{"_id":"69ea6a8fae3c607687068665","slug":"chief-judicial-magistrate-court-summoned-eo-nagar-palika-bahraich-news-c-98-1-slko1007-148155-2026-04-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: ईओ नगर पालिका को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने किया तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: ईओ नगर पालिका को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने किया तलब
विज्ञापन
बहराइच। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (ईओ) के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर छह मई को अदालत में तलब किया है। साथ ही जिलाधिकारी को मामले की प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
थाना दरगाह शरीफ के मोहल्ला हमजापुरा निवासी अजमत अली भूरी ने नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी प्रमिता सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए सीजेएम नीलम सरोज की अदालत में बीएनएस की धारा 173(4) के तहत वाद दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि 27 मई 2025 को दिए गए प्रार्थनापत्र और शपथपत्र पर किए गए हस्ताक्षर से ईओ ने इनकार करते हुए उल्टे याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी, जबकि हस्ताक्षर उनके ही बताए गए हैं।
याचिकाकर्ता का कहना था कि ईओ द्वारा न्यायालय में दाखिल अन्य मुकदमों के प्रपत्रों और वकालतनामों पर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान 27 मई 2025 के विवादित हस्ताक्षर से कर सत्यता की जांच की जा सकती है। मामले की सुनवाई करते हुए सीजेएम नीलम सरोज ने कहा कि प्रकरण एक सरकारी कर्मचारी से संबंधित है, इसलिए घटना की सत्यता और किसी संज्ञेय अपराध के होने या न होने की जांच आवश्यक है। उन्होंने आदेश दिया कि याचिका पर अंतिम निर्णय से पहले सक्षम अधिकारी से प्रारंभिक जांच कराना उचित होगा।
विज्ञापन
अदालत ने जिलाधिकारी को मामले की जांच कर छह मई को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ईओ प्रमिता सिंह को भी नोटिस जारी कर छह मई को सुबह साढ़े सात बजे अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
थाना दरगाह शरीफ के मोहल्ला हमजापुरा निवासी अजमत अली भूरी ने नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी प्रमिता सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए सीजेएम नीलम सरोज की अदालत में बीएनएस की धारा 173(4) के तहत वाद दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि 27 मई 2025 को दिए गए प्रार्थनापत्र और शपथपत्र पर किए गए हस्ताक्षर से ईओ ने इनकार करते हुए उल्टे याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी, जबकि हस्ताक्षर उनके ही बताए गए हैं।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता का कहना था कि ईओ द्वारा न्यायालय में दाखिल अन्य मुकदमों के प्रपत्रों और वकालतनामों पर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान 27 मई 2025 के विवादित हस्ताक्षर से कर सत्यता की जांच की जा सकती है। मामले की सुनवाई करते हुए सीजेएम नीलम सरोज ने कहा कि प्रकरण एक सरकारी कर्मचारी से संबंधित है, इसलिए घटना की सत्यता और किसी संज्ञेय अपराध के होने या न होने की जांच आवश्यक है। उन्होंने आदेश दिया कि याचिका पर अंतिम निर्णय से पहले सक्षम अधिकारी से प्रारंभिक जांच कराना उचित होगा।
विज्ञापन
अदालत ने जिलाधिकारी को मामले की जांच कर छह मई को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ईओ प्रमिता सिंह को भी नोटिस जारी कर छह मई को सुबह साढ़े सात बजे अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।