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दो दशक में भी पूरी नहीं हुई नगर पंचायत की आस

Thu, 02 Dec 2021 11:18 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 11:18 PM IST
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मिहींपुरवा (बहराइच)। जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर वनांचल की तलहटी में बसे मोतीपुर तहसील के मिहींपुरवा कस्बे के लोग दो दशकों से क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। 60 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र राजनीति दृष्टिकोण से नेताओं के लिए तो उपजाऊ है, लेकिन विकास के नाम पर यहां कोई काम नहीं हुआ है। क्षेत्र ने फजलुर्रहमान अंसारी, जटाशंकर सिंह जैसे नेता दिए हैं, जिन्होंने कई बार क्षेत्र से चुनाव जीता। बावजूद इसके आज तक क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल सका है। सपा शासन में प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री रहे बंशीधर बौद्ध भी इसी क्षेत्र के निवासी हैं, लेकिन वह भी क्षेत्र वासियों को नगरपंचायत की खुशी दिलाने में सफल नहीं रहे।
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मिहींपुरवा क्षेत्र के मतदाता पछले दो दशकों से हर चुनाव में क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधि लोगों के आशाओं पर खरे नहीं उतरे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक है और एक बार पुन: नगर पंचायत का दर्जा दिलाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस बार कस्बे के चार ग्राम पंचायतों परवानीगौढ़ी, कुड़वा, मिहींपुरवा व मोतीपुर के लगभग 30 हजार मतदाता व 60 हजार की आबादी ने वादा पूरा करने वाले को वोट देने का निर्णय लिया है।
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मिहींपुरवा को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग सर्वप्रथम वर्ष 2000 में तत्कालीन सांसद रुवाब सईदा ने लोकसभा में उठाई थी। भाजपा से विधायक रहे जटाशंकर सिंह, बसपा से विधायक रहे वारिस अली, बलहा उपचुनाव में सपा से जीते पूर्व मंत्री वंशीधर बौद्ध, भाजपा से सांसद व विधायक रही सावित्री बाई फूले व भाजपा से वर्तमान विधायक सरोज सोनकर ने भी लोगों की मांग पूरी करवाने का वादा किया, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने जनता की यह मांग परवान नहीं चढ़ सकी।
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नेपाल सीमा से सटा मिहींपुरवा का बाजार व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां स्थित वन डिपो में साखू, सागवन व खैर जैसी बेशकीमती लकड़ी की नीलामी होती है जिससे करोड़ों का राजस्व मिलता है। वहीं, मिहींपुरवा का परवल भी पूरे देश में बिक्री के लिए जाता है और करोड़ों का राजस्व प्राप्त होता है। मिहींपुरवा की बाजार चार ग्राम पंचायतों कुड़वा, परवानीगौढ़ी, मिहींपुरवा व मोतीपुर तक फैली है।
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