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फखरुद्दीन ने उठाया कांवड़, कौमी एकता की बने मिसाल
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23 बीएचआर 38 - बौंडी के कोदही गांव से कांवड़ लेकर जल चढ़ाने लोधेश्वर महादेव जाते फखरुद्दीन व अन्य।
- फोटो : BAHRAICH
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महसी (बहराइच)। बहराइच को यूं ही नहीं गंगा जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है। यहां आए दिन कौमी एकता को बढ़ावा देने वाली एक से बढ़कर एक तस्वीरें समाज के सामने आती हैं। शहर के पप्पू किदवई की गो सेवा हो, घुरेहरीपुर के मोहम्मद अली की माता घूरदेवी की पूजा-अर्चना हो या अरई कला के शाकिर अली का भागवत कथा सुनना हो...।
ये सभी संस्मरण बहराइच को सबसे अलग बनाते हैं। अब इस कतार में बौंडी के कोदही गांव में रहने वाले विशेष समुदाय के फखरुद्दीन ने अपना नाम शुमार करवा लिया है। शनिवार को जब फखरुद्दीन गेरुआ वस्त्र में कांधे पर कांवड़ रखकर महादेवा स्थित लोधेश्वर महादेव को जल चढ़ाने के लिए निकले तो कौमी एकता की सबसे बड़ी तस्वीर एक बार फिर लोगों के जेहन में कौंध गई।
फखरुद्दीन से जब कांवड़ ले जाने के बारे में पूंछा गया तो उन्होंने कहा कि वे जन्म से ही सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। जब हिंदू दरगाह में सर पर रखकर चादर चढ़ा सकते हैं तो हम लोग कांवड़ क्यों नहीं ले जा सकते। मैं पांच वक्त की नमाज पढ़ता हूं तो भोलेनाथ की आराधना भी करता हूं। अब तक नैमिषारण्य, अयोध्या, मां वैष्णों देवी समेत कई तीर्थों को जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किये हैं।
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मुझे इन देवी देवताओं का आशीर्वाद फलीभूत हो रहा है। हर कौम के लोगों को एक दूसरे के धर्मों पर टीका-टिप्पणी के बजाए उनकी अच्छाइयों का अनुसरण करना चाहिए। फखरुद्दीन के इस कदम की चहुंओर तारीफ हो रही है। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के प्रति आस्था का श्रेय घूरदेवी मंदिर के प्रबंधक मोहम्मद अली को दिया।
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ये सभी संस्मरण बहराइच को सबसे अलग बनाते हैं। अब इस कतार में बौंडी के कोदही गांव में रहने वाले विशेष समुदाय के फखरुद्दीन ने अपना नाम शुमार करवा लिया है। शनिवार को जब फखरुद्दीन गेरुआ वस्त्र में कांधे पर कांवड़ रखकर महादेवा स्थित लोधेश्वर महादेव को जल चढ़ाने के लिए निकले तो कौमी एकता की सबसे बड़ी तस्वीर एक बार फिर लोगों के जेहन में कौंध गई।
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फखरुद्दीन से जब कांवड़ ले जाने के बारे में पूंछा गया तो उन्होंने कहा कि वे जन्म से ही सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। जब हिंदू दरगाह में सर पर रखकर चादर चढ़ा सकते हैं तो हम लोग कांवड़ क्यों नहीं ले जा सकते। मैं पांच वक्त की नमाज पढ़ता हूं तो भोलेनाथ की आराधना भी करता हूं। अब तक नैमिषारण्य, अयोध्या, मां वैष्णों देवी समेत कई तीर्थों को जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किये हैं।
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मुझे इन देवी देवताओं का आशीर्वाद फलीभूत हो रहा है। हर कौम के लोगों को एक दूसरे के धर्मों पर टीका-टिप्पणी के बजाए उनकी अच्छाइयों का अनुसरण करना चाहिए। फखरुद्दीन के इस कदम की चहुंओर तारीफ हो रही है। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के प्रति आस्था का श्रेय घूरदेवी मंदिर के प्रबंधक मोहम्मद अली को दिया।