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कृषि कानून वापसी के एलान से खुशी
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बहराइच। तीनों कृषि कानूनों की वापसी के एलान से किसानों में खुशी छा गई। किसानों ने प्रधानमंत्री के फैसले की सराहना करते हुए मिठाई बांटी और खुशियों का इजहार किया। वहीं, विपक्षियों ने प्रधानमंत्री के इस फैसले को चुनावी स्टंट बताया है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तीनों कृषि कानून वापस लेने का एलान किया। पीएम के एलान के बाद ही भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। भाजपा नेता ओम प्रकाश वर्मा ने कार्यकर्ताओं के साथ जरवल में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के नेता मोहनलाल ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि 22 नवंबर को लखनऊ में राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की महापंचायत होगी। उसमें जो फैसला होगा उसी के हिसाब से आगे कदम उठाया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत अराजनीतिक के तहसील अध्यक्ष साधुशरण वर्मा ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री का फैसला आने के बाद पटाखे फोड़े और मिठाई बांटी। इस मौके पर तहसील प्रभारी सुखविंदर सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष बलहा रामबनारस वर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष रिसिया सुंदरलाल जायसवाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे। सामाजिक संस्था सद्भावना के अध्यक्ष योगेंद्र मणि त्रिपाठी ने फैसला आने के बाद गुरुद्वारे पहुंचकर मत्था टेका। इस मौके पर केशवराम आर्य, एखलाक, जसवीर सिंह, परमिंदर सिंह, राशिद अली समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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वहीं, सपा नेता अवधेश वर्मा ने कहा कि आखिरकार मोदी सरकार का घमंड टूट ही गया। किसान भाईयों की जीत हुई। युवजन सभा प्रदेश सचिव रामजी यादव ने कहा कि भाजपा की सरकार 2022 में जाने वाली है। इस बात को प्रधानमंत्री अंदाजा लगा चुके है। इसीलिए चुनाव को देखते हुए अपने आपको किसानों के सामने हार मानकर फैसला वापस लेने का ऐलान किया। जनता ने अब सोच लिया है कि 2022 में सरकार को बदलना है।
जिस तरह से पूंजीवादियों व सरकार के बीच मिलीभगत चल रही है। किसानों के एक वर्ष आंदोलन के बाद ठीक विधानसभा चुनाव से पहले कानून वापस लिया गया है। किसानों मेें भ्रम फैलाने व छलने का एक चुनावी स्टंट है। कानून संसद में बनता है और संसद में वापस होता है। प्रधानमंत्री जान चुके है कि 2022 में उत्तर प्रदेश से भाजपा का सूफड़ा साफ होगा इसलिए आगामी चुनाव को देखते हुए ऐसा फैसला लिया गया है।
रामहर्ष यादव, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी
देश के प्रधानमंत्री को एक वर्ष के बाद ईश्वर ने सद्बुद्धि दी है। आंदोलन मेें कई किसान शहीद हो गए, लेकिन एक वर्ष तक प्रधानमंत्री चुप्पी साधे रहे। अब प्रदेश मेें चुनाव भी करीब हैं। प्रदेश से भाजपा का सफाया भी तय हो चुका है। इसी से भयभीत होकर प्रधानमंत्री ने कानून वापस लेने की घोषणा की है।
इंजीनियर जेपी मिश्रा, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
भाजपा सरकार किसानों की हितैषी नहीं है। अगर हितैषी होती तो कृषि कानून लेकर न आती। आखिरकार किसानों के आगे प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा। प्रधानमंत्री ने फैसला देेर से लिया है। यही फैसला अगर पहले लिया होता तो किसान शहीद नहीं हुए होते। इस नुकसान की भरपाई कभी नहीं की जा सकती है।
अजय गौतम, जिलाध्यक्ष बसपा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है। वह सिर्फ आगामी चुनाव को देखते हुए लिया गया है। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश का दौरा किया तो उनको पता चल गया कि 2022 में भाजपा हारने वाली है इसलिए झुककर अपनी हार स्वीकार कर ली। यह फैसला किसानों को लुभाने के लिए लिया गया है।
मुस्तकीम सलमानी, जिला उपाध्यक्ष, कांग्रेस
भारतीय किसान यूनियन का एक साल से तीनों कानून वापस कराने के लिए धरना-प्रदर्शन चल रहा था। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने फैसला वापस लेने का एलान किया। प्रधानमंत्री के फैसले की सराहना करता हूं और राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत को धन्यवाद देता हूं कि किसानों की लड़ाई को मजबूती से लड़ते रहें।
