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गन्ना किसानों का 67 करोड़ बकाया
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sun, 29 Nov 2015 10:07 PM IST
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तराई के खेतों में गन्ना तैयार हो गया है। अब इसकी पेराई की बारी है। लेकिन किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। कारण, चिलवरिया चीनी मिल ने अब तक किसानों को बकाया भुगतान नहीं किया है। मिल पर 67 करोड़ रुपये की देनदारी है। किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि अब वे क्या करें क्योंकि मिल ने पुराना बकाया अब तक नहीं दिया है।
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वहीं, खरीफ सीजन की बोआई करने के लिए खेत खाली करने की चुनौती भी किसानों के सामने है। चिलवरिया शुगर मिल ने पेराई सत्र का आरंभ कर दिया है। लेकिन तीन अन्य मिलों के संचालन की बात अभी तक स्पष्ट नहीं है। जिसका खामियाजा गन्ना किसानों को भुगतना पड़ सकता है।
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शुगर मिलें समय से न चलीं तो गन्ना किसान बर्बाद हो जाएंगे। जिले में चार शुगर मिलें हैं। इनमें श्रावस्ती सहकारी शुगर मिल नानपारा, सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया, पारले शुगर मिल परसेंडी व आईपीएल शुगर मिल जरवलरोड है। वर्ष 2015-16 के सर्वेक्षण आंकड़ों के मुताबिक जिले में 74 हजार 94 हेक्टेअर पर गन्ने की फसल खड़ी है।
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सूबे के गन्ना आयुक्त ने चीनी मिलों को नवंबर में पेराई सत्र शुरू करने के निर्देश दिए थे। लेकिन महज चिलवरिया मिल में नए पेराई सत्र का शुभारंभ हुआ है। गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति पर गौर करें तो चिलवरिया मिल पर 67 करोड़ 98 लाख रुपये बकाया हैं। अब नए पेराई सत्र में किसान अपनी उपज के लेकर परेशान हैं।
तो खरीफ सीजन के लिए वर्तमान में मौसम अनुकूल है। ऐसे में उनके सामने खेत खाली करने की चुनौती है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि गन्ना चीनी मिलों को दें या औने-पौने दामों पर कोल्हुओं पर बेच अपनी जरूरतें पूरी करें। जिला गन्ना अधिकारी रामकिशन ने बताया कि चिलवरिया मिल ने पेराई शुरू कर दी है।
अन्य तीन मिलों का पेराई सत्रारंभ दिसंबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। वैश्विक बाजार में चीनी के गिरे दाम से बकाएदारी के भुगतान पर असर पड़ा है। चिलवरिया चीनी मिल से किसानों का बकाया मूल्य के भुगतान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
चित्तौरा विकासखंड के बेरिया गांव निवासी ओमकारनाथ ने कहा कि खेतों में गन्ना खड़ा है। खरीफ फसलों की बोआई कैसे करें, ये समझ में नहीं आ रहा है। मिल प्रबंधन ने पुरानी बकाएदारी भी साफ नहीं की है। अब मिल में पेराई शुरू हुई है। इससे बकाया भुगतान होने की उम्मीद है।