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तराई के 28 स्लीपिंग मॉड्यूल बन सकते आतंकियों के मददगार
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 06 Jan 2016 09:50 PM IST
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बहराइच। तराई का बहराइच जनपद आतंकियों को छुपने के लिए काफी मददगार रहा है। यहां एक दो नहीं लगभग 28 ऐसे सख्श चिह्नित हुए हैं जो आतंकियों के स्लीपिंग मॉड्यूल हो सकते हैं।
इनकी मदद से आतंकी न सिर्फ भारत में घुसपैठ कर सकते हैं, बल्कि अपने मंसूबों को भी अंजाम तक पहुंचा सकते हैं। ये स्लीपिंग मॉड्यूल सिर्फ बहराइच ही नहीं श्रावस्ती, लखीमपुर, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर तक फैले हैं। ऐसे संदिग्धों को चिह्नित कर खुफिया एजेंसियों ने निगरानी शुरू कर दी है।
खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय जो भेजी है, उसमें पाकिस्तानी संगठन आईएसआई के साथ ही छह आतंकी संगठनों का हवाला है। इन संगठनों के अगुवा प्रशिक्षित आतंकियों को नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश कराने की फिराक में हैं लेकिन यह आतंकी सीधे तौर पर अगर घुसपैठ करेंगे तो उनके पकड़े जाने का डर ज्यादा रहेगा।
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ऐसे में पूर्व में बहराइच व नेपाल सीमा से सटे इलाकों में पनाह ले चुके लश्कर-ए-तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन व अन्य आतंकियों द्वारा तैयार किए गए स्लीपिंग मॉड्यूल का यह सहारा ले सकते हैं।
खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तराई के बहराइच, लखीमपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर तक 28 ऐसे संदिग्ध युवकों की पहचान की गई है, जिनकी गतिविधियां संदेहास्पद हैं।
बेरोजगार होने के बावजूद ऐश-ओ-आराम की सभी चीजें इनके पास मौजूद हैं। ऐसे में पैसे का स्रोत क्या है, पता नहीं चल रहा है। हो सकता है आतंकी संगठनों द्वारा इनकी मदद की जा रही है और इन्हीं के सहारे प्रशिक्षित आतंकियों को भारत में प्रवेश कराने की तैयार हो।
ऐसे में सभी संदिग्धों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। इनकी गतिविधियों के साथ ही उनसे मिलने-जुलने वालों और मोबाइल पर बातचीत को भी ट्रेस किया जा रहा है।
ये है स्लीपिंग मॉड्यूल
नेपाल से सटे बहराइच में पूर्व में शरण ले चुके विभिन्न आतंकी संगठनों के आतंकवादियों ने किसी न किसी के सहारे बहराइच में कई दिन गुजारे। एसटीएफ व अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े जाने के बावजूद भी वह विभिन्न लोगों के संपर्क में किसी न किसी माध्यम से बने रहे। यही आतंकियों के स्लीपिंग मॉड्यूल हैं, जो तराई में सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
इन आतंकियों ने बहराइच में ली है पनाह
कोतवाली नगर के मोहल्ला नाजिरपुरा में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी कमांडर इरफान का मकान है। इरफान का बेटा अबरार भी लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार आतंकी रह चुका है। इसके अलावा डॉन दाऊद इब्राहीम के खानसामा जिब्राइल का मकान रिसिया के पटपरगंज में है।
वहीं, पंजाब के आतंकवादी सताराना ने कोतवाली नानपारा क्षेत्र के मटेरा में किसान बनकर शरण ली। इसके अलावा पाकिस्तान के आईएसआई एजेंट मशरूर उर्फ रमेश चौधरी, इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी अफजल भी बहराइच को अपनी पनाहगार बना चुके हैं। इन सबके संपर्क में कुछ युवाओं के होने की आशंका है।
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इनकी मदद से आतंकी न सिर्फ भारत में घुसपैठ कर सकते हैं, बल्कि अपने मंसूबों को भी अंजाम तक पहुंचा सकते हैं। ये स्लीपिंग मॉड्यूल सिर्फ बहराइच ही नहीं श्रावस्ती, लखीमपुर, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर तक फैले हैं। ऐसे संदिग्धों को चिह्नित कर खुफिया एजेंसियों ने निगरानी शुरू कर दी है।
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खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय जो भेजी है, उसमें पाकिस्तानी संगठन आईएसआई के साथ ही छह आतंकी संगठनों का हवाला है। इन संगठनों के अगुवा प्रशिक्षित आतंकियों को नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश कराने की फिराक में हैं लेकिन यह आतंकी सीधे तौर पर अगर घुसपैठ करेंगे तो उनके पकड़े जाने का डर ज्यादा रहेगा।
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ऐसे में पूर्व में बहराइच व नेपाल सीमा से सटे इलाकों में पनाह ले चुके लश्कर-ए-तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन व अन्य आतंकियों द्वारा तैयार किए गए स्लीपिंग मॉड्यूल का यह सहारा ले सकते हैं।
खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तराई के बहराइच, लखीमपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर तक 28 ऐसे संदिग्ध युवकों की पहचान की गई है, जिनकी गतिविधियां संदेहास्पद हैं।
बेरोजगार होने के बावजूद ऐश-ओ-आराम की सभी चीजें इनके पास मौजूद हैं। ऐसे में पैसे का स्रोत क्या है, पता नहीं चल रहा है। हो सकता है आतंकी संगठनों द्वारा इनकी मदद की जा रही है और इन्हीं के सहारे प्रशिक्षित आतंकियों को भारत में प्रवेश कराने की तैयार हो।
ऐसे में सभी संदिग्धों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। इनकी गतिविधियों के साथ ही उनसे मिलने-जुलने वालों और मोबाइल पर बातचीत को भी ट्रेस किया जा रहा है।
ये है स्लीपिंग मॉड्यूल
नेपाल से सटे बहराइच में पूर्व में शरण ले चुके विभिन्न आतंकी संगठनों के आतंकवादियों ने किसी न किसी के सहारे बहराइच में कई दिन गुजारे। एसटीएफ व अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े जाने के बावजूद भी वह विभिन्न लोगों के संपर्क में किसी न किसी माध्यम से बने रहे। यही आतंकियों के स्लीपिंग मॉड्यूल हैं, जो तराई में सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
इन आतंकियों ने बहराइच में ली है पनाह
कोतवाली नगर के मोहल्ला नाजिरपुरा में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी कमांडर इरफान का मकान है। इरफान का बेटा अबरार भी लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार आतंकी रह चुका है। इसके अलावा डॉन दाऊद इब्राहीम के खानसामा जिब्राइल का मकान रिसिया के पटपरगंज में है।
वहीं, पंजाब के आतंकवादी सताराना ने कोतवाली नानपारा क्षेत्र के मटेरा में किसान बनकर शरण ली। इसके अलावा पाकिस्तान के आईएसआई एजेंट मशरूर उर्फ रमेश चौधरी, इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी अफजल भी बहराइच को अपनी पनाहगार बना चुके हैं। इन सबके संपर्क में कुछ युवाओं के होने की आशंका है।