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घरों में फंसे 12 गांवों के लोग

Fri, 09 Aug 2019 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Aug 2019 10:45 PM IST
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12 villages People trapped in homes
महसी के गोलागंज में बाढ़ के पानी से डूबा मार्ग। - फोटो : BAHRAICH
महसी (बहराइच)। घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हुआ है, लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें अभी भी बरकरार हैं। बाढ़ का पानी भरने से 12 गांवों के ग्रामीण घरों में फंसे हुए हैं। मुख्य मार्गों पर बाढ़ का पानी भरा है, जिससे आवागमन बाधित है। घर में खाने की किल्लत है। मगर अभी तक पीड़ितों को कोई प्रशासनिक सहायता नहीं मिली है। गांवों में पानी भरने की सूचना पर एसडीएम ने शुक्रवार को निरीक्षण किया है। नावें लगाकर गांवों में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
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घाघरा नदी में नेपाल से आ रहे बरसात के पानी के कारण अचानक जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया था। लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा गया था। जिससे दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से नदी बढ़ रही थी। हालांकि पानी की रफ्तार कम होने के बाद अब जलस्तर घटना शुरू हो गया है।
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शुक्रवार को घूरदेवी पर घाघरा नदी का जलस्तर 111.200 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर करीब 17 सेंटीमीटर कम हुआ है। इसके बाद भी घाघरा के पानी से घिरे छत्तरपुरवा, जोगापुरवा, तारापुरवा, रानीबाग, मांझा दरिया बुर्द समेत 12 गांवों के ग्रामीण घरों में फंसे हुए हैं। नदी का पानी चारों ओर फैला हुआ है।
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रास्तों पर नदी का पानी चलने के कारण लोग गांव से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। घर में दाने-दाने की किल्लत भी हो गई है। जलस्तर बढ़ने की सूचना पर शुक्रवार को एसडीएम महसी एसएन त्रिपाठी ने प्रभावित गांव टेपरा, बौंडी और रानीबाग का निरीक्षण किया। एसडीएम ने बताया कि सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है।
नाव लगाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के दिए निर्देश
एसडीएम ने बताया कि महसी तहसील क्षेत्र में अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है। हालांकि जलस्तर बढ़ने से कुछ गांवों में पानी जरूर भर गया है। इससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसको देखते हुए राजस्व अधिकारियों को प्रभावित गांवों में नाव लगाकर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

साहब आवत हैं और देख के चले जात हैं
महसी के घाघरा नदी से प्रभावित गांव तारापुरवा और चमरही निवासी अवधेश, रामचंदर, सोनारे, दुखहरन, कैलाश यादव और शमशेर यादव ने कहा कि घाघरा मइया हर साल हम लोगों को दुख देती हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से भी उदासीनता बरती जाती है। पीड़ित दुखहरन ने कहा कि साहब लोग नदी के किनारे तक आवत हैं और चले जात हैं। लेकिन हम सबके बीच तक आवे की जहमत कोई नहीं उठावत। दाना-दाना के मोहताजी हो चुकी है।
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