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किसान आंदोलन के लिए झोंक रहे ताकत
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गॉजीपुर बॉर्डर के लिए खाद्य सामग्री लेकर रवाना होते बासौली, बरवाला के किसान
- फोटो : BARAUT
बागपत और बड़ौत क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसान गाजीपुर बॉर्डर के लिए रवाना हुए
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत/बड़ौत। कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे धरने में शामिल होने के लिए बुधवार को बागपत और बड़ौत क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसान रवाना हुए। किसानों ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द कृषि कानून वापस ले लेने चाहिए।
बागपत क्षेत्र के बली, निबाली, नौरोजपुर गुर्जर से किसान रवाना हुए। भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने बताया कि गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र से रोजाना किसान रवाना होंगे। गाजीपुर बॉर्डर को कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उधर, बुधवार को बासौली, बावली, रमाला गांव के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाद्य सामग्री लेकर बरवाला गांव पहुंचे। यहां से किसान गाजीपुर बॉर्डर पर नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरना पर जाने के लिए रवाना हो गए। किसानों ने कहा कि देश की मोदी सरकार नए कृषि कानून किसानों पर थोपकर उन्हें बर्बाद करना चाहती है, ताकि पूंजीपतियों को फायदा पहुंच सके, लेकिन देश का किसान ऐसा नहीं होने देगा। प्रतिदिन एक गांव के किसान धरने में ठहरते है। यह सिलसिला जब तक जारी रहेगा, तब तक सरकार यह तीनों कानून वापस नहीं लेती। रवाना होने वाले किसानों में नरेश ठेकेदार, मुनेश बरवाला, राजपाल, रामपाल, नरेंद्र, सुखवीर, महेंद्र, आजाद, ओमपाल, कृपाल मुखिया, ओमप्रकाश, सत्यवीर शामिल रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत/बड़ौत। कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे धरने में शामिल होने के लिए बुधवार को बागपत और बड़ौत क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसान रवाना हुए। किसानों ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द कृषि कानून वापस ले लेने चाहिए।
बागपत क्षेत्र के बली, निबाली, नौरोजपुर गुर्जर से किसान रवाना हुए। भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने बताया कि गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र से रोजाना किसान रवाना होंगे। गाजीपुर बॉर्डर को कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उधर, बुधवार को बासौली, बावली, रमाला गांव के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाद्य सामग्री लेकर बरवाला गांव पहुंचे। यहां से किसान गाजीपुर बॉर्डर पर नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरना पर जाने के लिए रवाना हो गए। किसानों ने कहा कि देश की मोदी सरकार नए कृषि कानून किसानों पर थोपकर उन्हें बर्बाद करना चाहती है, ताकि पूंजीपतियों को फायदा पहुंच सके, लेकिन देश का किसान ऐसा नहीं होने देगा। प्रतिदिन एक गांव के किसान धरने में ठहरते है। यह सिलसिला जब तक जारी रहेगा, तब तक सरकार यह तीनों कानून वापस नहीं लेती। रवाना होने वाले किसानों में नरेश ठेकेदार, मुनेश बरवाला, राजपाल, रामपाल, नरेंद्र, सुखवीर, महेंद्र, आजाद, ओमपाल, कृपाल मुखिया, ओमप्रकाश, सत्यवीर शामिल रहे।
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