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चंद मुनाफे के लालच में जिंदगी पर भारी पड़ रहा चायनीज मांझा

Sat, 16 Sep 2017 10:47 PM IST
Updated Sat, 16 Sep 2017 10:47 PM IST
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चंद मुनाफे के लालच में जिंदगी पर भारी पड़ रहा चायनीज मांझा
बहराइच। चाइनीज मांझा के पर्यावरण पर घातक दुष्प्रभाव को देखते हुए एनजीटी ने इसपर प्रतिबंध लगा रखा है। बावजूद इसके जिले में खुलेआम इसकी बिक्री हो रही है। प्रशासन ने भी आजतक इसकी बिक्री रुकवाने का कोई प्रयास नहीं किया, जुर्माना लगाना तो दूर जांच के लिए कोई अभियान तक नहीं चलाया गया है। थोड़े से मुनाफे के लालच में पर्यावरण और लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। दो वर्षों में चाइनीज मांझा की चपेट में आकर जख्मी होने की 13 घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। चाइनीज मांझा कानपुर के अलावा नेपाल की मंडी से तस्करी के जरिये पहुंच रहा है। पतंगबाजों के मुताबिक चाइनीज मांझा प्लास्टिक मिश्रित धागा होता है, जिससे वह टूटता नहीं।
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चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए बीते साल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को चाइनीज मांझा की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के आदेश दिए थे। बाद में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने भी इसको पर्यावरण की दृष्टि से प्रतिकूल पाते हुए इसे प्रतिबंधित कर दिया था। मुख्य सचिव ने भी चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के आदेश जारी कर दिए हैं। दुकानदार रज्जब अली के अनुसार चाइनीज मांझा 50 से 100 रुपये में आसानी से खुले बाजार में उपलब्ध हो जाता है। जबकि धागे से निर्मित होने वाला मांझा काफी महंगा पड़ता था। पतंगबाज टिल्लू मिश्रा का कहना है कि चाइनीज मांझा प्लास्टिक से बना होने के कारण काफी मजबूत रहता है। इससे बाजार में उसकी मांग अधिक रहती है। दुकानदारों को भी मुनाफा अधिक मिलता है। चाइनीज मांझे को नेपाल और कानपुर की मंडियों से लाकर खुले बाजार में बेचा जाता है।
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इन स्थानों पर होती बिक्री
शहर के कबावची गली में सबसे अधिक पतंग की दुकानें हैं। यहां पर सभी दुकानदारों के पास चाइनीज मांझा मिल जाता है। जबकि मोहल्ला बड़ीहाट, सत्तीकुआं, दरगाह, छावनी के साथ नानपारा, जरवल, रुपईडीहा आदि इलाकों में चायनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है।
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कट चुकी है बच्चे की गर्दन
शहर के कोतवाली नगर के सामने रानी रेहुआ अहाते में किराए पर रहने वाले राजेश सिंह अपने पुत्र सोनू सिंह (5) के साथ बाइक से जा रहे थे। कपूरथला के इंदिरा उद्यान के निकट चाइनीज मांझा गले में फंसने से सोनू गंभीर रूप से घायल हो गया था। हालांकि कई दिनों तक चले इलाज के बाद वह ठीक हो गया। उसके पिता नगरपालिका में कर्मचारी थे। जिनका स्थानांतरण होने के बाद परिवार बाहर चला गया।

चाइनीज मांझे की बिक्री पर लगे रोक
व्यवसायी अनिल साहू उर्फ मोनू ने कहा कि कोर्ट के आदेश का प्रशासन सख्ती से पालन कराए। कई बार चाइनीज मांझों से हादसे हो चुके हैं। समाजसेवी मुजीब ने कहा कि चाइनीज मांझा की बिक्री रोकने के लिए सरकार को उसके आयात पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। यह मांझा पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है।


चलाया जाएगा अभियान
चाइनीज मांझा बच्चों के पतंग उड़ाने को लेकर नुकसानदेह है। कई बार इसकी चपेट में आने से लोगों की मौत भी हो जाती है। इसकी बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। जिले की दुकानों पर बिक्री को रोकने के लिए जल्द ही चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। - कमलेश दीक्षित, एसपी सिटी, बहराइच
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