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छह पूजा शुरू, मगर घाटों पर गंदगी के अंबार

Thu, 31 Oct 2019 10:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Oct 2019 10:42 PM IST
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Chhath poojas begin, but the ghats are filled with dirt
बहराइच में झिंगहाघाट स्थित सरयू नदी में फैली गंदगी। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। छठ पूजा शुरू हो गई है। शुक्रवार को पवित्रीकरण स्नान से भगवान सूर्य की आराधना का क्रम शुरू होगा। जबकि नदी, नाले व तालाब के पूजित तट पर दो नवंबर की शाम भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। लेकिन अभी तक पूजित स्थानों पर साफ-सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है और न ही प्रकाश की व्यवस्था की गई। पूजा करने वाले स्थानों पर चारो तरफ गंदगी पसरी है। इससे अव्यवस्था के बीच छठ पूजा की परंपरा का निर्वहन करना सभी लोगों की मजबूरी होगी।
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छठ पूजा के तहत कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को तालाब या नदी के तट पर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। शहर के सरयू नदी पर स्थित झिंगहाघाट, छोटी बेरिया, उर्रा के सोती नाला, मिहींपुरवा में सरयू नदी के तट पर, रुपईडीहा के हनुमंत सरोवर तथा नेपालगंज बांके जिले में स्थित बागेश्वरी माता मंदिर के तालाब, रानी तालाब और राप्ती नदी के तट पर सूर्य देवता की आराधना के लिए दो दिन निराजल व्रत रहकर अर्चना की जाती है।
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वैसे इस व्रत की तैयारियां चार दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। प्रथम दिन माताएं लौकी का पकवान, दूसरे दिन चावल का मीठा पकवान, तीसरे दिन निराजल व्रत, उसी दिन नदी, तालाबों, नहरों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य, चौथे दिन उगते सूर्य को प्रात:काल अर्घ्य देकर पुत्र की सलामती की दुआ मांगते हुए अपना व्रत तोड़ती हैं।
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छठ पूजा को इस बार भी घरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। लेकिन अभी तक नदी, नाले और तालाब के पूजित तट पर साफ-सफाई नहीं की गई है। पूजा करने वाले स्थानों पर कहीं जलकुंभी और सेवार से तट पटा हुआ है तो कहीं गंदगी के चलते खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। पूजा करने वाले स्थानों पर गंदगी पसरी है। इसी गंदगी के बीच छठ पूजा की परंपरा का निर्वहन करना सभी की मजबूरी होगी।
इस कारण मनाया जाता है पर्व
छठ पर्व पर भगवान सूर्य की आराधना महाभारत काल से होती है। लोगों का मानना है कि महाभारत काल में दुर्योधन ने अपने मित्र कर्ण को धनुष विद्या की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए की गई शर्त को पूरा करते हुए कुंती पुत्र कर्ण को अंग प्रदेश का राज्य देकर उन्हें अंग देश का राजा बनाया था। राजा कर्ण ने अपने देश की जनता के सुख, समृद्धि के लिए अपने पिता सूर्य की आराधना शुरू की थी। तभी से भगवान सूर्य की आराधना कर अपने बच्चों की सलामती की दुआ माताएं मांगती आ रही हैं।
यह है छठ पूजा का समय-
छोटी बेरिया मंदिर के पुजारी मगनबिहारी पांडेय ने बताया कि इस वर्ष 31 अक्तूबर को नहान खान, एक नवंबर को खरना, दो नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को शाम को अर्घ्य और तीन नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत धारिणी महिलाएं के पारण का योग है।
पूजा समिति ने समस्याओं पर उठाई आवाज
छठ पूजा समिति समय माता मंदिर छोटी बेरिया के पदाधिकारियों की बैठक बीत दिन मंदिर परिसर में हुई। बैठक में लोगों ने सूर्योपासना के मद्देनजर छोटी बेरिया स्थित तट के तालाब की साफ सफाई और प्रकाश की व्यवस्था कराने के लिए आवाज उठाई। तालाब के तट पर सीढ़ियां बनवाने का भी प्रस्ताव लोगों ने किया। बैठक में आरपी शाही, उमेश सिंह, डॉ. निरंकार जायसवाल ने समुचित व्यवस्थाएं करने के लिए प्रशासन का भी सहयोग मांगा है।

सफाई व्यवस्था के दिए गए निर्देश
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष रुबीना रेहान ने बताया कि छठ पर्व के मद्देनजर झिंगहाघाट स्थित सरयू तट और छोटी बेरिया मंदिर स्थित तालाब के तट की साफ -सफाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य पर्व दो और तीन नवंबर को है। इस दिन से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाएगी। उधर, डीएम ने भी अधिकारियों से व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। नदी के घाटों पर गोताखोरों की तैनाती के निर्देश भी दिए गए हैं।
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