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सांप से मुक्ति के लिए दूध-गंगाजल लेकर की परिक्रमा, किया हवन और भंडारा
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टयौढी गांव में परिक्रमा करते ग्रामीण
- फोटो : BARAUT
बागपत, बडौत। सांप से गांव टयौढी के ग्रामीण दहशत में हैं और उन्होंने उससे बचने के लिए पूजा-पाठ का सहारा लिया है। शनिवार को गांव में हवन किया गया और उसके बाद दूध और गंगाजल लेकर पूरे गांव की परिक्रमा की गई। बाद में भंडारे का आयोजन किया गया। बरसात के मौसम में सांप अक्सर बिलों से बाहर आ जाते हैं, पूजा से निजात मिल जाएगी, ऐसी ग्रामीणों की मान्यता और अंधविश्वास ही है।
पिछले करीब दस दिनों से यह गांव सर्पदंश की घटनाओं से चर्चाओं में है। गत 17 अगस्त की रात गांव में स्थित रोहित शर्मा के धर्मकांटे पर सो रहे अशोक शर्मा को डस लिया था और उनकी मौत हो गई थी। यह पूरी घटना धर्मकांटे के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। 18 अगस्त को सांप रोहित शर्मा की चारपाई पर आकर घूमता दिखाई दिया। कुछ दिन बाद सांप ने गांव के ही राजीव की पत्नी बबली, अरविंद के नौकर, अनुज की पत्नी इंदु को डस लिया। ग्रामीणों का कहना है कि आठ से दस लोगों को सांप ने डसा है और समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। ग्रामीणों का डसने वाला सांप एक ही ऐसा कुछ ग्रामीण दावा करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को इस दावे पर संशय भी है। ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर शनिवार को हवन और भंडारा किया। इसके लिए सरूरपुर से पंडित दीपांशु को बुलाया गया। इससे पहले गांव में धुनी जलाई गई थी। शनिवार को परिक्रमा निकालने वालों में धर्मपाल, योगेंद्र, मुनीश, रमेश, दयावान, कुलदीप, मोहित, सोनू, दयानंद, श्यामलाल, रामफल प्रधान, रामपाल मास्टर, हरी किशोर शर्मा, हरिया, बिजेंद्र कश्यप, सतपाल आदि शामिल रहे।
अंधविश्वास: शव का किया दाह
संस्कार, इसलिए आई मुसीबत
बड़ौत। गांव के राजीव, सुनील शर्मा, दीपक आदि का कहना है कि सांप के डंसने से अशोक की मौत हो गई थी, प्राचीन काल से यह मान्यता है कि सांप के डंसने से जिस व्यक्ति की मौत होती है, उसका शव जलाया नहीं जाता, लेकिन उसका दाह संस्कार किया गया। इससे यह मुसीबत आई है।
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विज्ञान का युग है, परिक्रमा और धूनी
से सांप भागेगा नहीं करते यकीन
गांव के कृष्णपाल शर्मा व अमन का कहना है कि परिक्रमा व धूनी से सांप को भगाने की कोशिश मात्र अंधविश्वास है। वह आज के इस विज्ञान के युग में इस तरह की बातों पर हम विश्वास नहीं रखते।
चिकित्सकों की सलाह पर किया था दाह संस्कार
मृतक अशोक के पिता जगमोहन, बड़े भाई आनंद शर्मा ने बताया कि सांप के डंसने के बाद अशोक को इलाज के लिए बागपत, मेरठ व दिल्ली के अस्पतालों में ले जाया गया। मृत घोषित होने के बाद चिकित्सकों की सलाह पर ही मृतक अशोक का दाह संस्कार किया था। गांव में शांति बनी रहे, इसलिए वे परिक्रमा शामिल हुए। सांप को भगाने जैसी कोई बात नहीं है। गांव में जो अफवाह फैली हुई है, उस पर हम विश्वास नहीं करते। संवाद
