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......लापरवाही पड़ रही जान पर भारी, अस्पतालों में आने वाले 30 फीसदी मरीज फेफडों में संक्रमण से परेशान

Mon, 10 May 2021 11:43 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 May 2021 11:43 PM IST
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The first six days are very important
बड़ौत। कोरोना संक्रमण बढ़ने के बावजूद लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। कई लोग संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद भी जांच कराने के बजाए खुद इलाज करे रहे हैं। यही सोच लोगों के लिए घातक बन रही है। चिकित्सकों की राय है कि संक्रमण के शुरूआती छह दिन बेहद खास होते हैं। इसके बाद स्थिति बिगड़ने लगती है। लक्षणों को नजरअंदाज करने पर फेफडे़ प्रभावित होने लगते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सीएचसी, पीएचसी व जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले केसों में 30 फीसदी के फेफडे़ संक्रमित हैं। ये ऐसे मरीज हैं जिन्हें सांस लेने में कई दिन से तकलीफ हो रही है। उन्होंने शुरुआत के दो-तीन दिन गंभीरता नहीं दिखाई। इससे संक्रमण अपना दायरा बढ़ाने में कामयाब रहा है।
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शुरुआती छह दिन रखें ध्यान
पूर्व सीएचसी अधीक्षक व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजेंद्र मलिक का कहना है कि संक्रमण के शुरुआती छह दिन खास होते हैं। इसकी पहचान होने पर दवा शुरू हो जाने पर व्यक्ति लेट से इलाज कराने वाले मरीज के सापेक्ष जल्द रिकवर हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को संक्रमण का कोई लक्षण अपने में दिखे तो चिकित्सक से परामर्श पर दवा खाना शुरू कर दे। जिससे संक्रमण को वह अपने शरीर में बढ़ने से रोक सके।
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जागरूकता ही बचाव, सावधानियां भी बरत रहे हैं लोग
संक्रमण की दूसरी लहर में डाक्टरों के पास पहुंच रहे लोगों को चिकित्सक कोरोना जांच कराने को कह रहे हैं। कई लोगों द्वारा एंटीजन के बजाए आरटीपीसीआर जांच को प्राथमिकता देते हुए सैंपल दे रहे हैं। इसकी रिपोर्ट तीन से चार दिन में आ रही है। इसको देखते हुए संक्रमण का लक्षण महसूस होने पर लोग रिपोर्ट आए बिना ही चिकित्सक के परामर्श पर दवा का सेवन कर रहे हैं।

इन बातों का रखें ख्याल
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजेन्द्र मलिक ने कहा कि लोगों को इस संक्रमण से बचाव को लेकर सर्तकता बरतना जरूरी है। सैंपल देने के बाद रिपोर्ट न आने तक आइसोलेट रहें। डाक्टर के परामर्श पर ही एंटीबायेटिक दवा का प्रयोग करें, खुद से दवा न लें। यादि ऑक्सीजन लेबल 94 से कम हो जाता है तो ऐसे में प्रोन पॉजिशन करें। इसमें 20 मिनट छाती के बल लेटे, फिर इतने समय ही दायीं और बायीं करवट लेकर आक्सीजन लेबल बढ़ा सकते हैं।
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