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तराई में शीतलहर से बढ़ी ठिठुरन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Dec 2016 09:47 PM IST
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सर्दी का मौसम
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तराई में पड़ रही कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। घने कोहरे के चलते लोगों का सड़क पर चलना भी मुश्किल हो रहा है। लगातार दूसरे दिन सोमवार को भी धूप नहीं निकली। पारा लुढ़क कर 10 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। तेज पछुआ हवा ठिठुरन व गलन और बढ़ा रही है।
तराई में मौसम का मिजाज लोगों को बेहाल किए है। सोमवार सुबह फिर लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। सुबह देर तक कोहरा छाया रहा। पूरे दिन धुंध छाई रही। पछुआ हवा चलने से लोगों का दिन ठिठुरते और सिहरते हुए बीता। धूप नहीं निकलने से मजदूरी पेशा लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। लोग गर्म कपड़ों में लिपटकर बाहर निकले।
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि बहराइच का अधिकतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 3.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पछुवा हवा चल रही हैं। इससे मौसम में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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बताया कि दो दिन तक मौसम में उतार चढ़ाव के संकेत मिल रहे हैं। तराई के लोगों को बदली का भी सामना करना पड़ेगा। अभी ठंड से निजात मिलने के आसार नहीं है। ऐसे मौसम में आलू, सरसों और गेहूं की फसल के लिए संकट है।
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि तीन-चार दिन बदली और रही तो सरसों में माहू रोग का प्रकोप शुरू हो जाएगा। आलू को झुलसा और गेहूं को गेरुआ का प्रकोप नुकसान पहुंचा सकता है।
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तराई में मौसम का मिजाज लोगों को बेहाल किए है। सोमवार सुबह फिर लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। सुबह देर तक कोहरा छाया रहा। पूरे दिन धुंध छाई रही। पछुआ हवा चलने से लोगों का दिन ठिठुरते और सिहरते हुए बीता। धूप नहीं निकलने से मजदूरी पेशा लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। लोग गर्म कपड़ों में लिपटकर बाहर निकले।
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फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि बहराइच का अधिकतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 3.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पछुवा हवा चल रही हैं। इससे मौसम में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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बताया कि दो दिन तक मौसम में उतार चढ़ाव के संकेत मिल रहे हैं। तराई के लोगों को बदली का भी सामना करना पड़ेगा। अभी ठंड से निजात मिलने के आसार नहीं है। ऐसे मौसम में आलू, सरसों और गेहूं की फसल के लिए संकट है।
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि तीन-चार दिन बदली और रही तो सरसों में माहू रोग का प्रकोप शुरू हो जाएगा। आलू को झुलसा और गेहूं को गेरुआ का प्रकोप नुकसान पहुंचा सकता है।