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वन कर्मियों की हड़ताल
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बहराइच। वन विभाग में तैनात कर्मचारियों को किस वन संरक्षक के अधीन रखा गया है। इसकी जानकारी नहीं मिल पाने से नाराज लिपिक वर्ग के कर्मचारी निरंतर हड़ताल पर हैं। गुरुवार को भी लिपिकों की हड़ताल के चलते कामकाज पूरी तरह से ठप रहा।
फारेस्ट मिनिस्टीरियल एसोसिएशन शाखा बहराइच के आह्वान पर कतर्नियाघाट और बहराइच वन्यजीव प्रभाग के लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों ने हड़ताल 18 जून से शुरू की थी। कर्मचारियों का कहना है कि पहले फैजाबाद वन संरक्षक के अधीन कैडर निर्धारण था। मगर गोंडा मंडल अलग होने के बाद से लिपिकों का कैडर निर्धारण नहीं हो सका, जिससे उनकी प्रोन्नति, ग्रेड पे, पेंशन निर्धारण आदि की समस्या बनी हुई है।
प्रदर्शन के बाद कतर्निया के 14 लिपिकों को दुधवा के अधीन करने का प्रस्ताव भेजा गया था, मगर उस पर भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष ने अभी तक अनुमोदन नहीं किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष खालिद सईद खां ने कहा कि 21 जून तक कैडर निर्धारण नहीं होने पर वन विभाग के सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले जाएंगे।
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मंत्री रामप्रवेश ने कहा कि मामला अब फेडरेशन आफ फारेस्ट एसोसिएशन के बैनर तले उठाया जाएगा। जिसके बाद जंगली जीवों और वन की सुरक्षा पर संकट गहरा सकता है। इसलिए वन विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निर्णय लेकर कर्मचारियों के साथ न्याय करे।
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फारेस्ट मिनिस्टीरियल एसोसिएशन शाखा बहराइच के आह्वान पर कतर्नियाघाट और बहराइच वन्यजीव प्रभाग के लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों ने हड़ताल 18 जून से शुरू की थी। कर्मचारियों का कहना है कि पहले फैजाबाद वन संरक्षक के अधीन कैडर निर्धारण था। मगर गोंडा मंडल अलग होने के बाद से लिपिकों का कैडर निर्धारण नहीं हो सका, जिससे उनकी प्रोन्नति, ग्रेड पे, पेंशन निर्धारण आदि की समस्या बनी हुई है।
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प्रदर्शन के बाद कतर्निया के 14 लिपिकों को दुधवा के अधीन करने का प्रस्ताव भेजा गया था, मगर उस पर भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष ने अभी तक अनुमोदन नहीं किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष खालिद सईद खां ने कहा कि 21 जून तक कैडर निर्धारण नहीं होने पर वन विभाग के सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले जाएंगे।
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मंत्री रामप्रवेश ने कहा कि मामला अब फेडरेशन आफ फारेस्ट एसोसिएशन के बैनर तले उठाया जाएगा। जिसके बाद जंगली जीवों और वन की सुरक्षा पर संकट गहरा सकता है। इसलिए वन विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निर्णय लेकर कर्मचारियों के साथ न्याय करे।