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आदर्श गांव पलड़ी में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं, अफसरों की रिपोर्ट में सब कुछ ठीक
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गंदगी से अटा पड़ा गांव का तालाब
- फोटो : BAGHPAT
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सांसद डा. सत्यपाल सिंह ने 2014 में गांव लिया था गोद, पेयजल समेत बिजली, पानी निकासी आदि सुविधाएं करनी थी बेहतर
गांव में पानी, बिजली, परिवहन तक की समस्या दूर नहीं हुई, अब शासन के रिपोर्ट मांगने पर प्रशासन ने सबकुछ अच्छा बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट (बागपत)। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं और दावा किताबी है.... प्रख्यात कवि अदम गोंडवी की यह लाइन बागपत के सांसद आदर्श गांव पलड़ी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। गांव में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मगर, प्रशासन की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में गांव में कोई समस्या नहीं है और वहां के लोगों को बिजली, पानी, परिवहन समेत अन्य सभी सुविधा उम्मीद से ज्यादा बेहतर मिल रही है। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी अजीब तर्क दे रहे है कि अगर किसी को रिपोर्ट से आपत्ति है तो वह उसे झूठी बताकर शिकायत कर सकता है।
करीब पांच हजार की आबादी वाले पलड़ी गांव को वर्ष 2014 में सांसद डा. सत्यपाल सिंह ने आदर्श गांव बनाने के लिए चुना था। हर बेहतर सुविधा देने की घोषणा की गई थी। उस वक्त गांव में कुछ कार्य कराए जरूर गए, लेकिन उनका लाभ भी ज्यादा समय तक नहीं मिल सका। गांव की बदहाली की सच्चाई अब इसलिए सामने आई, क्योंकि शासन की ओर से गांव में मूलभूत सुविधाओं को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पेयजल, पानी निकासी, बिजली, सड़कों आदि की स्थिति काफी अच्छी है। जबकि गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। दस साल पहले टंकी का निर्माण कराया था, लेकिन घटिया सामग्री व घटिया पाइपलाइन डालने के कारण कुछ ही घरों में पानी पहुंचता है। यह गांव दाहा-बरनावा मुख्य मार्ग पर है, इसके बावजूद दाहा से पलड़ी, बरनावा, मेरठ तक पहले चलने वाली बस सेवा भी बंद है। गांव के लोगों को दाहा से गांव तक पैदल ही आना पड़ता है। गांव में पानी निकासी की बड़ी समस्या है। तालाब की पहले खुदाई कराई गई, लेकिन वह कूड़े से अटे पड़े है और हल्की बारिश होते ही गलियों में पानी भर जाता है। गांव में कोई खेल मैदान तक नहीं है। गांव में गरीब परिवार आज भी कच्चे मकानों में रहते है। इसके बावजूद गांव में सबकुछ बेहतर बताते हुए रिपोर्ट भेज दी गई।
गांव में पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बारिश होते ही गांव की गलियों में पानी भर जाता है और लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। अन्य भी कई समस्याएं है, जिनका समाधान किया जाना चाहिए। - बालेंद्र उर्फ बिल्लू
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हमारे गांव में अभी तक ऐसा कोई काम नहीं हुआ, जिससे कहा जा सके कि यह आदर्श गांव है। गांव में पेयजल, पानी निकासी, परिवहन सभी समस्याएं है। - मास्टर पवन
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गांव में बनी पेयजल की टंकी की लाइन में पाइप ऐसे डाले गए है जो दबाव सहन नहीं कर पाते है। वह किसी न किसी जगह से आए दिन लीक हो जाते है, जिससे पेयजल तक की समस्या रहती है। - नरेश
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गांव में केवल एक सफाई कर्मचारी मिला हुआ है। वह अकेला पूरे गांव की सफाई नहीं कर पाता है। गांव में दो सफाई कर्मी जरूर चाहिए। जल्द ही गांव में मुख्य रास्तों पर स्ट्रीट लाइट लगवाने का प्रस्ताव है। जिस तरह से पंचायत में बजट की व्यवस्था होती रहेगी, ऐसे ही विकास कार्य कराए जाएंगे। - भावना मिश्रा, प्रधान
