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ट्रामा सेंटर शुरू नहीं हुआ, एक्स-रे मशीन भी बंद पड़ी
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बागपत। जनपद में छह साल पहले एक करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च करके ट्रामा सेंटर और बर्न यूनिट को बनवाई गई थी। इसके लिए मशीनें भी भेजी गई। इसके बावजूद अभी तक दोनों का ही शुभारंभ नहीं हो सका। इनके भवनों आयुर्वेदिक सेंटर और सीटी स्कैन सेंटर शुरू कर दिया गया। उधर, जिला अस्पताल में डिजीटल एक्स-रे मशीन भी पिछले तीन महीने से रखी हुई है, जिसे शुरू तक नहीं कराया गया है। इस कारण सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को उठानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2016 में ट्रामा सेंटर का भवन बनाया गया, जिससे दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले मरीजों का उपचार कराया जा सके। क्योंकि यहां से गंभीर घायलों को दिल्ली व मेरठ रेफर करना पड़ता है। ट्रामा सेंटर के लिए काफी मशीनें भी पहुंच गई, लेकिन वहां स्टाफ अभी तक नहीं मिलने से उसे शुरू नहीं किया जा सका है। अब ट्रामा सेंटर के भवन में आयुर्वेदिक सेंटर व सीटी स्केन सेंटर शुरू कर दिया गया है। इस तरह छह साल बाद भी गंभीर घायलों को रेफर ही करना पड़ रहा है। इस तरह ही बर्न यूनिट का भवन भी बनकर तैयार है और वह भी स्टाफ न मिलने के कारण शुरू नहीं हो सका है। स्टाफ के लिए अभी तक आठ बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
डिजीटल एक्स-रे मशीन भी शुरू नहीं हुई, डायलसिस प्राइवेट कंपनी कर रही
जिला अस्पताल में तीन महीने पहले दस लाख रुपये से डिजीटल एक्स-रे विभाग से भेजी गई। लेकिन वह मशीन दो महीने तक डिब्बे में बंद रही और अब एक महीने से बाहर निकालकर रखी हुई है। मशीन को अभी तक शुरू नहीं किया गया है। पहले से रखी एक्स-रे मशीन का कंप्यूटर भी नहीं है तो इसलिए एक्स-रे नहीं मिल रहे हैं। डायलसिस यूनिट भी स्टाफ नहीं होने के कारण प्राइवेट कंपनी चला रही है और वह अपनी सुविधा के अनुसार उपचार कराती है।
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मरीजों को काटने पड़ रहे चक्कर
बड़का गांव की रहने वाली 65 वर्षीय महिला रामकली अपने कूल्हे का एक्स-रे कराने के लिए जिला अस्पताल में पहुंची। एक्स-रे नहीं होने से परेशानी झेलनी पड़ रही है। आरोप है कि डाक्टर सही जानकारी नहीं देते हैं और अब दो दिन चक्कर कटाकर बताया गया कि एक्स-रे नहीं होगा। दोघट के रहने वाले कालूराम का कहना है कि वह अपने बेटे को चोट लगने पर उपचार के लिए अस्पताल में लेकर आया था। उपचार की सुविधा नहीं होने की बात कहते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
ट्रामा सेंटर के लिए स्टाफ नहीं मिल रहा है, इसलिए उसे शुरू नहीं किया जा सका है। स्टाफ की नियुक्ति शासन स्तर से होनी है। डिजीटल एक्स-रे मशीन को शुरू करने के लिए भी शासन स्तर से तय कंपनी के इंजीनियर आएंगे। इसके लिए कई बार बात कर चुके है और उम्मीद है कि मशीन जल्द शुरू हो जाएगी। एसके चौधरी, सीएमएस
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जिला अस्पताल में वर्ष 2016 में ट्रामा सेंटर का भवन बनाया गया, जिससे दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले मरीजों का उपचार कराया जा सके। क्योंकि यहां से गंभीर घायलों को दिल्ली व मेरठ रेफर करना पड़ता है। ट्रामा सेंटर के लिए काफी मशीनें भी पहुंच गई, लेकिन वहां स्टाफ अभी तक नहीं मिलने से उसे शुरू नहीं किया जा सका है। अब ट्रामा सेंटर के भवन में आयुर्वेदिक सेंटर व सीटी स्केन सेंटर शुरू कर दिया गया है। इस तरह छह साल बाद भी गंभीर घायलों को रेफर ही करना पड़ रहा है। इस तरह ही बर्न यूनिट का भवन भी बनकर तैयार है और वह भी स्टाफ न मिलने के कारण शुरू नहीं हो सका है। स्टाफ के लिए अभी तक आठ बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
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डिजीटल एक्स-रे मशीन भी शुरू नहीं हुई, डायलसिस प्राइवेट कंपनी कर रही
जिला अस्पताल में तीन महीने पहले दस लाख रुपये से डिजीटल एक्स-रे विभाग से भेजी गई। लेकिन वह मशीन दो महीने तक डिब्बे में बंद रही और अब एक महीने से बाहर निकालकर रखी हुई है। मशीन को अभी तक शुरू नहीं किया गया है। पहले से रखी एक्स-रे मशीन का कंप्यूटर भी नहीं है तो इसलिए एक्स-रे नहीं मिल रहे हैं। डायलसिस यूनिट भी स्टाफ नहीं होने के कारण प्राइवेट कंपनी चला रही है और वह अपनी सुविधा के अनुसार उपचार कराती है।
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मरीजों को काटने पड़ रहे चक्कर
बड़का गांव की रहने वाली 65 वर्षीय महिला रामकली अपने कूल्हे का एक्स-रे कराने के लिए जिला अस्पताल में पहुंची। एक्स-रे नहीं होने से परेशानी झेलनी पड़ रही है। आरोप है कि डाक्टर सही जानकारी नहीं देते हैं और अब दो दिन चक्कर कटाकर बताया गया कि एक्स-रे नहीं होगा। दोघट के रहने वाले कालूराम का कहना है कि वह अपने बेटे को चोट लगने पर उपचार के लिए अस्पताल में लेकर आया था। उपचार की सुविधा नहीं होने की बात कहते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
ट्रामा सेंटर के लिए स्टाफ नहीं मिल रहा है, इसलिए उसे शुरू नहीं किया जा सका है। स्टाफ की नियुक्ति शासन स्तर से होनी है। डिजीटल एक्स-रे मशीन को शुरू करने के लिए भी शासन स्तर से तय कंपनी के इंजीनियर आएंगे। इसके लिए कई बार बात कर चुके है और उम्मीद है कि मशीन जल्द शुरू हो जाएगी। एसके चौधरी, सीएमएस

निर्माणाधीन बर्न यूनिट कक्ष- फोटो : BAGHPAT