फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   The tradition of Jalabhishek of Lord Shiva is centuries old

सदियों पुरानी भगवान शिव के जलाभिषेक की परंपरा

Tue, 26 Jul 2022 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 12:06 AM IST
विज्ञापन
The tradition of Jalabhishek of Lord Shiva is centuries old
टेराकोटा से मिली जलहरी - फोटो : BAGHPAT
बागपत। भगवान शिव सदियों से आराध्य है और भक्त उनका जलाभिषेक करने के साथ ही पूजा-अर्चना करते हैं। इसका बड़ा प्रमाण टेराकोटा निर्मित करीब दो हजार साल पुरानी शिवलिंग की जलहरी है, जो बड़ौत के शहजादराय शोध संस्थान में मौजूद है।
विज्ञापन

शहजादराय शोध संस्थान के निदेशक इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने बताया कि वह बरेली के रामनगर में अहिच्क्षेत्र पुरास्थल के पुरातात्विक सर्वेक्षण के लिए कई बार गए। वहां करीब डेढ़ साल पहले सर्वे के दौरान उनको टेराकोटा से निर्मित शिवलिंग की जलहरी मिली। उनके अनुसार देश में कई जगह पत्थर से निर्मित प्राचीन जलहरी जरूर मिली, लेकिन टेराकोटा (मिट्टी) से बनी जलहरी केवल उसी जगह मिली।
विज्ञापन

उनके अनुसार उस जलहरी का निर्माण करीब दो हजार साल पहले कुषाण काल में हुआ है और उस समय पत्थर की जलहरी नहीं बनाई जाती थी, इसलिए उसको टेराकोटा से बनाया गया। इसलिए ही यह जलहरी दुर्लभ श्रेणी में आती है। उस जलहरी के मिलने से यह स्पष्ट होता है कि दो हजार साल पहले भी आज की तरह लोग भगवान शिव का जलाभिषेक व पूजा-अर्चना करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed