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खट्टा प्रह्लादपुर में है आठ पलकों वाला आलौकिक शिवलिंग
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महंत एकादशी महाराज गिरि
- फोटो : BAGHPAT
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चांदीनगर (बागपत)। खट्टा प्रहलादपुर के महेश मंदिर में आठ पलकों का अलौकिक शिवलिंग है। मंदिर के आस-पास का क्षेत्र में भगवान परशुराम का प्राचीन आश्रम है। भगवान परशुराम ने इसी स्थान पर रुष्ट होकर कर्ण को श्राप दिया था। जूना अखाड़े के महंत एकादशी गिरी महाराज इस अलौकिक व अद्भुत मंदिर की देख-रेख करते है।
मंदिर प्रांगण में 25 हजार साल पुराना विशाल वट वृक्ष है। इसकी पुष्टि भारत सरकार की ऐतिहासिक धरोहर की जांच करने वाली पेड़ों से जुड़े विशेषज्ञों की टीम कर चुकी है। मंदिर के पुजारी एकादशी गिरी बताते है कि मंदिर प्रांगण में पूर्व महंतों की समाधियां बनी हुई है और एक धूना 24 घंटे चलता है। मंदिर परिसर में मौजूद वटवृक्ष पर भगवान गणेश का आकारनुमा चित्र बना है। बताया जाता है कि हिसावदा की एक लड़की को स्वप्न में पेड़ पर तस्वीर दिखाई दी थी। स्वप्न की सच्चाई देखने के लिए लड़की के परिजन महेश मंदिर पहुंचे थे।
मंदिर में मौजूद है आठ पलकों वाली पिंडी
मंदिर में आठ पलक वाली लाल पिंडी मौजूद है। भगवान परशुराम ने प्राचीनकाल में मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी और मंदिर प्रागंण के पास ही भगवान परशुराम का आश्रम भी है।
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इसी स्थान पर दिया था कर्ण को श्राप
बताया जाता है कि भगवान परशुराम ने इसी स्थान पर कर्ण को श्राप दिया था। मंदिर के महंत एकादशी गिरी महाराज बताते है भगवान परशुराम इसी स्थान पर कर्ण की गोद पर अपना सिर रखकर विश्राम कर रहे थे। कर्ण को बिच्छू ने काट लिया था। भगवान परशुराम की कर्ण के बहते खून के स्पर्श से नींद भंग हो गयी और उन्होंने स्वयं को सूत पुत्र बताकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए क्रोधित होकर कर्ण को श्राप दिया था।
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मंदिर प्रांगण में 25 हजार साल पुराना विशाल वट वृक्ष है। इसकी पुष्टि भारत सरकार की ऐतिहासिक धरोहर की जांच करने वाली पेड़ों से जुड़े विशेषज्ञों की टीम कर चुकी है। मंदिर के पुजारी एकादशी गिरी बताते है कि मंदिर प्रांगण में पूर्व महंतों की समाधियां बनी हुई है और एक धूना 24 घंटे चलता है। मंदिर परिसर में मौजूद वटवृक्ष पर भगवान गणेश का आकारनुमा चित्र बना है। बताया जाता है कि हिसावदा की एक लड़की को स्वप्न में पेड़ पर तस्वीर दिखाई दी थी। स्वप्न की सच्चाई देखने के लिए लड़की के परिजन महेश मंदिर पहुंचे थे।
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मंदिर में मौजूद है आठ पलकों वाली पिंडी
मंदिर में आठ पलक वाली लाल पिंडी मौजूद है। भगवान परशुराम ने प्राचीनकाल में मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी और मंदिर प्रागंण के पास ही भगवान परशुराम का आश्रम भी है।
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इसी स्थान पर दिया था कर्ण को श्राप
बताया जाता है कि भगवान परशुराम ने इसी स्थान पर कर्ण को श्राप दिया था। मंदिर के महंत एकादशी गिरी महाराज बताते है भगवान परशुराम इसी स्थान पर कर्ण की गोद पर अपना सिर रखकर विश्राम कर रहे थे। कर्ण को बिच्छू ने काट लिया था। भगवान परशुराम की कर्ण के बहते खून के स्पर्श से नींद भंग हो गयी और उन्होंने स्वयं को सूत पुत्र बताकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए क्रोधित होकर कर्ण को श्राप दिया था।

खट्टाप्रहलादपुर गांव स्थित महेश मंदिर- फोटो : BAGHPAT

खट्टाप्रहलादपुर गांव स्थित महेश मंदिर में वट वृक्ष पर भगवान गणेश की आकृति- फोटो : BAGHPAT