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दरवाजा खोलते ही तेंदुए ने बालिका पर झपट्टा मारकर किया लहूलुहान

Wed, 27 Sep 2017 10:32 PM IST
Updated Wed, 27 Sep 2017 10:32 PM IST
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दरवाजा खोलते ही तेंदुए ने बालिका पर झपट्टा मारकर किया लहूलुहान
उर्रा (बहराइच)। धनगरपुरवा सेमरी मलमला गांव निवासी कक्षा पांच की छात्रा मंगलवार रात में लघुशंका के लिए घर से बाहर जा रही थी। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, द्वार पर पहले से मौजूद तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। चीख सुनकर दौड़े परिवारीजनों ने किसी तरह बालिका को तेंदुए के जबड़े से छुड़ाया। उसे लहूलुहान हालत में रात में ही सीएचसी पहुंचाया गया। मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने तेंदुए के हमले की पुष्टि की है। घटना से गांव के लोग दहशत में हैं।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मुर्तिहा रेंज अंतर्गत सेमरी मलमला ग्राम पंचायत का धनगरपुरवा गांव जंगल से सटा हुआ है। गांव निवासी संजीता (10) पुत्री राम आशीष पाल लोनियनपुरवा प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच की छात्रा है। संजीता को मंगलवार रात एक बजे के आसपास लघुशंका की शिकायत हुई। इस पर उसने मां को बताया तो मां ने दरवाजा खोलकर बाहर जाने को कहा। बालिका ने जैसे ही किवाड़ खोला तभी द्वार पर पहले से छिपे तेंदुए ने हमला कर दिया। बालिका की चीख सुनकर परिवार के लोग दौड़े। तेंदुए के जबड़े में बेटी को देखकर परिवारीजन सकते में आ गए। इस दौरान आस पड़ोस के लोग भी हांका लगाते हुए घरों से निकले। किसी तरह बालिका को तेंदुए के जबड़े से छुड़ाया गया। हाका लगने और मशाल जलाने के बाद तेंदुआ जंगल की ओर गया। रात में ही हमले की सूचना रेंज कार्यालय पर दी गई। आननफानन परिवारीजन संजीता को लेकर सीएचसी मोतीपुर पहुंचे। डॉक्टरों ने भर्ती कर बालिका का इलाज शुरू किया है। वहीं तेंदुए के हमले की सूचना पाकर पहुंचे वन रक्षक आनंद गौतम ने पदचिन्हों के आधार पर तेंदुए के हमले की पुष्टि की है। डीएफओ जीपी सिंह ने ने बताया कि तेंदुए ने हमला किया है। जांच के बाद मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
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अब तक 15 दिन में हो चुके हैं पांच हमले
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी 551 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। सात रेंजों में जंगल बंटा हुआ है। जंगल के आसपास 42 गांव स्थापित हैं। अक्सर बाघ और तेंदुए भटक कर जंगल से आबादी में पहुंच जाते हैं। सामने मवेशी और ग्रामीणों के आने पर उन पर हमला कर निशाना बनाते हैं। 15 दिन में पांच हमले हो चुके हैं। इनमें मोतीपुर रेंज के झाला गांव में एक बालिका समेत तीन लोग हमले में घायल हुए हैं। वहीं सेमरी मलमला गांव में बुधवार की घटना समेत दो बालिकाएं तेंदुए के हमले का निशाना बनी हैं।
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तो इसलिए आबादी में बढ़ी दखल
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (विश्व प्रकृति निधि भारत) के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि जंगल के आसपास स्थित खेतों में इस समय गन्ने की फसल तैयार है। धान भी लगा हुआ है। धान और गन्ने के खेत जंगल से सटे हैं। ऐसे में जंगल से भटककर इन खेतों में पहुंच रहे बाघ और तेंदुओं को जंगल का ही एहसास होता है। यही हमले का कारण बन रहा है।
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