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Baghpat News: कम मतदान की चिंता सताई तो नेताओं ने कार्यकर्ताओं की घंटी बजाई
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-किसी ने बाइक तो किसी ने कार से मतदाताओं को बूथों पर पहुंचाया
बागपत/बड़ौत। बड़ौत समेत जहां वोटिंग प्रतिशत में इजाफा नहीं होता दिखा, वहां प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों, कार्यकर्ताओं को फोन करके मतदान करने से रह गए वोटरों को घरों से बूथों पर भेजने को कहा। पार्टी के समर्थक और कार्यकर्ता कार और बाइक से मतदाताओं को बूथों तक लेकर पहुंचे।
निकाय चुनाव में सुबह मतदान केंद्रों पर काफी भीड़ रही, लेकिन दोपहर होते-होते बूथों पर वोटरों की संख्या घटनी शुरू हो गई। मतदान केंद्र तक वोटरों को पहुंचाने के लिए राजनीतिक पार्टियों को काफी कसरत करनी पड़ी। मतदान का कम प्रतिशत होने पर भाजपा और रालोद प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई। उधर, निकाय चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे भाजपा नेता वोटरों को घरों से निकालकर बूथों तक भेजने में जुटे रहे। वहीं रालोद कार्यकर्ता और प्रत्याशी भी एक-एक वोटर को बूथों तक पहुंचाने में जुटे रहे। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रत्याशियों के समर्थकों ने वोटरों को बाइक, कार और ई-रिक्शा से बूथों तक पहुंचाया। पार्टियों के कार्यकर्ता और समर्थक दिन भर मतदाताओं को घर से बूथों तक पहुंचाने में लगे रहे। प्रशासन ने बूथों तक वाहनों को लाने की अनुमति न मिलने के कारण लोगों को बूथ से थोड़ी दूर पर छोड़ा।
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बागपत/बड़ौत। बड़ौत समेत जहां वोटिंग प्रतिशत में इजाफा नहीं होता दिखा, वहां प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों, कार्यकर्ताओं को फोन करके मतदान करने से रह गए वोटरों को घरों से बूथों पर भेजने को कहा। पार्टी के समर्थक और कार्यकर्ता कार और बाइक से मतदाताओं को बूथों तक लेकर पहुंचे।
निकाय चुनाव में सुबह मतदान केंद्रों पर काफी भीड़ रही, लेकिन दोपहर होते-होते बूथों पर वोटरों की संख्या घटनी शुरू हो गई। मतदान केंद्र तक वोटरों को पहुंचाने के लिए राजनीतिक पार्टियों को काफी कसरत करनी पड़ी। मतदान का कम प्रतिशत होने पर भाजपा और रालोद प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई। उधर, निकाय चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे भाजपा नेता वोटरों को घरों से निकालकर बूथों तक भेजने में जुटे रहे। वहीं रालोद कार्यकर्ता और प्रत्याशी भी एक-एक वोटर को बूथों तक पहुंचाने में जुटे रहे। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रत्याशियों के समर्थकों ने वोटरों को बाइक, कार और ई-रिक्शा से बूथों तक पहुंचाया। पार्टियों के कार्यकर्ता और समर्थक दिन भर मतदाताओं को घर से बूथों तक पहुंचाने में लगे रहे। प्रशासन ने बूथों तक वाहनों को लाने की अनुमति न मिलने के कारण लोगों को बूथ से थोड़ी दूर पर छोड़ा।
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