जंगल में दम तोड़ते वन्य जीव: अफसर दफ्तर में आराम फरमाने में व्यस्त, एक दशक में 15 से ज्यादा तेंदुओं की हई माैत
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एक तरफ जहां दफ्तर में जनपद के वन विभाग के अधिकारी आराम फरमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन्य जीव जंगल में अकाल मृत्यु के साथ-साथ शिकारियों द्वारा मौत के घाट उतारे जा रहे हैं। जनपद में पिछले एक दशक में 15 से अधिक तेंदुए व हिरण समेत अन्य वन्य जीव शिकारियों द्वारा या तो मौत के घाट उतार जा चुके हैं या फिर उनकी अकाल मृत्यु हो चुकी है। शिकारियों के सक्रिय होने का शोर मचा लगातार किसान मचा रहे हैं, लेकिन वन विभाग नकार रहा है।
जनपद में आए दिन किसी न किसी गांव में किसानों को तेंदुआ दिखाई देते हैं। किसान व क्षेत्र के लोग इसकी शिकायत बड़ौत से लेकर बागपत व अन्य अधिकारियों को सूचना भी देते हैं और शिकारियों द्वारा शिकार किए जाने का शोर भी मचाते हैं। लेकिन डीएफओ राजेश कुमार की सख्ती के बावजूद स्थानीय अधिकारी दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते। आरोप है कि वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत से लेकर अन्य जनपद के अधिकारी व कर्मचारी विभागीय दफ्तर पर ही ड्यूटी पूरी कर लेते हैं।
आरोप है कि वे क्षेत्र में न तो कांबिंग करते हैं और न ही रात्रि गश्त। इसका पूरा फायदा शिकारी उठाते हैं। शिकारी बेखौफ होकर वन्य जीवों को मौत के घाट उतार रहे हैं। 8 मई 2024 को किरठल गांव में किसानों ने हरियाणा के दो शिकारियों को हिरण का शिकार करते हुए पकड़ा था। जिसमें एक हिरण की मौत भी हो गई थी। आज तक वन विभाग इसकी जांच पूरी नहीं कर सका।
उधर, निरपुड़ा गांव के जंगल में मृत मिले मादा शावक की मौत भी सिर में चोट लगने से हुई। इसका खुलासा पोस्टमार्टम में हुआ। क्षेत्रवासी शिकारियों द्वारा शिकार के दौरान मादा शावक की मौत होना बता रहे है।
डीएफओ ने किया मौके का निरीक्षण
उधर, डीएफओ राजेश कुमार, वन क्षेत्राधिकारी सुनेन्द्र सिंह, वन रक्षक संजय कुमार, वन दरोगा मोहित आदि ने शुक्रवार की देर शाम निरपुडा गांव मेें मौके का मुआवना किया। डीएफओ ने जनपद के अधिकारियों को रात्रि गश्त करने के अलावा वन्य जीवों की रक्षा करने व शिकारियों पर शिकंजा कसने के लिए निर्देशित किया। लापरवाही पर कार्रवाई की हिदायत दी।
केस नंबर एक
बड़ौत। 26 मई 2016 को निरपुड़ा गांव में ही टीकरी मार्ग पर किसान जसवंत के खेत में आम के पेड़ के नीचे किसानों को डेढ साल की उम्र के तेंदुए का शव पड़ा मिला था। ग्रामीणों ने तेंदुए की शिकार के दौरान मौत होने का आरोप लगाया था, क्योंकि तेंदुए के शव पर चोट के निशान मिले थे। विभागीय जांच भी शुरू हुई थी, लेकिन जांच अधर में लटकी हुई है।
केस नंबर दो
9 जनवरी 2021 दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन पर बड़ौत में डेढ़ साल के मादा तेंदुए का शव पड़ा मिला था। सुरक्षा के बीच तेंदुए के शव को बरेली के लिए भेज दिया गया था। वहीं पर पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
केस नंबर तीन
10 दिसंबर 2020 को बिनौली क्षेत्र की बरनावा वन रेंज में तेंदुए का शव पड़ा मिला था, जिसकी मौत की वजह सिर में चोट लगने से हुई थी। वन विभाग आज तक शिकारियों का पता नहीं आ पाई है।
केस नंबर चार
25 दिसंबर 2021 में आजमपुर मुलसम गांव के वन क्षेत्र में एक मादा तेंदुआ का शव पड़ा मिला। इसके अलावा ककौर गांव के यमुना खादर में 22 अक्तूबर 2018 को शिकारी के लगाये शिकंजे में तेंदुए का पैर फंस गया था।
रंछाड गांव के जंगल में 12 दिसंबर 2022 को रणवीर के खराब पड़े कुंए में तेंदुआ गिर गया था। गत 14 अप्रैल 2024 को हाईवे पर किशनपुर बराल गांव में एक तेंदुआ घायल हालत में पड़ा मिला था। ये तो कुछ उदाहरण है।
तेंदुए की दहशत में किसानों को जान का खतरा
पिछले कुछ सालों से तेंदुए बार-बार देखने को मिल रहे हैं। जिससे जंगल में जाने वाले किसानों की जान पर खतरा बना हुआ है। नतीजन किसान लाठी-डंडे लेकर एक साथ समूह बनाकर खेत में जाने को मजबूर हैं।
फोटो खिंचवाने की लगी रही होड़
निरपुड़ा के जंगल में तेंदुए के मादा शावक शव मिलते ही यहां पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। कुछ देर तक मौत की पड़ताल अपने-अपने हिसाब से की गई, लेकिन इसके बाद यहां फोटो खिंचवाने की होड़ मच गई।
जनपद के सभी वन अधिकारियों व कर्मचारियों को दिन के अलावा रात्रि में क्षेत्र की गश्त व कांबिग करने के लिए निर्देशित गया है। साथ ही वन्य जीवों की सुरक्षा का भी जिम्मा दिया गया है। वन्य जीवों की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है, लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -राजेश कुमार डीएफओ बागपत
विभागीय कार्य कराने के अलावा लगातार क्षेत्र में गश्त की जा रही है। जिस गांव में शिकायत मिलती है, वहां पर कर्मचारियों को भेजा जा रहा है, आराम फरमाना जैसी कोई बात नहीं है। आरोप गलत व बेबुनियाद हैं। - सुनेन्द्र सिंह वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत।