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नवजात की मौत, परिजनों का हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Oct 2016 10:35 PM IST
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जरवल क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्तफाबाद में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते शुक्रवार रात एक नवजात की जान चली गई। इस पर परिवारीजनों ने सीएचसी में जमकर हंगामा किया। मौके पर पहुंचे सीएचसी अधीक्षक के समझाने पर मामला शांत हुआ। सीएमओ ने जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।
जरवलरोड क्षेत्र में ग्राम हसना धवरिया निवासी रणजीत श्रीवास्तव की पत्नी कविता (28) को शुक्रवार दोपहर में प्रसव पीड़ा हुई। परिवारीजनों ने एंबुलेंस से कविता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्तफाबाद पहुंचाया। रणजीत का कहना है कि पत्नी के भर्ती होने के चार घंटे तक इलाज शुरू नहीं हुआ। दोपहर बाद जब प्रसव पीड़ा बढ़ी तो मिन्नतों के बाद एक एएनएम ने प्रसव कराया।
कविता ने बेटे को जन्म दिया लेकिन कुछ देर बाद ही नवजात की मौत हो गई। इस पर परिवारीजन बिलख उठे। सूचना पर परिवार व गांव के अन्य लोग भी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इससे अफरातफरी की स्थिति बन गई।
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परिवारीजनों का कहना है कि कविता चार घंटे तक कराहती रही लेकिन इलाज के लिए कोई नहीं आया। अस्पताल में मौजूद डॉ. कल्पना साहू से मरीज को देखने के लिए कई बार कहा गया लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। हंगामे की सूचना पर पहुंचे सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. पीतांबर ने किसी तरह मामले को शांत कराया।
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जरवलरोड क्षेत्र में ग्राम हसना धवरिया निवासी रणजीत श्रीवास्तव की पत्नी कविता (28) को शुक्रवार दोपहर में प्रसव पीड़ा हुई। परिवारीजनों ने एंबुलेंस से कविता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्तफाबाद पहुंचाया। रणजीत का कहना है कि पत्नी के भर्ती होने के चार घंटे तक इलाज शुरू नहीं हुआ। दोपहर बाद जब प्रसव पीड़ा बढ़ी तो मिन्नतों के बाद एक एएनएम ने प्रसव कराया।
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कविता ने बेटे को जन्म दिया लेकिन कुछ देर बाद ही नवजात की मौत हो गई। इस पर परिवारीजन बिलख उठे। सूचना पर परिवार व गांव के अन्य लोग भी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इससे अफरातफरी की स्थिति बन गई।
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परिवारीजनों का कहना है कि कविता चार घंटे तक कराहती रही लेकिन इलाज के लिए कोई नहीं आया। अस्पताल में मौजूद डॉ. कल्पना साहू से मरीज को देखने के लिए कई बार कहा गया लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। हंगामे की सूचना पर पहुंचे सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. पीतांबर ने किसी तरह मामले को शांत कराया।