शव का जल प्रवाह करना गलत
सीएचसी अधीक्षक डा विजय कुमार ने बताया कि काफी समय से यह अफवाह चली आ रही है कि जिस व्यक्ति की सांप के डंसने से मौत हो जाती है, उसको जलाने की बजाएं जल प्रवाह करना चाहिए, यह बिल्कुल गलत है। इससे जल भी दूषित होता है। सांप के डंसने के बाद किसी भी चिकित्सक द्वारा व्यक्ति को मृत घोषित किएं जाने पर उसका अपने रीति-रिवाज से दाह संस्कार करना चाहिए।
दो से तीन व्यक्ति को डंसने पर खत्म हो जाता है जहर
बड़ौत। वन्य जीव विशेषज्ञ जीएस खुशारिया का कहना है कि सांप दो प्रकार के होते है। एक जहरीला व दूसरा बिना जहर वाला। जो सांप जहरीला होता है, वह बहुत धीमे चलता है और अक्सर चूहे की तलाश में जंगल छोड़कर घर में घुस जाता है, जो सांप जहरीला नहीं होता वह हल्की सी आवाज सुनकर तेजी से दौड़कर सुरक्षित जगह पहुंच जाता है। उन्होंने बताया कि दो से तीन व्यक्ति को डंसने के बाद सांप का जहर खत्म हो जाता है। दोबारा से जहर बनने के लिए 15 से 20 दिन लग जाता है।
संर्पदंश होने पर इस तरह करें बचाव
1-घर में जिस जगह सांप दिखे, उसके आसपास केरोसिन छिड़कने से चला जाता है।
2-सांप के डंसने के बाद आधे से एक घंटे के अंदर चिकित्सक के पास ले जाए।
3- सर्प दंश के शिकार व्यक्ति को सोने ना दे, उसे चाय और कॉपी पिलाते रहे।
4- होम्योपैथिक दवा नाजा-नाजा 200 एमएल हर दस मिनट के अंदर देते रहे।
5-जिस जगह सांप ने डसा, उस जगह इंजेक्शन से खींचकर खून निकाल ले।
6- सांप के डसने के स्थान से थोड़ा ऊपर रस्सी या कपडे़ से बंध लगा दें।
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पिछले करीब दस दिनों से यह गांव सर्पदंश की घटनाओं से चर्चाओं में है। गत 17 अगस्त की रात गांव में स्थित रोहित शर्मा के धर्मकांटे पर सो रहे अशोक शर्मा को डस लिया था और उनकी मौत हो गई थी। यह पूरी घटना धर्मकांटे के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। 18 अगस्त को सांप रोहित शर्मा की चारपाई पर आकर घूमता दिखाई दिया। कुछ दिन बाद सांप ने गांव के ही राजीव की पत्नी बबली, अरविंद के नौकर, अनुज की पत्नी इंदु को डस लिया। ग्रामीणों का कहना है कि आठ से दस लोगों को सांप ने डसा है और समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। ग्रामीणों का डसने वाला सांप एक ही ऐसा कुछ ग्रामीण दावा करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को इस दावे पर संशय भी है। ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर शनिवार को हवन और भंडारा किया। इसके लिए सरूरपुर से पंडित दीपांशु को बुलाया गया। इससे पहले गांव में धुनी जलाई गई थी। शनिवार को परिक्रमा निकालने वालों में धर्मपाल, योगेंद्र, मुनीश, रमेश, दयावान, कुलदीप, मोहित, सोनू, दयानंद, श्यामलाल, रामफल प्रधान, रामपाल मास्टर, हरी किशोर शर्मा, हरिया, बिजेंद्र कश्यप, सतपाल आदि शामिल रहे।
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अंधविश्वास: शव का किया दाह
