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राम के वनवास से अयोध्यावासियों के छलके आंसू

Sat, 05 Oct 2019 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2019 11:03 PM IST
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Ayodhya residents shed tears due to Ram's exile
बहराइच के रामलीला मैदान में रामलीला के दौरान मंचन करते कलाकार। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। नगर के रामलीला मैदान में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामलीला कमेटी के तत्वावधान में वृंदावन के कलाकारों की ओर से आकर्षक रामलीला का मंचन किया जा रहा है। वृंदावन से आए रामलीला मंचन के प्रभारी व्यास दीपक कृष्ण गोस्वामी मंचन के बीच में संस्कृत श्लोक के माध्यम से रामायण की कथा दर्शकों के सामने पेश कर रहे है।
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उन्होंने बताया कि बीती रात रामलीला मंचन में कैकेई की ओर से राजा दशरथ से मांगे गए वरदान में राम को 14 वर्षों के लिए वनवास जाना पड़ता है। यह संदेश सुनकर समस्त अयोध्यावासियों के आंसू छलक पड़ते हैं। राम-केवट संवाद और दशरथ मरण की लीला का मंचन भी हुआ। राम के वियोग में तड़प रहे दशरथ की व्याकुलता को देखकर दर्शक भावुक हो उठे।
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व्याकुल स्थिति में सुमंत जी अयोध्या पहुंचते हैं। इसी के साथ दशरथ मरण की लीला शुरू होती है। अपने पुत्रों राम और लक्ष्मण और पुत्रवधू सीता के वियोग में दशरथ व्याकुल होते हैं। उन्हें श्रवण कुमार के माता-पिता द्वारा उन्हें दिए गए श्राप की याद आती है।
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वे कौशिल्या को उस श्राप की पूरी कहानी सुनाते हैं और बड़े कातर स्वर में विलाप करते हुए राम-राम कहते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। इसके पूर्व श्री राम और केवट का गंगा के तट पर मार्मिक संवाद होता है।
संवाद में श्रीराम केवट से नाव लाने के लिए कहते हैं और केवट यह कहते हुए इनकार कर देता है कि आपके चरणों के मर्म को मैं जानता हूं। इनमें पत्थर को नारी बना देने वाली शक्ति है। अगर मेरी नाव नारी बन गई तो मेरी जीविका चली जाएगी। श्रीराम कहते हैं, केवट तुम वही करो जिससे तुम्हारी जीविका न जाने पाए और वह अपने पैर केवट से धुलवा कर गंगा पार करते है।

कमेटी के अध्यक्ष श्याम करण टेकड़ीवाल ने बताया कि शनिवार को रामलीला मंचन में ऋषि मुनियों की रक्षा के लिए भगवान राम द्वारा असुरों को वध करने की राम प्रतिज्ञा का मंचन, सूपर्णखारुदन, सीता हरण का मंचन किया गया। मीडिया प्रभारी सचिन श्रीवास्तव ने बताया कि रविवार को जटायु उद्धार, बालि वध, शबरी प्रेम और लंका दहन का मंचन शाम को किया जाएगा।
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