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सुखद

Sun, 22 Jul 2018 10:04 PM IST
Updated Sun, 22 Jul 2018 10:04 PM IST
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अब 73 गांवों में फिर लहलहाएंगी फसलें
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जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट से क्लीन होगा नानपारा, लोग साफ हवा में ले सकेंगे सांस
नहीं होगी बदबू, न ही खेतों में पहुंचेगा गंदा पानी
सरयू नदी के जलीय जीव भी हो सकेंगे सुरक्षित
अतुल अवस्थी/सत्यप्रकाश गुप्ता
फोटो 26-27 है।
बहराइच/नानपारा। श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल नानपारा से निकलने वाले गंदे पानी से आठ वर्ग किलोमीटर परिक्षेत्र में 73 गांवों के 38 हजार किसानों की खेती झुलस ही रही थी। खेत भी बंजर हो रहे थे। बदबू से नानपारा नगर क्षेत्र के आसपास के लोगों की जिंदगी दुश्वार थी। लेकिन अब न सिर्फ किसानों को राहत मिलेगी बल्कि नानपारा नगर क्षेत्र के लोग भी अच्छी हवा में सांस ले सकेंगे। सरयू नदी के जलीय जीव भी सुरक्षित होंगे।
दरअसल, चीनी मिल से निकलने वाले गंदे पानी को मिल के अंदर ही खत्म करने के लिए अब परिसर में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट स्थापित होगा। इस प्लांट की स्थापना पर 35 करोड़ का बजट खर्च होगा। प्लांट स्थापना के बाद चीनी मिल में बंद पड़ी आसवनी इकाई का भी संचालन शुरू हो सकेगा। प्लांट स्थापित करने के लिए चीनी मिल प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। आठ माह में प्लांट स्थापना का कार्य पूरा हो जाएगा।
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श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल नानपारा में गन्ना पेराई के साथ ही आसवनी इकाई भी स्थापित थी। गन्ना पेराई व आसवनी इकाई से निकलने वाला गंदा पानी चीनी मिल से सीधे निकलकर किसानों के खेतों और धरसोती नाले में पहुंचता था। जिसके कारण नानपारा से मटेरा तक आठ वर्ग किलोमीटर परिक्षेत्र में चीनी मिल का गंदा पानी खेतों में बाढ़ के मानिंद फैल जाता था। न सिर्फ खेतों में लगी धान, गेहूं, अरहर, उड़द, मूंग, मसूर, गन्ना, मक्का समेत सब्जियों की फसलें झुलस कर बर्बाद हो जाती थीं बल्कि चीनी मिल का दूषित पानी मिल से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित धरसोती नाले में गिरकर सरयू नदी तक पहुंच जाता था। इस कारण वर्ष 2017 में सरयू नदी में बड़े पैमाने पर मछलियों और कछुओं समेत जलीय जीवों की मौत हुई थी।
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मिल के दूषित खारे पानी से चीनी मिल के आठ वर्ग किलोमीटर परिक्षेत्र के 73 गांव के 38 हजार किसान प्रभावित हैं। फसल बर्बाद होने के साथ ही उनके खेत भी चीनी मिल के इस खारे पानी से बंजर हो रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2017 में चीनी मिल की आसवनी इकाई को बंद करवा दिया था। आसवनी इकाई बंद होने के कारण मिल को प्रति वर्ष 250 करोड़ का नुकसान हो रहा है। मिल प्रशासन की सूचना पर अब शासन ने चीनी मिल में शून्य उत्प्रवाह संयंत्र (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट) स्थापना को हरी झंडी दी है। यह प्लांट 35 करोड़ की लागत से स्थापित होगा।
अमर उजाला से बातचीत में चीनी मिल के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने बताया कि प्लांट स्थापना की कवायद शुरू कर दी गई है। प्लांट स्थापना में कम से कम आठ माह का समय लगेगा। कोशिश है कि अप्रैल 2019 तक कार्य पूरा हो जाए।
एनजीटी ने बंद करवायी थी आसवनी इकाई
जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट के अभाव में गंदे पानी की स्वच्छ होने की व्यवस्था नहीं थी। चीनी मिल से छोड़ा गया गंदा पानी आसपास के किसानों के खेतों में भर जाने से उनकी फसल झुलसकर नष्ट हो जाती थी। भूमि भी बंजर हो रही थी।

आसवनी इकाई से ये होता है उत्पादन
श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल नानपारा की आसवनी इकाई में 20 हजार लीटर एथनाल, 30 हजार लीटर एल्कोहल प्रतिदिन उत्पादन होता था। इकाई बंद होने से चीनी मिल के गन्ना पेराई से निकलने वाला लगभग 60 हजार क्विंटल सीरा बरबाद हो रहा है।
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