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1.7 करोड़ का काम, 20 लाख का निकाल दिया टेंडर
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18 बीएचआर 37 - महसी के बेलहा-बेहरौली तटबंध में बना रेटहौल।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच/महसी। बेलहा-बेहरौली तटबंध रेनकट व रैटहोल के साथ मिट्टी बहने से कई जगह पर जर्जर हो गया था। जर्जर तटबंध की मरम्मत के लिए शासन ने 1.70 करोड़ रुपये का बजट भेजा था मगर बाढ़ खंड के अधिकारियों ने बजट की बंदरबांट करने के लिए महज बीस लाख रुपये का ही टेंडर निकाला। तटबंध की मरम्मत की जांच के लिए रामगंगा कमांड परियोजना के दो सदस्यीय अधिकारियों की टीम ने दौरा किया। टीम अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव सिंचाई को सौंपेगी।
बेलहा-बेहरौली तटबंध करीब 95 किलोमीटर लंबा है। यह महसी तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पांच लाख की आबादी को सुरक्षा प्रदान करता है। बाढ़ से गांवों को बचाने के लिए बनाए गए तटबंध पर प्रतिवर्ष बरसात के दौरान रेनकट हो जाते हैं। मिट्टी बह जाती है। वहीं खेतों में रहने वाले चूहे भी बड़े-बड़े होल कर देते हैं। रेन कट और रैटहोल समेत अन्य मरम्मत के काम के लिए सरकार ने इस बार बाढ़ ड्रेनेज खंड को 1.70 करोड़ रुपये का बजट दिया था। बजट दिए जाने के बाद इसकी बंदरबांट का खेल शुरु कर दिया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बार तटबंध की मरम्मत के लिए भेजे गए बजट में महज 20 लाख रुपये का ही टेंडर कराया गया। इसकी जांच करने के लिए शुक्रवार को रामगंगा कमांड परियोजना कानपुर के अधीक्षण अभियंता राकेश यादव व रामगंगा निचली नहर परियोजना के अधिशासी अभियंता यासीन खां बहराइच पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने तटबंध का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगह पर रेनकट व रैटहोल बने मिले। सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि वह अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव सिंचाई को सौंपेंगे। जांच कई जगह पर खामियां पाई गई हैं। संवाद
सहायक अभियंता बाढ़ खंड बीबी पाल का कहना है कि शासन की ओर से 1.70 करोड़ का बजट दिया गया था। इसके सापेक्ष अभी नायलान कैरेट व प्लास्टिक की खाली बोरियों का टेंडर कराया गया है। करीब बीस लाख रुपये का ही टेंडर हुआ है। आगे का काम कराया जा रहा है। मगर टेंडर निकाले जाने के बारे में वह चुप्पी साध गए।
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बाढ़ ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि कानपुर के अधिकारी नियमित जांच के लिए आए थे। बाढ़ की तैयारियों आदि के संबंध में चल रहे काम की रिपोर्ट वह उच्चाधिकारियों को देंगे। टेंडर में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं बरती जा रही है।
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बेलहा-बेहरौली तटबंध करीब 95 किलोमीटर लंबा है। यह महसी तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पांच लाख की आबादी को सुरक्षा प्रदान करता है। बाढ़ से गांवों को बचाने के लिए बनाए गए तटबंध पर प्रतिवर्ष बरसात के दौरान रेनकट हो जाते हैं। मिट्टी बह जाती है। वहीं खेतों में रहने वाले चूहे भी बड़े-बड़े होल कर देते हैं। रेन कट और रैटहोल समेत अन्य मरम्मत के काम के लिए सरकार ने इस बार बाढ़ ड्रेनेज खंड को 1.70 करोड़ रुपये का बजट दिया था। बजट दिए जाने के बाद इसकी बंदरबांट का खेल शुरु कर दिया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बार तटबंध की मरम्मत के लिए भेजे गए बजट में महज 20 लाख रुपये का ही टेंडर कराया गया। इसकी जांच करने के लिए शुक्रवार को रामगंगा कमांड परियोजना कानपुर के अधीक्षण अभियंता राकेश यादव व रामगंगा निचली नहर परियोजना के अधिशासी अभियंता यासीन खां बहराइच पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने तटबंध का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगह पर रेनकट व रैटहोल बने मिले। सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि वह अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव सिंचाई को सौंपेंगे। जांच कई जगह पर खामियां पाई गई हैं। संवाद
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सहायक अभियंता बाढ़ खंड बीबी पाल का कहना है कि शासन की ओर से 1.70 करोड़ का बजट दिया गया था। इसके सापेक्ष अभी नायलान कैरेट व प्लास्टिक की खाली बोरियों का टेंडर कराया गया है। करीब बीस लाख रुपये का ही टेंडर हुआ है। आगे का काम कराया जा रहा है। मगर टेंडर निकाले जाने के बारे में वह चुप्पी साध गए।
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बाढ़ ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता शोभित कुशवाहा ने बताया कि कानपुर के अधिकारी नियमित जांच के लिए आए थे। बाढ़ की तैयारियों आदि के संबंध में चल रहे काम की रिपोर्ट वह उच्चाधिकारियों को देंगे। टेंडर में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं बरती जा रही है।