- ओमप्रकाश वर्मा, किसान नेता
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तीनों कृषि कानून वापस लेने का एलान किया। पीएम के एलान के बाद ही भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। भाजपा नेता ओम प्रकाश वर्मा ने कार्यकर्ताओं के साथ जरवल में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के नेता मोहनलाल ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि 22 नवंबर को लखनऊ में राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की महापंचायत होगी। उसमें जो फैसला होगा उसी के हिसाब से आगे कदम उठाया जाएगा।
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भारतीय किसान यूनियन टिकैत अराजनीतिक के तहसील अध्यक्ष साधुशरण वर्मा ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री का फैसला आने के बाद पटाखे फोड़े और मिठाई बांटी। इस मौके पर तहसील प्रभारी सुखविंदर सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष बलहा रामबनारस वर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष रिसिया सुंदरलाल जायसवाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे। सामाजिक संस्था सद्भावना के अध्यक्ष योगेंद्र मणि त्रिपाठी ने फैसला आने के बाद गुरुद्वारे पहुंचकर मत्था टेका। इस मौके पर केशवराम आर्य, एखलाक, जसवीर सिंह, परमिंदर सिंह, राशिद अली समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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वहीं, सपा नेता अवधेश वर्मा ने कहा कि आखिरकार मोदी सरकार का घमंड टूट ही गया। किसान भाईयों की जीत हुई। युवजन सभा प्रदेश सचिव रामजी यादव ने कहा कि भाजपा की सरकार 2022 में जाने वाली है। इस बात को प्रधानमंत्री अंदाजा लगा चुके है। इसीलिए चुनाव को देखते हुए अपने आपको किसानों के सामने हार मानकर फैसला वापस लेने का ऐलान किया। जनता ने अब सोच लिया है कि 2022 में सरकार को बदलना है।
जिस तरह से पूंजीवादियों व सरकार के बीच मिलीभगत चल रही है। किसानों के एक वर्ष आंदोलन के बाद ठीक विधानसभा चुनाव से पहले कानून वापस लिया गया है। किसानों मेें भ्रम फैलाने व छलने का एक चुनावी स्टंट है। कानून संसद में बनता है और संसद में वापस होता है। प्रधानमंत्री जान चुके है कि 2022 में उत्तर प्रदेश से भाजपा का सूफड़ा साफ होगा इसलिए आगामी चुनाव को देखते हुए ऐसा फैसला लिया गया है।
रामहर्ष यादव, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी
देश के प्रधानमंत्री को एक वर्ष के बाद ईश्वर ने सद्बुद्धि दी है। आंदोलन मेें कई किसान शहीद हो गए, लेकिन एक वर्ष तक प्रधानमंत्री चुप्पी साधे रहे। अब प्रदेश मेें चुनाव भी करीब हैं। प्रदेश से भाजपा का सफाया भी तय हो चुका है। इसी से भयभीत होकर प्रधानमंत्री ने कानून वापस लेने की घोषणा की है।
इंजीनियर जेपी मिश्रा, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
भाजपा सरकार किसानों की हितैषी नहीं है। अगर हितैषी होती तो कृषि कानून लेकर न आती। आखिरकार किसानों के आगे प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा। प्रधानमंत्री ने फैसला देेर से लिया है। यही फैसला अगर पहले लिया होता तो किसान शहीद नहीं हुए होते। इस नुकसान की भरपाई कभी नहीं की जा सकती है।
अजय गौतम, जिलाध्यक्ष बसपा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है। वह सिर्फ आगामी चुनाव को देखते हुए लिया गया है। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश का दौरा किया तो उनको पता चल गया कि 2022 में भाजपा हारने वाली है इसलिए झुककर अपनी हार स्वीकार कर ली। यह फैसला किसानों को लुभाने के लिए लिया गया है।
मुस्तकीम सलमानी, जिला उपाध्यक्ष, कांग्रेस
भारतीय किसान यूनियन का एक साल से तीनों कानून वापस कराने के लिए धरना-प्रदर्शन चल रहा था। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने फैसला वापस लेने का एलान किया। प्रधानमंत्री के फैसले की सराहना करता हूं और राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत को धन्यवाद देता हूं कि किसानों की लड़ाई को मजबूती से लड़ते रहें।
- ओमप्रकाश वर्मा, किसान नेता