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कल से कतर्निया को खोलने की तैयारी
Bahraich
Updated Wed, 14 Nov 2012 12:00 PM IST
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बिछिया (बहराइच)। कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र हर वर्ष 15 नवंबर से पर्यटकों के लिए खुलता है लेकिन इस बार सुप्रीमकोर्ट के दिशा-निर्देशों के चलते वन विभाग ने पर्यटकों के स्वागत के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रस्ताव भेजा है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की हरी झंडी मिलने का इंतजार है। हालांकि महकमा तैयारियों में जुटा हुआ है। लेकिन इस बार जंगल के 20 फीसदी हिस्से में ही पर्यटकों को भ्रमण की अनुमति होगी। कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। जिला मुख्यालय से वन क्षेत्र की दूरी 120 किलोमीटर है। इस सेंचुरी में घास के मैदान और जलीय क्षेत्र तो पर्यटकों को अपनी ओर लुभाते ही हैं। साल के वन भी पर्यटकाें के आकर्षण का केंद्र होते हैं। नेपाल सीमा से सटे संरक्षित वन क्षेत्र में बाघ, हाथी, तेंदुआ, गैंडा, बारहसिंघा, चीतल, काकड़ समेत हिरन की कई प्रजातियां विचरण करती हैं। शीतकाल में साईबेरियन पक्षी कतर्निया घाट से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी की आभा को और भी मनोरम बनाते हैं लेकिन इस बार सर्वोच्च न्यायालय ने संरक्षित वन क्षेत्र के 20 फीसदी हिस्से में ही पर्यटकों के भ्रमण को अनुमति दी है। इसको लेकर वन विभाग पसोपेश में है। प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सिर्फ थारूहट और गेरुआ नदी में बोटिंग की अनुमति पर्यटकों को होगी। जंगल के 20 फीसदी क्षेत्रफल में ही हाथी की सवारी व अन्य मनोरंजन मुहैया कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भेजा गया है। डीएफओ ने कहा कि प्रतिवर्ष 15 नवंबर को जंगल पर्यटकों के लिए खोला जाता था। इस बार भी तैयारी की जा रही है, लेकिन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की हरी झंडी मिलने पर ही पर्यटकों की बुकिंग शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक दिन का समय बचा है। इसके लिए पुन: मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखा गया है।
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