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गांव के अस्पतालों से गायब हैं धरती के भगवान
Updated Tue, 29 Aug 2017 09:47 PM IST
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बहराइच। ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में ज्यादातर डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं, ऐसे में यहां आने वाले मरीजों का उपचार फार्मासिस्ट को करना पड़ता है। कई बार ऐसे गंभीर मरीज आते हैं जिन्हें उपचार न मिले तो उनकी मौत हो सकती है।
सीएचसी-पीएचसी में 101 डॉक्टरों की कुर्सी पहले से ही खाली हैं। ऐसे में ड्यूटी के प्रति कुछ चिकित्सकों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ती है।
अधिकांश पीएचसी पर ग्रामीणों को फार्मासिस्ट का ही सहारा है। हालांकि कुछ सेवाभावी चिकित्सक भी हैं जो हर वक्त मरीजों के उपचार के लिए तैयार रहते हैं।
जिले के 14 विकास खंडों में 36 लाख की आबादी 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आश्रित है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 187 पद सृजित हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ 86 चिकित्सकों की है।
101 पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें लगभग 20 महिला चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। महिला डॉक्टरों की कमी आधी आबादी के लिए परेशानी का सबब है।
कभी खून की कमी तो कभी समय से प्रसव और ऑपरेशन न होने गर्भवती महिलाओं की मौत हो जाती है। वहीं सर्पदंश, दुर्घटना व अन्य परिस्थितियों में स्वास्थ्य केंद्रों पर रात में डॉक्टरों के न रहने से लोगों को जान तक गंवानी पड़ती है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, फखरपुर
सीएचसी फखरपुर में चार चिकित्सकों की तैनाती है। लेकिन मंगलवार को 11 बजे एक भी चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं मिला।
पता चला कि सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रत्यूष सिंह कहीं गए हैं। अन्य चिकित्सकों के बारे में कर्मचारी बता नहीं पाए। यहां पर बेड खाली मिले। डेंगू वार्ड में ताला लटक रहा था।
महिला चिकित्सक सुषमा का स्थानांतरण बौंडी होने के चलते उनकी भी कुर्सी खाली मिली। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि रात में एक मेडिकल ऑफिसर और एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी है। वे रहते हैं या नहीं, इस सवाल पर सभी चुप्पी साध गए।
आए दिन लटका मिलता है ताला
महसी तहसील अंतर्गत ठेकेदारपुरवा हरदी गौरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मंगलवार को ताला लटका मिला। पता चला कि यहां पर डॉक्टर खालिद उमर की तैनाती है, लेकिन वह कभी आते हैं तो कभी नहीं आते।
फार्मासिस्ट करुणाशंकर दीक्षित ही मरीजों का इलाज करते हैं। लेकिन मौके पर अस्पताल में ताला लटक रहा था। पता चला कि सुबह एक घंटे तक फार्मासिस्ट ने अस्पताल चलाया। उसके बाद बाढ़ क्षेत्र में चले गए।
यहां डेढ़ साल से नहीं हैं डॉक्टर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मध्य स्थित है। अक्सर जंगली जानवरों का हमला होता है। संक्रामक रोग भी कहर बरपाते हैं।
इलाज के लिए सिर्फ सुजौली स्वास्थ्य केंद्र ही सहारा है, लेकिन यहां पर डेढ़ साल से चिकित्सक की तैनाती नहीं है। फार्मासिस्ट रीतेश कुमार व एएनएम सत्यवती ही क्षेत्र की डॉक्टर हैं।
अस्पताल आने वाले लोगों का परीक्षण कर उन्हें दवाइयां देती हैं। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
शासन को लिखा है पत्र
जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 101 पद रिक्त हैं। इस समय कुछ चिकित्सकों की ड्यूटी बाढ़ क्षेत्रों में भी लगी है।
