सीमा श्रावस्ती जिले में लगभग 62 किलोमीटर है। आठ ऐसे रास्ते हैं, जहां मोटर साइकिल व अन्य दो पहिया वानों से प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में किसी गुप्त घुसपैठ से इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन नोमेंस लैंड सीमा पर जगह-जगह पर एसएसबी चौकी बना कर तैनात है। अपारंपरिक रास्तों पर आने जाने वालों पर निगाह रखने के लिए स्थानीय चौकी पुलिस भी चौकन्नी है। जबकि आने वाले पर्यटकों की इंट्री की कोई व्यवस्था नहीं है। अभिसूचना इकाई विदेशी पर्यटकों का लेखा जोखा रखती है।
-जीएन त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक, श्रावस्ती