संस्कार, इसलिए आई मुसीबत
बड़ौत। गांव के राजीव, सुनील शर्मा, दीपक आदि का कहना है कि सांप के डंसने से अशोक की मौत हो गई थी, प्राचीन काल से यह मान्यता है कि सांप के डंसने से जिस व्यक्ति की मौत होती है, उसका शव जलाया नहीं जाता, लेकिन उसका दाह संस्कार किया गया। इससे यह मुसीबत आई है।
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विज्ञान का युग है, परिक्रमा और धूनी
से सांप भागेगा नहीं करते यकीन
गांव के कृष्णपाल शर्मा व अमन का कहना है कि परिक्रमा व धूनी से सांप को भगाने की कोशिश मात्र अंधविश्वास है। वह आज के इस विज्ञान के युग में इस तरह की बातों पर हम विश्वास नहीं रखते।
चिकित्सकों की सलाह पर किया था दाह संस्कार
मृतक अशोक के पिता जगमोहन, बड़े भाई आनंद शर्मा ने बताया कि सांप के डंसने के बाद अशोक को इलाज के लिए बागपत, मेरठ व दिल्ली के अस्पतालों में ले जाया गया। मृत घोषित होने के बाद चिकित्सकों की सलाह पर ही मृतक अशोक का दाह संस्कार किया था। गांव में शांति बनी रहे, इसलिए वे परिक्रमा शामिल हुए। सांप को भगाने जैसी कोई बात नहीं है। गांव में जो अफवाह फैली हुई है, उस पर हम विश्वास नहीं करते। संवाद
शव का जल प्रवाह करना गलत
सीएचसी अधीक्षक डा विजय कुमार ने बताया कि काफी समय से यह अफवाह चली आ रही है कि जिस व्यक्ति की सांप के डंसने से मौत हो जाती है, उसको जलाने की बजाएं जल प्रवाह करना चाहिए, यह बिल्कुल गलत है। इससे जल भी दूषित होता है। सांप के डंसने के बाद किसी भी चिकित्सक द्वारा व्यक्ति को मृत घोषित किएं जाने पर उसका अपने रीति-रिवाज से दाह संस्कार करना चाहिए।
दो से तीन व्यक्ति को डंसने पर खत्म हो जाता है जहर
बड़ौत। वन्य जीव विशेषज्ञ जीएस खुशारिया का कहना है कि सांप दो प्रकार के होते है। एक जहरीला व दूसरा बिना जहर वाला। जो सांप जहरीला होता है, वह बहुत धीमे चलता है और अक्सर चूहे की तलाश में जंगल छोड़कर घर में घुस जाता है, जो सांप जहरीला नहीं होता वह हल्की सी आवाज सुनकर तेजी से दौड़कर सुरक्षित जगह पहुंच जाता है। उन्होंने बताया कि दो से तीन व्यक्ति को डंसने के बाद सांप का जहर खत्म हो जाता है। दोबारा से जहर बनने के लिए 15 से 20 दिन लग जाता है।
संर्पदंश होने पर इस तरह करें बचाव
1-घर में जिस जगह सांप दिखे, उसके आसपास केरोसिन छिड़कने से चला जाता है।
2-सांप के डंसने के बाद आधे से एक घंटे के अंदर चिकित्सक के पास ले जाए।
3- सर्प दंश के शिकार व्यक्ति को सोने ना दे, उसे चाय और कॉपी पिलाते रहे।
4- होम्योपैथिक दवा नाजा-नाजा 200 एमएल हर दस मिनट के अंदर देते रहे।
5-जिस जगह सांप ने डसा, उस जगह इंजेक्शन से खींचकर खून निकाल ले।
6- सांप के डसने के स्थान से थोड़ा ऊपर रस्सी या कपडे़ से बंध लगा दें।

टयौढी गांव में परिक्रमा के दौरान उमड़ी लोगो की भीड़- फोटो : BARAUT

टयौढी गांव में भंडारा वितरण करते ग्रामीण- फोटो : BARAUT

टयौढी गांव में आयोजित यज्ञ में आहुतियां देते ग्रामीण- फोटो : BARAUT

टयौढी गांव में परिक्रमा के दौरान मोजूद ग्रामीण- फोटो : BARAUT