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प्रधान ने घर वालों को दिया मनरेगा में काम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2016 11:19 PM IST
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विकासखंड चित्तौरा अंतर्गत बरईविलासा गांव की ग्राम प्रधान के परिवार के लोगों ने मनरेगा श्रमिक के रूप में सबसे ज्यादा काम किया। परिवार और हितमित्रों को मनरेगा का श्रमिक बनाकर ढाई लाख से अधिक की धनराशि को ठिकाने लगा दिया। इसका पता तब चला जब ग्रामीणों ने मनरेगा के कार्य का ब्यौरा मांगा।
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कई ऐसे ग्रामीण भी हैं, जिन्हें पता ही नहीं फिर भी उनके नाम पर पैसे की बंदरबांट कर ली गई। इस मामले में सीडीओ ने जांच के आदेश दिए हैं। विकासखंड चित्तौरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बरई बिलासा के पंजीकृत मनरेगा श्रमिक काम न मिलने से परेशान हैं। मनरेगा श्रमिकों ने जब ग्राम प्रधान से काम की बात की तो पता चला कि बजट ही नहीं है।
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लेकिन इसी दौरान श्रमिकों को भनक लगी कि गांव से आसामरोड तक संपर्क मार्ग की कटान कागजों पर करवा दी गई है। इसमें 198 श्रमिकों को मजदूरी दिखाकर 2 लाख 45 हजार 364 रुपये की बंदरबांट कर ली गई। इस मामले में 50 से अधिक ग्रामीणों ने सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार व एडीएम विद्याशंकर सिंह पत्र सौंपा।
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इस पर दोनों अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि विकासखंड चित्तौरा के बीडीओ के माध्यम से जांच कराकर मामले में कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने जनसेवा केंद्र से मनरेगा के तहत हुए कार्य का ब्यौरा निकलवाया। ब्यौरा देखकर ग्रामीण सन्न रह गए।
क्षेत्र पंचायत सदस्य कमला देवी, ग्राम पंचायत सदस्य बनारसी, राममिलन, बालकराम आदि ने बताया कि जो ब्यौरा हाथ लगा, उसमें ग्राम प्रधान राजकुमारी की ननद कुसुमा देवी, देवर राधेश्याम, देवरानी सुनीता, धनई, देवर बच्चाराम, पुत्र पंकज कुमार, सौतन राधा आदि ने मनरेगा श्रमिक के रूप में काम किया है। इन सभी को 24-24 दिन मजदूरी मिली है।