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चंदायन और सिनौली में भी होगा उत्खनन

Sat, 20 Jan 2018 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिनौली
ब्यूरो/अमर उजाला, बिनौली Updated Sat, 20 Jan 2018 12:20 AM IST
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Will Excavation in  Chandayn and Sinauli
चंदायन में वर्ष 2014 में उत्खनन के दौरान मिले मुकुट का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सदियों से राज बनें बरनावा टीले और आसपास के क्षेत्र के इतिहास से पर्दा उठाए जाने की तैयारी है। पुरातत्व विभाग की टीम उत्खनन को विस्तार देकर इतिहास की उलझी गुत्थियों को सुलझाने की कवायद में जुटी है।
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बरनावा के अलावा चंदायन और सिनौली समेत कई जगह ट्रायल किए जा रहे हैं। ट्रायल में अगर इतिहास के कुछ पन्ने खुले तो फिर यहां भी उत्खनन होगा। किसानों से भी टीम ने बातचीत की है।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा में उत्खनन की मंजूरी दी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम उत्खनन कर रही है। बरनावा टीले के क्षेत्र में उत्खनन का लाइसेंस पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ एसके मंजुल को मिला है।
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सहायक पुरातत्वविद बीएस फोनिया, वीके राय, मोहन सिंह, आरके नौटियाल और सुनील कुमार क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। बरनावा में हिंडन किनारे उत्खनन का कार्य शुरू हो चुका है। यहां कई महत्वपूर्ण चीजें भी मिली हैं। शुक्रवार को भी यहां पर कुछ हड्डियों के अवशेष और मृदभांड के अवशेष बरामद हुए हैं। यहां से मिली चीजों की पुरातत्व विभाग पुष्टि नहीं कर रहा है। 

उधर, एएसआई के अधिकारियों ने चंदायन के किसान आर्यवीर तोमर से बात कर उसके खेत में उत्खनन ट्रायल की बात की है। आर्यवीर के खेत में दो साल पहले उत्खनन किया गया था। यहां से कुषाणकालीन मुकुट मिला था।

इसी तरह सिनौली में भी दोबारा से ट्रायल के तौर पर उत्खनन किए जाने का प्रयास है। असल में सिनौली, बरनावा और चंदायन में मिल रही चीजों को जोड़कर महत्वपूर्ण परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

बागपत में कब क्या मिला?
बिनौली। जिले में इससे पहले भी पुरातत्व विभाग की टीम उत्खनन कर चुकी है। वर्ष 2005 के सितंबर माह में सिनौली में खुदाई का कार्य कराया गया था। यहां हड़प्पाकालीन शवादान गृह मिला था।

इससे इस क्षेत्र में हड्प्पाकालीन सभ्यता की पुष्टि हो गई थी। वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति, कुषाण काल, गुप्त और राजपूत सभ्यताओं के प्रमाण भी मिल चुके हैं।  
महाभारतकालीन सभ्यता के संकेत

बागपत के बरनावा का पूरा क्षेत्र ही नहीं बल्कि मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ में भी महाभारतकाल के अवशेष हैं। इस बात की पुष्टि इस वजह से भी होती है, क्योंकि यह पूरा ्षेत्र कुुरुक्षेत्र और हस्तिानापुर के बीच में पड़ता है।

उत्खनन का कार्य शुरू हो जाने से यहां लाक्षागृह की हकीकत भी सामने आएगी। बरनावा का यह पर्यटक स्थल हिंडन और कृष्णा नदी से घिरा हुआ है। इसके पास ही शेखपुरा में दोनों नदियां एक हो जाती है।


टीले पर गुंबद है और इसी के पास से एक गुफा निकलती है। बरनावा टीला पहले ही सरंक्षित गुफाओं की लिस्ट में शामिल है। यहां से चित्रित धूसर मृदभांड  संस्कृति, कुषाण, गुप्त और राजपूत सभ्यताओं के प्रमाण पहलें से प्राप्त होते रहें है। 
 
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