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व्यवसायी से फर्जीवाड़े की आरबीआई भी करेगी जांच
अमरउजाला ब्यूरो/ बहराइच
Updated Thu, 11 Jun 2015 10:46 PM IST
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शहर के एक व्यवसायी के साथ सेंट्रल बैंक में जमकर हेराफेरी की गई। निर्धारित लिमिट के अंदर धन का आहरण करने के बावजूद खाता एनपीए कर दिया गया। इतना ही नहीं, व्यवसायी को करोड़ों के आवास को लाखों में नीलाम करने की साजिश रची गई थी। इस मामले में बैंक प्रबंधक और डीजीएम समेत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी जांच शुरू की है। इसकी सूचना व्यवसायी को पत्र द्वारा दी गई है।
मालूम है कि शहर के मोहल्ला वजीरबाग निवासी रमेश चंद्र गुप्ता खाद व अन्य व्यवसाय करते हैं। उनका बैंक खाता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में है। एग्रो कृषक सेवा केंद्र के नाम पर बैंक में रमेश की सात लाख की लिमिट है। व्यवसाय के सिलसिले में व्यवसायी ने छह लाख 82 हजार 700 रुपये निकाले थे। प्रतिमाह उसकी अदायगी भी कर रहे थे लेकिन इसी बीच बैंक प्रबंधक ने व्यवसायी के लिमिट खाते को बिना किसी कारण के नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) कर दिया। नोटिस भी नहीं दिया। नोटिस तब दिया जब व्यवसायी के कल्पीपारा स्थित लगभग दो करोड़ के आवास को नीलाम करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इस पर व्यवसायी ने सेंट्रल बैंक प्रबंधक से गुहार लगाई। डीजीएम लखनऊ से भी मुलाकात की लेकिन राहत नहीं मिली। उसने खाते से निकाला गया सारा धन भी जमा कर दिया। लेकिन बैंक ने एक ही दिन में चार बार ब्याज लगाया। इतना ही नहीं, 15 हजार की धनराशि का खाते में अंकन नहीं किया। इस पर व्यवसायी ने 21 मई की रात शाखा प्रबंधक और डीजीएम समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। रिजर्व बैंक को भी शिकायत की गई।
रिजर्व बैंक ने अब मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए वित्त विभाग के बैंकिंग डिवीजन के सचिव को पत्र लिखकर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इस आशय का पत्र गुरुवार को व्यवसायी को मिला। बैंक अधिकारियों में अब हड़कंप मचा है।
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मालूम है कि शहर के मोहल्ला वजीरबाग निवासी रमेश चंद्र गुप्ता खाद व अन्य व्यवसाय करते हैं। उनका बैंक खाता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में है। एग्रो कृषक सेवा केंद्र के नाम पर बैंक में रमेश की सात लाख की लिमिट है। व्यवसाय के सिलसिले में व्यवसायी ने छह लाख 82 हजार 700 रुपये निकाले थे। प्रतिमाह उसकी अदायगी भी कर रहे थे लेकिन इसी बीच बैंक प्रबंधक ने व्यवसायी के लिमिट खाते को बिना किसी कारण के नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) कर दिया। नोटिस भी नहीं दिया। नोटिस तब दिया जब व्यवसायी के कल्पीपारा स्थित लगभग दो करोड़ के आवास को नीलाम करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इस पर व्यवसायी ने सेंट्रल बैंक प्रबंधक से गुहार लगाई। डीजीएम लखनऊ से भी मुलाकात की लेकिन राहत नहीं मिली। उसने खाते से निकाला गया सारा धन भी जमा कर दिया। लेकिन बैंक ने एक ही दिन में चार बार ब्याज लगाया। इतना ही नहीं, 15 हजार की धनराशि का खाते में अंकन नहीं किया। इस पर व्यवसायी ने 21 मई की रात शाखा प्रबंधक और डीजीएम समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। रिजर्व बैंक को भी शिकायत की गई।
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रिजर्व बैंक ने अब मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए वित्त विभाग के बैंकिंग डिवीजन के सचिव को पत्र लिखकर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इस आशय का पत्र गुरुवार को व्यवसायी को मिला। बैंक अधिकारियों में अब हड़कंप मचा है।
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