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इस बार भवानीपुर घाट पर नहीं लगा मेला
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बहराइच। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कतर्नियाघाट के भवानीपुर घाट पर परंपरागत रूप से आयोजित होने वाला मेला इस बार नहीं हो सका। वन विभाग ने इस बार यहां पर मेले के आयोजन को अनुमति नहीं दी। इस दौरान श्रद्धालुओं और वनकर्मियों में नोकझोंक भी हुई। सैकड़ों की संख्या में लगने वाली दुकानें भी नहीं लगीं। वन कर्मियों ने स्थानीय पुलिस बल की मदद से लोगों और श्रद्धालुओं को दूर से ही पवित्र स्थान के दर्शन कराकर लौटा दिया।
स्थानीय लोग जब गुरुवार की शाम को घाट की साफ-सफाई व भजन कीर्तन करने पंहुचे तो वन विभाग ने थाना सुजौली के पुलिस बल की मदद से श्रद्धालुओं को वापस कर दिया। इस दौरान स्थानीय लोगों और वनकर्मियों में काफी नोकझोंक भी हुई। कार्तिक पूर्णिमा की सुबह शुक्रवार को जब बिछिया बैरियर पर तैनात सुजौली पुलिस के जवानों ने मेले में आए लोगों को वापस कर दिया तो लोगों ने थानाध्यक्ष सुजौली सुरेंद्र प्रताप सिंह से बातचीत की। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के हमलों को देखते हुए घाट पर लोगों की भीड़ लगाने पर रोक लगाई जा रही है।
बिछिया बैरियर से वापस लौट रहे लोगों में आशाराम, जगदीश, जोत कुमार निवासी पढुहा खीरी, इरफान नई बस्ती सुजौली, स्वामीदयाल निवासी बड़खड़िया, मोनू आदि ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से भवानीपुर घाट पर सजने वाले मेले में दुकान लगाते हैं। इस बार भी वह पूरी तैयारी के साथ पंहुचे, लेकिन उन्हें बिछिया से ही वापस कर दिया गया। वनग्राम भवानीपुर के श्रद्धालुओं ने जंग हिंदुस्तानी की अगुवाई में गांव से घाट तक पैदल गंगा यात्रा निकाली, जिसमें गांव के दर्जनों श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए घाट पर पहुंचे। उन्होंने हल्दू के पुराने वृक्ष के नीचे स्थापित शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए पूजन-अर्चन किया व मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करते हुए सभी ने एक साथ नदी के दर्शन किए।
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पिछली बार भी वन विभाग द्वारा भवानीपुर घाट पर मेला नहीं लगने दिया गया था। किसी को भी जंगल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यह एरिया संरक्षित वन क्षेत्र का है। 50 जंगली हाथियों का झुंड इस समय भवानीपुर के आसपास के जंगल में डेरा जमाए हुए हैं। यह फैसला सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया गया है। जगह-जगह वन विभाग की टीम तैनात है। -आकाशदीप बधावन, प्रभागीय वनाधिकारी
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स्थानीय लोग जब गुरुवार की शाम को घाट की साफ-सफाई व भजन कीर्तन करने पंहुचे तो वन विभाग ने थाना सुजौली के पुलिस बल की मदद से श्रद्धालुओं को वापस कर दिया। इस दौरान स्थानीय लोगों और वनकर्मियों में काफी नोकझोंक भी हुई। कार्तिक पूर्णिमा की सुबह शुक्रवार को जब बिछिया बैरियर पर तैनात सुजौली पुलिस के जवानों ने मेले में आए लोगों को वापस कर दिया तो लोगों ने थानाध्यक्ष सुजौली सुरेंद्र प्रताप सिंह से बातचीत की। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के हमलों को देखते हुए घाट पर लोगों की भीड़ लगाने पर रोक लगाई जा रही है।
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बिछिया बैरियर से वापस लौट रहे लोगों में आशाराम, जगदीश, जोत कुमार निवासी पढुहा खीरी, इरफान नई बस्ती सुजौली, स्वामीदयाल निवासी बड़खड़िया, मोनू आदि ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से भवानीपुर घाट पर सजने वाले मेले में दुकान लगाते हैं। इस बार भी वह पूरी तैयारी के साथ पंहुचे, लेकिन उन्हें बिछिया से ही वापस कर दिया गया। वनग्राम भवानीपुर के श्रद्धालुओं ने जंग हिंदुस्तानी की अगुवाई में गांव से घाट तक पैदल गंगा यात्रा निकाली, जिसमें गांव के दर्जनों श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए घाट पर पहुंचे। उन्होंने हल्दू के पुराने वृक्ष के नीचे स्थापित शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए पूजन-अर्चन किया व मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करते हुए सभी ने एक साथ नदी के दर्शन किए।
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पिछली बार भी वन विभाग द्वारा भवानीपुर घाट पर मेला नहीं लगने दिया गया था। किसी को भी जंगल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यह एरिया संरक्षित वन क्षेत्र का है। 50 जंगली हाथियों का झुंड इस समय भवानीपुर के आसपास के जंगल में डेरा जमाए हुए हैं। यह फैसला सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया गया है। जगह-जगह वन विभाग की टीम तैनात है। -आकाशदीप बधावन, प्रभागीय वनाधिकारी