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चांद दिखते ही या हुसैन की सदाओं से गूंजे इमामबाड़े
Bahraich
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:31 AM IST
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बहराइच। मोहर्रम का चांद दिखते ही शनिवार को इमामबाड़े या हुसैन की सदाओं से गूंज उठे। मोहर्रम का पहला अगुवानी जुलूस नगर में शनिवार देर शाम गमगीन माहौल में परंपरागत मार्गों से निकाला गया। जुलूस में काफी संख्या में शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहने शामिल हुए।
मोहर्रम का चांद दिखते ही गम का महीना माहे मोहर्रम की शुरुआत हो गई। महिलाओं ने अपने मजलूम इमाम के गम में सुहाग की प्रतीक चूड़ियां उतार दीं। महिलाएं और पुरुष सभी काले कपड़े पहनकर शोक में डूब गए। चांद रात को महिलाओं ने नौहा पढ़ा। इसी के साथ दो माह आठ दिन की अजादारी का आगाज हो गया। मांगलिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी प्रतिबंध लग गया। शिया बाहुल्य क्षेत्रों में या हुसैन की सदाएं गूंज रही हैं। घर अजाखानों में परिवर्तित हो गए हैं।
इसी के तहत मोहर्रम के पहले दिन देर शाम गमगीन माहौल में अगुवानी जुलूस परंपरागत मार्गों से निकाला गया।
फिदा अब्बास ने बताया कि इस जुलूस में शामिल होने के लिए काफी संख्या में शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनकर शाम को करबला पहुंचे। बाद नमाज मगरिब करबला से जुलूस निकला गया।
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जुलूस में शामिल लोग इस्लामी चिह्न अलम को उठाए हुए नौहा व मातम करते चल रहे थे। अलम की जियारत करने के लिए सड़क के दोनों ओर लोग जमा हो गए। यह जुलूस बशीरगंज, पुलिस चौकी, काजीपुरा, सैयदबाड़ा होते हुए इश्तियाक हुसैन के घर पर पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस के बाद मजलिस हुई। मजलिस को मौलाना शमसी रजा मुजफ्फरपुर बिहार ने संबोधित किया। जुलूस में शांति के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
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मोहर्रम का चांद दिखते ही गम का महीना माहे मोहर्रम की शुरुआत हो गई। महिलाओं ने अपने मजलूम इमाम के गम में सुहाग की प्रतीक चूड़ियां उतार दीं। महिलाएं और पुरुष सभी काले कपड़े पहनकर शोक में डूब गए। चांद रात को महिलाओं ने नौहा पढ़ा। इसी के साथ दो माह आठ दिन की अजादारी का आगाज हो गया। मांगलिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी प्रतिबंध लग गया। शिया बाहुल्य क्षेत्रों में या हुसैन की सदाएं गूंज रही हैं। घर अजाखानों में परिवर्तित हो गए हैं।
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इसी के तहत मोहर्रम के पहले दिन देर शाम गमगीन माहौल में अगुवानी जुलूस परंपरागत मार्गों से निकाला गया।
फिदा अब्बास ने बताया कि इस जुलूस में शामिल होने के लिए काफी संख्या में शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनकर शाम को करबला पहुंचे। बाद नमाज मगरिब करबला से जुलूस निकला गया।
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जुलूस में शामिल लोग इस्लामी चिह्न अलम को उठाए हुए नौहा व मातम करते चल रहे थे। अलम की जियारत करने के लिए सड़क के दोनों ओर लोग जमा हो गए। यह जुलूस बशीरगंज, पुलिस चौकी, काजीपुरा, सैयदबाड़ा होते हुए इश्तियाक हुसैन के घर पर पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस के बाद मजलिस हुई। मजलिस को मौलाना शमसी रजा मुजफ्फरपुर बिहार ने संबोधित किया। जुलूस में शांति के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।