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किसी को पानी या अन्य कोई समस्या है तो वह शिकायत कर दें। अगर रिपोर्ट से किसी को समस्या है तो उसकी भी शिकायत कर दें कि रिपोर्ट झूठी बनाई है। - रंजीत सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
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गांव में पानी, बिजली, परिवहन तक की समस्या दूर नहीं हुई, अब शासन के रिपोर्ट मांगने पर प्रशासन ने सबकुछ अच्छा बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट (बागपत)। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं और दावा किताबी है.... प्रख्यात कवि अदम गोंडवी की यह लाइन बागपत के सांसद आदर्श गांव पलड़ी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। गांव में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मगर, प्रशासन की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में गांव में कोई समस्या नहीं है और वहां के लोगों को बिजली, पानी, परिवहन समेत अन्य सभी सुविधा उम्मीद से ज्यादा बेहतर मिल रही है। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी अजीब तर्क दे रहे है कि अगर किसी को रिपोर्ट से आपत्ति है तो वह उसे झूठी बताकर शिकायत कर सकता है।
करीब पांच हजार की आबादी वाले पलड़ी गांव को वर्ष 2014 में सांसद डा. सत्यपाल सिंह ने आदर्श गांव बनाने के लिए चुना था। हर बेहतर सुविधा देने की घोषणा की गई थी। उस वक्त गांव में कुछ कार्य कराए जरूर गए, लेकिन उनका लाभ भी ज्यादा समय तक नहीं मिल सका। गांव की बदहाली की सच्चाई अब इसलिए सामने आई, क्योंकि शासन की ओर से गांव में मूलभूत सुविधाओं को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पेयजल, पानी निकासी, बिजली, सड़कों आदि की स्थिति काफी अच्छी है। जबकि गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। दस साल पहले टंकी का निर्माण कराया था, लेकिन घटिया सामग्री व घटिया पाइपलाइन डालने के कारण कुछ ही घरों में पानी पहुंचता है। यह गांव दाहा-बरनावा मुख्य मार्ग पर है, इसके बावजूद दाहा से पलड़ी, बरनावा, मेरठ तक पहले चलने वाली बस सेवा भी बंद है। गांव के लोगों को दाहा से गांव तक पैदल ही आना पड़ता है। गांव में पानी निकासी की बड़ी समस्या है। तालाब की पहले खुदाई कराई गई, लेकिन वह कूड़े से अटे पड़े है और हल्की बारिश होते ही गलियों में पानी भर जाता है। गांव में कोई खेल मैदान तक नहीं है। गांव में गरीब परिवार आज भी कच्चे मकानों में रहते है। इसके बावजूद गांव में सबकुछ बेहतर बताते हुए रिपोर्ट भेज दी गई।
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गांव में पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बारिश होते ही गांव की गलियों में पानी भर जाता है और लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। अन्य भी कई समस्याएं है, जिनका समाधान किया जाना चाहिए। - बालेंद्र उर्फ बिल्लू
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हमारे गांव में अभी तक ऐसा कोई काम नहीं हुआ, जिससे कहा जा सके कि यह आदर्श गांव है। गांव में पेयजल, पानी निकासी, परिवहन सभी समस्याएं है। - मास्टर पवन
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गांव में बनी पेयजल की टंकी की लाइन में पाइप ऐसे डाले गए है जो दबाव सहन नहीं कर पाते है। वह किसी न किसी जगह से आए दिन लीक हो जाते है, जिससे पेयजल तक की समस्या रहती है। - नरेश
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गांव में केवल एक सफाई कर्मचारी मिला हुआ है। वह अकेला पूरे गांव की सफाई नहीं कर पाता है। गांव में दो सफाई कर्मी जरूर चाहिए। जल्द ही गांव में मुख्य रास्तों पर स्ट्रीट लाइट लगवाने का प्रस्ताव है। जिस तरह से पंचायत में बजट की व्यवस्था होती रहेगी, ऐसे ही विकास कार्य कराए जाएंगे। - भावना मिश्रा, प्रधान
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किसी को पानी या अन्य कोई समस्या है तो वह शिकायत कर दें। अगर रिपोर्ट से किसी को समस्या है तो उसकी भी शिकायत कर दें कि रिपोर्ट झूठी बनाई है। - रंजीत सिंह, मुख्य विकास अधिकारी