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यूपी: क्राइम ब्रांच ने बागपत से 60 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ तीन आरोपी दबोचे, जांच में खुलेंगे बड़े राज

Thu, 20 May 2021 06:32 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Thu, 20 May 2021 06:32 PM IST
सार

यूपी के बागपत में क्राइम ब्रांच व पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शनों के साथ तीन आरोपियों को दबोचा है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस जांच में कई बड़े राज खुल सकते हैं।

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UP Crime News: Police and crime branch team has arrested three accused with 60 Remadecivir Injection in Baghpat
बागपत पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बागपत में क्राइम ब्रांच, कोतवाली पुलिस और एफडीए की संयुक्त टीम ने 60 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि तीनों को चेकिंग के दौरान वंदना चौक से पकड़ा गया है। पकड़े गए आरोपियों में मुजफ्फरनगर के रहने वाले कपड़ा व्यापारी पिता-पुत्र भी शामिल हैं। बताया गया कि पंजाब की फार्मा कंपनी से इंजेक्शन नौ हजार रुपये में खरीदकर करीब 30 हजार में बेच देते थे। 

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एएसपी मनीष कुमार मिश्रा ने बताया कि बुधवार देर रात चेकिंग के दौरान बड़ौत की तरफ से आ रही एक्सयूवी 500 गाड़ी को वंदना चौक पर रोका गया। गाड़ी की तलाशी ली गई तो उसमें 60 रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद हुए। गाड़ी में मुजफ्फरनगर के गांधी कॉलोनी निवासी मनमोहन साहनी पुत्र बालकिशन और उसके पुत्र मुकुल साहनी सवार थे। ये दोनों कपड़ा व्यापारी हैं। गाड़ी चंपावत (उत्तराखंड) निवासी बिशन पुत्र लक्ष्मण सिंह चला रहा था। वह फिलहाल सेलमपुर चौक रानीपुर हरिद्वार में रह रहा था। 
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बिशन ने बताया कि मनमोहन साहनी के बड़े पुत्र विशाल से उसकी मुलाकात हुई थी। उसी के जरिए वह इंजेक्शन पंजाब की किसी कंपनी से लेकर आते थे। इन्होंने 92 इंजेक्शन पंजाब के जिरकपुर स्थित वेदांग फार्मा कंपनी से किसी सुखपाल चौहान के जरिए खरीदे थे। 32 इंजेक्शन इन लोगों ने खपा दिए हैं। एक इंजेक्शन करीब नौ हजार में खरीदकर 25 से 30 हजार तक में बेचते थे। विशाल और सुखपाल को पुलिस तलाश कर रही है। इनके मोबाइलों को सर्विलांस पर लगाकर पता लगाया जा रहा है कि ये लोग कब से इस काम में जुटे थे। 
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नकली भी हो सकते हैं इंजेक्शन 
ड्रग इंस्पेक्टर वैभव बब्बर के मुताबिक, प्रथम दृष्टया इंजेक्शन नकली लग रहे हैं। इंजेक्शनों का सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। वहां से रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा कि इंजेक्शन असली हैं या नहीं। बाकी इंजेक्शन और गाड़ी को सीज कर दिया गया है। एक इंजेक्शन की एमआरपी 54 सौ रुपये है। आरोपियों के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 की धारा 18/27 एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया गया है। 


पुलिस की कहानी बताई मनगढ़ंत 
पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस की कहानी को पूरी तरह मनगढ़ंत करार दिया है। बताया कि उन्हें शामली से गिरफ्तार किया गया है। इंजेक्शन स्विफ्ट गाड़ी में थे। स्विफ्ट गाड़ी और उसके चालक को छोड़ दिया गया। बाद में उनकी एक्सयूवी 500 गाड़ी को पुलिस ने घटना में शामिल कर लिया। मनमोहन का आरोप था कि इंजेक्शन बिशन के पास से बरामद हुए हैं। उनका इंजेक्शन से कुछ लेना देना नहीं था। उन्हें और उनके बेटों को मामले में फंसाया जा रहा है। जबकि बिशन का कहना था कि विशाल ने ही उन्हें इंजेक्शन उपलब्ध कराए थे। वह मास्क, सैनिटाइजर व अन्य सामान्य दवाओं की ट्रेडिंग करता था। विशाल ने ही पहले मास्क और सैनिटाइजर की ट्रेडिंग के लिए बात की थी। बाद में वह रेमडेसिविर इंजेक्शन की खरीद-फरोख्त करने में लग गया।

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