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कड़ाके की ठंड में जीतने की जिद
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सेना में जाने के लिए आठ से दस घंटे पसीना बहा रहा युवा
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जनपद के युवाओं में सेना में जाने का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। आर्मी में जाने का सपना संजोय युवा इस कड़ाके की ठंड में सुबह चार बजे अपना बिस्तर छोड़ देते है। प्रतिदिन युवा आठ से दस घंटे तक पसीना बहाते है। 1600 मीटर दौड़ के लिए 5.5 मिनट का समय तय कर रखा है, ऐसे में तय समय को पूरा करने के लिए युवा काफी मेहनत करते है।
मलकपुर गांव के विक्की, बिजरौल के कपिल, बावली के अनुज ने बताया कि जनपद में अधिकतर युवा सेना इसलिए भी ज्वाइन करते है क्योंकि ज्यादातर किसान परिवार से जुडे़ रहते है। आर्थिक स्थिति के चलते आईपीएस, आईएस या पीसीएस के अलावा अन्य तैयारी नहीं कर पाते। कहीं ना कहीं खर्च करने की दिक्कतें आ जाती है। ऐसे में ज्यादातर युवा सेना में ही जाना पसंद करते है। कोच उपेन्द्र तोमर ने बताया कि जनपद से अभी तक लगभग 10 से 15 हजार लोग सेना में अपनी सेवा दे रहे है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जनपद के युवाओं में सेना में जाने का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। आर्मी में जाने का सपना संजोय युवा इस कड़ाके की ठंड में सुबह चार बजे अपना बिस्तर छोड़ देते है। प्रतिदिन युवा आठ से दस घंटे तक पसीना बहाते है। 1600 मीटर दौड़ के लिए 5.5 मिनट का समय तय कर रखा है, ऐसे में तय समय को पूरा करने के लिए युवा काफी मेहनत करते है।
मलकपुर गांव के विक्की, बिजरौल के कपिल, बावली के अनुज ने बताया कि जनपद में अधिकतर युवा सेना इसलिए भी ज्वाइन करते है क्योंकि ज्यादातर किसान परिवार से जुडे़ रहते है। आर्थिक स्थिति के चलते आईपीएस, आईएस या पीसीएस के अलावा अन्य तैयारी नहीं कर पाते। कहीं ना कहीं खर्च करने की दिक्कतें आ जाती है। ऐसे में ज्यादातर युवा सेना में ही जाना पसंद करते है। कोच उपेन्द्र तोमर ने बताया कि जनपद से अभी तक लगभग 10 से 15 हजार लोग सेना में अपनी सेवा दे रहे है।
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