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Bahraich News: बदला मन, शिक्षा की तरफ बढ़ रहे कदम

Sun, 14 Apr 2024 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Sun, 14 Apr 2024 11:52 PM IST
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Changed mind, steps towards education
पुनीत चौरसिया
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बहराइच। एक कैदी को भी अध्ययन करने का उतना ही अधिकार होता है जितना जेल से मुक्त किसी व्यक्ति को। शिक्षा कैदियों में ऐसी भावना पैदा कर सकती है जिससे वह दोबारा जुर्म के रास्ते पर लौटने की न सोचें। इसी तरह जिला कारागार में भी कई कैदी प्रशासन की मदद से शिक्षा ग्रहण कर आगे बढ़ रहे हैं। जेल के अंदर बंदी कैसे रहते होंगे यह बात आम आदमियों के मन में भी आती होगी।
जिला कारागार में कोई हत्या जैसे संगीन जुर्म में सजा काट रहा है तो कोई जान से मारने की धमकी, लूट, डकैती, दुष्कर्म जैसी वारदात का आरोपी है। लेकिन जेल के अंदर कई बंदियों की सोच बदलने लगती है। वे अध्ययन में रुचि रखते हुए अपने-अपने स्तर से प्रशासन से कक्षाओं में दाखिले की इच्छा जताते हुए कई तरह के कोर्सों को पूरा कर अपना भविष्य सुधारने की कोशिश करते हैं। प्रत्येक दिन पांच से छह घंटे पढ़ाई करते हैं। मौजूदा समय में जिला कारागार में बंद 1130 कैदियों में से तीन यूपी बोर्ड दसवीं कक्षा की परीक्षा देने पुलिस अभिरक्षा में गोरखपुर गए थे। जहां उन्होंने जिला कारागार में शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए विषयों की सहायता से परीक्षाएं दी है। वहीं कई कैदी कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं जो कैदी बारहवीं पास कर चुके होते हैं और उच्च शिक्षा जारी रखना चाहते हैं तो उनके लिए जेल में ही इग्नू केंद्र के माध्यम से स्नातक या परास्नातक में प्रवेश लेने के साथ ही पढ़ाई और परीक्षाओं की व्यवस्था की जाती है।
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केस-01 : हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं में आजीवन कारावास की सजा काट रहे नानपारा निवासी 28 वर्षीय सर्वजीत यादव ने दसवीं की परीक्षा दी है। उन्होंने गणित, हिंदी सहित आदि विषयों का अध्ययन कर परीक्षा दी। वह वर्ष 2016 से जेल में बंद है।
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केस-02 : असमानपुर रामगढ़ निवासी 32 वर्षीय फारुख उर्फ छूटकऊ वर्ष 2020 से हत्या के एक मामले में विचाराधीन था। वर्तमान में जमानत पर बाहर है। दसवीं की बोर्ड परीक्षा देने पुलिस अक्षिरक्षा में गोरखपुर गया था।
केस-03 : पिछले दो वर्ष से एक गंभीर मामले के आरोपी खैरीघाट के छतरपुर निवासी 22 वर्षीय युवक ने भी पढऩे की इच्छा जाहिर की थी। जेल के शिक्षकों ने उसकी दसवीं की पढ़ाई में सहयोग किया था बोर्ड परीक्षा दी है।

परीक्षाओं के दौरान कैदियों की मिलती है यह छूट
परीक्षाओं के दौरान उन्हें काम से छूट दी जाती है। हल्का शारीरिक कार्य कराया जाता है। जिससे उन्हें अध्ययन के लिए समय मिल सके। जेल में किताबें और अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। जेल में पुस्तकालय भी है जहां से वे अध्ययन सामग्री ले सकते है।
दो शिक्षक हैं तैनात
जेल में बंद सजायाफ्ता या विचाराधीन कैदियों के अध्ययन व पठन पाठन के लिए दो शिक्षकों पंकज पांडेय और राजेश कुमार को रखा गया है। जिससे कैदियों की पढ़ाई नियमित होने के साथ ही शिक्षक उन्हें नैतिकता का भी ज्ञान देते हैं। ताकि वह अपराध छोड़ अच्छे नागरिक बन सकें।

योग्यता के अनुसार दिलाई जाती है शिक्षा
जेल में बंद सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों को उनकी इच्छा और योग्यता के अनुसार शिक्षा दिलाई जाती है। नियमित तौर पर उनकी कक्षा चलती है, जिसमें जेल में तैनात शिक्षक उनका मार्गदर्शन व सहयोग करते हैं। ताकि जेल से छूटने के बाद उक्त कैदी भी रोजगार कर अपना भरण पोषण कर सकें।
- देवकांत वर्मा, डिप्टी जेलर
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