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काव्य गोष्ठी में बही देशभक्ति की बयार

Sun, 16 Jan 2022 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 12:18 AM IST
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The wind of patriotism spread in the poetry seminar
संवाद न्यूज एजेंसी
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खेकड़ा। सेना दिवस पर लोक साहित्य संस्कृति समिति के तत्वावधान में काव्य संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें कवियों ने सीमा की सुरक्षा कर रहे जवानों के हौसले को नमन किया। कविताओं में देशभक्ति की बयार बही।

मोहल्ला रामपुर में आयोजित संगोष्ठी का प्रारंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। कवि सुमित कुमार ने कहा ‘संसद में नेता को देखो, एसी में बैठा सोता है, सरहद पर जवान को देखो जो जंग बर्फीले तूफानों से लोहा लेता है’। कवि संदीप कुमार ने ‘देशद्रोही देश में, धन होता विदेश में, क्यू होते है ऐसे काम, बचा लो अपना हिंदुस्तान’, कवि अजय ने ‘दुश्मनों ने हमको सभी गुर सिखाए है, मुश्किलों में भी सैनिकों ने रास्ते बनाए है’, कवि गजेंद्र गजानन ने ‘जो लगाए थे पौधे वो पेड़ हो गए, जिनको समझा था शेर वो शमशेर हो गए’ सुनाकर वाहवाही लूटी। संगोष्ठी में विकास कुमार, मुकेश, अमित, महेश कुमार, अशोक कुमार, भूपेश कुमार, अनुज आदि मौजूद रहे।
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