ऐसे में हो सकता है अस्पतालों में कुर्सियां खाली हों। लेकिन डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित जरूर हैं। इस मामले में शासन को पत्र लिखा है। प्रयास है कि शीघ्र ही डॉक्टरों की कमी को पूरा करवाया जाए।
डॉ. अरुण पांडेय, सीएमओ
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सीएचसी-पीएचसी में 101 डॉक्टरों की कुर्सी पहले से ही खाली हैं। ऐसे में ड्यूटी के प्रति कुछ चिकित्सकों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ती है।
अधिकांश पीएचसी पर ग्रामीणों को फार्मासिस्ट का ही सहारा है। हालांकि कुछ सेवाभावी चिकित्सक भी हैं जो हर वक्त मरीजों के उपचार के लिए तैयार रहते हैं।
जिले के 14 विकास खंडों में 36 लाख की आबादी 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आश्रित है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 187 पद सृजित हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ 86 चिकित्सकों की है।
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101 पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें लगभग 20 महिला चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। महिला डॉक्टरों की कमी आधी आबादी के लिए परेशानी का सबब है।
कभी खून की कमी तो कभी समय से प्रसव और ऑपरेशन न होने गर्भवती महिलाओं की मौत हो जाती है। वहीं सर्पदंश, दुर्घटना व अन्य परिस्थितियों में स्वास्थ्य केंद्रों पर रात में डॉक्टरों के न रहने से लोगों को जान तक गंवानी पड़ती है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, फखरपुर
सीएचसी फखरपुर में चार चिकित्सकों की तैनाती है। लेकिन मंगलवार को 11 बजे एक भी चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं मिला।
पता चला कि सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रत्यूष सिंह कहीं गए हैं। अन्य चिकित्सकों के बारे में कर्मचारी बता नहीं पाए। यहां पर बेड खाली मिले। डेंगू वार्ड में ताला लटक रहा था।
महिला चिकित्सक सुषमा का स्थानांतरण बौंडी होने के चलते उनकी भी कुर्सी खाली मिली। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि रात में एक मेडिकल ऑफिसर और एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी है। वे रहते हैं या नहीं, इस सवाल पर सभी चुप्पी साध गए।
आए दिन लटका मिलता है ताला
महसी तहसील अंतर्गत ठेकेदारपुरवा हरदी गौरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मंगलवार को ताला लटका मिला। पता चला कि यहां पर डॉक्टर खालिद उमर की तैनाती है, लेकिन वह कभी आते हैं तो कभी नहीं आते।
फार्मासिस्ट करुणाशंकर दीक्षित ही मरीजों का इलाज करते हैं। लेकिन मौके पर अस्पताल में ताला लटक रहा था। पता चला कि सुबह एक घंटे तक फार्मासिस्ट ने अस्पताल चलाया। उसके बाद बाढ़ क्षेत्र में चले गए।
यहां डेढ़ साल से नहीं हैं डॉक्टर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मध्य स्थित है। अक्सर जंगली जानवरों का हमला होता है। संक्रामक रोग भी कहर बरपाते हैं।
इलाज के लिए सिर्फ सुजौली स्वास्थ्य केंद्र ही सहारा है, लेकिन यहां पर डेढ़ साल से चिकित्सक की तैनाती नहीं है। फार्मासिस्ट रीतेश कुमार व एएनएम सत्यवती ही क्षेत्र की डॉक्टर हैं।
अस्पताल आने वाले लोगों का परीक्षण कर उन्हें दवाइयां देती हैं। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
शासन को लिखा है पत्र
जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 101 पद रिक्त हैं। इस समय कुछ चिकित्सकों की ड्यूटी बाढ़ क्षेत्रों में भी लगी है।
ऐसे में हो सकता है अस्पतालों में कुर्सियां खाली हों। लेकिन डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित जरूर हैं। इस मामले में शासन को पत्र लिखा है। प्रयास है कि शीघ्र ही डॉक्टरों की कमी को पूरा करवाया जाए।
डॉ. अरुण पांडेय, सीएमओ