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Baghpat News: एक मात्र एएनएम के भरोसे 8000 आबादी के इलाज का जिम्मा

Sun, 28 May 2023 01:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 28 May 2023 01:06 AM IST
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The responsibility of treating 8000 population on the basis of only one ANM
- सीएमओ और सीएचसी अधीक्षक को कई पत्र लिखे जाने के बाद भी नहीं हुई चिकित्सक की तैनाती
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- छह किलोमीटर दूर बड़ौत व अन्य जगहों पर जाकर कराना पड़ रहा उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। भले ही स्वास्थ्य विभाग हर गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का दावा कर रहा हो, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह दावा बड़का गांव मेें हवाई साबित हो रहा है। जहां 8000 से अधिक आबादी के इलाज का जिम्मा मात्र एक एएनएम पर है। जबकि यहां पर बने उपस्वास्थ्य केंद्र की हालत में काफी जर्जर हाे चुकी है। ऐसी स्थिति में गांव की महिलाओं और युवतियों के अलावा पुरूषों को गांव से छह किलोमीटर दूर बड़ौत या अन्य जगहों पर जाकर अपना इलाज कराना पड़ रहा है।
बड़ौत ब्लाक मुख्यालय से तकरीबन आठ किलोमीटर दूर स्थित बड़का गांव की आबादी तकरीबन 8000 है। गांव में बीमार होने पर लोगों के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र तो बना हुआ है, लेकिन उसकी हालत बहुत जर्जर है, जो कभी भी गिर सकता है। वहां पर कभी चिकित्सक तैनात नहीं हुए। ऐसे में गांव की महिलाओं, बेटियों और पुरुषों के बीमार होने पर उनका इलाज करने का जिम्मा मात्र एक एएनएम के भरोसे है। एएनएम भी पूरे गांव में बीमार लोगों का इलाज करते हुए थक जाती है। लेकिन कई बार लिखित और मौखिक शिकायत किए जाने के बाद भी न तो यहां पर किसी चिकित्सक की तैनात हुई है और न ही उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत सुधारी गई है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लोग खुद को ठगा महसूस करते है, क्योंकि बीमार होने पर उन्हें गांव से छह किलोमीटर दूर बड़ौत या अन्य जगहों पर जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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ये बोली महिलाएं
स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर गांव मेंं खोला गया उप स्वास्थ्य केंद्र काफी जर्जर हो चुका है। यहां पर कोई चिकित्सक तक नहीं है। अक्सर केंद्र पर ताला लगा रहता है, जिस कारण आज भी लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है- रीतु शर्मा
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गांव की 8000 आबादी के स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी मात्र एक एएनएम के भरोसे है। कई बार वह भी उपलब्ध नहीं हो पाती। ऐसे में अचानक तबियत खराब होने पर मरीज को लेकर बड़ौत या अन्य जगहों पर बने अस्पताल की ओर दौड़ना पड़ता है- नीतू।
आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति तो दूरदराज जाकर इलाज करा रहे हैं, लेकिन गरीबों को आसानी से इलाज नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि यहां पर लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए दवाइयां भी नसीब नहीं हो पा रही हैं। जो एएनएम यहां पर तैनात की गई है, वह ही महिलाओं को गोली-दवाई दे देती है। इमरजेंसी की दशा में छह किलोमीटर दूर बड़ौत जाना पड़ता है- सत्यवती देवी


ये बोलेे सीएचसी अधीक्षक
बड़ौत। बड़का गांव के उपस्वास्थ्य केंद्र की हालत काफी खराब है और यहां पर चिकित्सक तैनाती के लिए कई बार सीएमओ और लखनऊ तक उच्चाधिकारियों को लिखा जा चुका है। मात्र एक एएनएम ही ग्रामीणों के इलाज के लिए है। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिले, इसके लिए प्रयासरत हू- डा विजय कुमार
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