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घाघरा की कटान मेें गोलगंज गांव का अस्तित्व खत्म
Updated Thu, 03 Aug 2017 09:34 PM IST
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राजीचौराहा (बहराइच)। घाघरा नदी खतरे के निशान से निरंतर ऊपर बह रही है। इसके चलते महसी के साथ कैसरगंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका तीसरे दिन भी बरकरार है। दोनों तहसीलों के 19 गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। लोग पलायन कर रहे हैं। कटान भी चल रही है। कटान के चलते महसी तहसील के गोलागंज गांव का अस्तित्व रात में खत्म हो गया। राहत और बचाव नाकाफी साबित हो रहे हैं। अधिकांश गांवों में नाव की व्यवस्था न होने से लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
तराई व नेपाल के पहाड़ों पर हो रही वर्षा के चलते घाघरा नदी के जलस्तर में कमी नहीं हो पा रही है। उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। कभी जलस्तर बढ़ने लगता है तो कभी कम होने लगता है। सुबह से जलस्तर में गिरावट भी शुरू हुई। लेकिन दोपहर 12 बजे घाघरा नदी का स्थिर हो गया है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। 106.07 मीटर खतरे का निशान है। इसके सापेक्ष नदी का पानी 106.336 मीटर रिकॉर्ड हुआ। खतरे के निशान से ऊपर होने के चलते महसी तहसील क्षेत्र में बाढ़ के साथ कटान की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गोलागंज गांव का अस्तित्व नदी की लहरों ने रात में खत्म कर दिया है। गांव में 46 ग्रामीणों के मकान थे। पहले ही नदी की लहरें एक-एक कर अधिकांश मकानों को लील चुकी हैं। सिर्फ चार मकान बचे थे। इनमें कमल, दीपक, देशराज और जगलाल के मकान शामिल हैं। यह मकान भी रात में लहरों की भेंट चढ़ गए। इसके चलते गांव का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है। अब नदी चुरईपुरवा व कायमपुर गांव की ओर बढ़ रही है। ग्रामीणों में हड़कंप है। लोग अपने आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं।
नाव की समुचित व्यवस्था नहीं
बाढ़ की विभीषिका अब भी बरकरार है। महसी तहसील के नौ गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं जरवल विकास खंड के तीन ग्राम पंचायतों के 10 मजरे के लोग बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे हैं। नाव की व्यवस्था न होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी का पानी बेलहा-बेहरौली तटबंध पर थपेड़े ले रहा है। इससे लोगों की धड़कनें बढ़ रही हैं।
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निरंतर कर रहे भ्रमण, तैयार हो रही रिपोर्ट
बाढ़ व कटान को देखते हुए निरंतर क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। राजस्वकर्मी भी कैंप कर रहे हैं। रिपोर्ट तैयार की जा रही है। कटान व बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की कार्रवाई चल रही है। शीघ्र ही मुआवजा देकर राहत प्रदान किया जाएगा। -नागेंद्र कुमार, उपजिलाधिकारी
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तराई व नेपाल के पहाड़ों पर हो रही वर्षा के चलते घाघरा नदी के जलस्तर में कमी नहीं हो पा रही है। उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। कभी जलस्तर बढ़ने लगता है तो कभी कम होने लगता है। सुबह से जलस्तर में गिरावट भी शुरू हुई। लेकिन दोपहर 12 बजे घाघरा नदी का स्थिर हो गया है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। 106.07 मीटर खतरे का निशान है। इसके सापेक्ष नदी का पानी 106.336 मीटर रिकॉर्ड हुआ। खतरे के निशान से ऊपर होने के चलते महसी तहसील क्षेत्र में बाढ़ के साथ कटान की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गोलागंज गांव का अस्तित्व नदी की लहरों ने रात में खत्म कर दिया है। गांव में 46 ग्रामीणों के मकान थे। पहले ही नदी की लहरें एक-एक कर अधिकांश मकानों को लील चुकी हैं। सिर्फ चार मकान बचे थे। इनमें कमल, दीपक, देशराज और जगलाल के मकान शामिल हैं। यह मकान भी रात में लहरों की भेंट चढ़ गए। इसके चलते गांव का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है। अब नदी चुरईपुरवा व कायमपुर गांव की ओर बढ़ रही है। ग्रामीणों में हड़कंप है। लोग अपने आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं।
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नाव की समुचित व्यवस्था नहीं
बाढ़ की विभीषिका अब भी बरकरार है। महसी तहसील के नौ गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं जरवल विकास खंड के तीन ग्राम पंचायतों के 10 मजरे के लोग बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे हैं। नाव की व्यवस्था न होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी का पानी बेलहा-बेहरौली तटबंध पर थपेड़े ले रहा है। इससे लोगों की धड़कनें बढ़ रही हैं।
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निरंतर कर रहे भ्रमण, तैयार हो रही रिपोर्ट
बाढ़ व कटान को देखते हुए निरंतर क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। राजस्वकर्मी भी कैंप कर रहे हैं। रिपोर्ट तैयार की जा रही है। कटान व बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की कार्रवाई चल रही है। शीघ्र ही मुआवजा देकर राहत प्रदान किया जाएगा। -नागेंद्र कुमार, उपजिलाधिकारी