{"_id":"6a42b572b081f489d60bd3bc","slug":"780-baby-gharials-open-their-eyes-on-the-banks-of-the-gerua-bahraich-news-c-98-1-bhr1024-152186-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: गेरुआ के तट पर 780 नन्हे घड़ियालों ने खोलीं आंखें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: गेरुआ के तट पर 780 नन्हे घड़ियालों ने खोलीं आंखें
विज्ञापन
घोसलों से बच्चों के निकलने के बाद निगरानी करते घड़ियाल।
मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट के जंगलों से होकर बहने वाली गेरुआ नदी एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण की मिसाल बनी है। इस वर्ष नदी के रेतीले टापुओं पर बने 26 प्राकृतिक घोंसलों से दो चरणों में करीब 780 नन्हे घड़ियालों ने जन्म लिया है। इनमें से 500 को सुरक्षित निकालकर घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में रखा गया है, जबकि कई मादा घड़ियाल अपने बच्चों को स्वयं नदी की धारा तक सुरक्षित ले जाने में सफल रहीं।
अप्रैल में शुरू हुए प्रजनन काल के दौरान मादा घड़ियालों ने नदी के रेतीले टापुओं पर घोंसले बनाए थे। वन विभाग की लगातार निगरानी के बीच पहले चरण में 12 से 15 जून के बीच 18 घोंसले खुले, जिनसे लगभग 500 नन्हे घड़ियाल निकले। इसके बाद शनिवार को शेष आठ घोंसले खुलने पर करीब 280 नन्हें घड़ियाल भी अंडों से बाहर आए।
वन विभाग ने घोसलों से निकले करीब 500 घड़ियालों को सुरक्षित निकालकर कतर्नियाघाट स्थित पुनर्वास केंद्र पहुंचाया, जहां अगले पांच माह तक वैज्ञानिक तरीके से उनका पालन-पोषण और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद उन्हें चरणबद्ध ढंग से फिर गेरुआ नदी में छोड़ा जाएगा, ताकि उनकी प्राकृतिक आबादी और मजबूत हो सके। कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि कई मादा घड़ियाल अपने बच्चों को स्वयं नदी तक ले जाने में भी सफल रहीं, जो प्राकृतिक संरक्षण का सकारात्मक संकेत है।
विज्ञापन
गेरुआ नदी क्यों है खास
गेरुआ नदी देश के महत्वपूर्ण मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्रों में गिनी जाती है। यह घड़ियाल, मगरमच्छ, गंगा डॉल्फिन, ऊदबिलाव और अनेक दुर्लभ जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास है। लगातार मादा घड़ियालों का सफल प्रजनन इस नदी के स्वस्थ पर्यावरण और प्रभावी संरक्षण का संकेत माना जा रहा है।
विज्ञापन
अप्रैल में शुरू हुए प्रजनन काल के दौरान मादा घड़ियालों ने नदी के रेतीले टापुओं पर घोंसले बनाए थे। वन विभाग की लगातार निगरानी के बीच पहले चरण में 12 से 15 जून के बीच 18 घोंसले खुले, जिनसे लगभग 500 नन्हे घड़ियाल निकले। इसके बाद शनिवार को शेष आठ घोंसले खुलने पर करीब 280 नन्हें घड़ियाल भी अंडों से बाहर आए।
विज्ञापन
वन विभाग ने घोसलों से निकले करीब 500 घड़ियालों को सुरक्षित निकालकर कतर्नियाघाट स्थित पुनर्वास केंद्र पहुंचाया, जहां अगले पांच माह तक वैज्ञानिक तरीके से उनका पालन-पोषण और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद उन्हें चरणबद्ध ढंग से फिर गेरुआ नदी में छोड़ा जाएगा, ताकि उनकी प्राकृतिक आबादी और मजबूत हो सके। कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि कई मादा घड़ियाल अपने बच्चों को स्वयं नदी तक ले जाने में भी सफल रहीं, जो प्राकृतिक संरक्षण का सकारात्मक संकेत है।
विज्ञापन
गेरुआ नदी क्यों है खास
गेरुआ नदी देश के महत्वपूर्ण मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्रों में गिनी जाती है। यह घड़ियाल, मगरमच्छ, गंगा डॉल्फिन, ऊदबिलाव और अनेक दुर्लभ जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास है। लगातार मादा घड़ियालों का सफल प्रजनन इस नदी के स्वस्थ पर्यावरण और प्रभावी संरक्षण का संकेत माना जा रहा है।

29 ढांड 01 कनाडा में हार्ट अटैक से मृतक राकेश कुमार का फाइल फोटो।