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हाल-ए-बागपत: ये तस्वीर बयां कर रही गांवों की हालत, 25 करोड़ का बजट अटका तो लटक गया गांवों में विकास

Fri, 02 Jun 2023 11:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 02 Jun 2023 11:11 AM IST
सार

हाल-ए-बागपत : जिले के गांवों का हाल बयां करने के लिए यह तस्वीर ही काफी है। जनपद में 25 करोड़ का बजट अटका तो गांवों में विकास पूरी तरह लटक गया है।

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The budget of 25 crores got stuck and the development got stuck in the villages.
बागपत के गांव की हालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागपत के गांवों का 25 करोड़ रुपये का बजट अटक गया है जो अप्रैल महीने में जारी किया जाना था। इससे गांवों में विकास कार्य लटक गए हैं, क्योंकि गांवों में पैसा खत्म हो गया है और इस कारण नए कार्य शुरू नहीं हो रहे हैं तो पुराने भी काफी अधूरे पड़े हैं। अब पंचायती राज विभाग के अधिकारी और प्रधान बजट जारी होने का इंतजार कर रहे हैं।

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गांवों के लिए फरवरी में करीब साढ़े छह करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। यहां 244 ग्राम पंचायत है और उस बजट से सहायक, प्रधान, शौचालय के केयरटेकर के मानदेय के साथ ही स्कूल के बिजली बिल, ग्राम पंचायत के बिजली बिल जमा कराए जाते हैं। उसके बाद जितना पैसा बचा, उसको विकास कार्य पर खर्च किया जाना था।
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इस तरह बजट को 244 ग्राम पंचायतों के लिए काफी कम बताया जा रहा था और प्रधानों को उम्मीद थी कि उस बजट में कुछ कार्य शुरू कराए जाते हैं तो अप्रैल में दोबारा से बजट मिल जाएगा। लेकिन अप्रैल में मिलने वाला 25 करोड़ रुपये का बजट अटक गया है और वह अभी तक नहीं मिला है। जिससे गांवों में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं और लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

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दूषित पानी जमा होने की समस्या तो कहीं गंदगी का अंबार
बजट नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को समस्याएं झेलनी पड़ रही है। किसी जगह निकासी नहीं होने के कारण दूषित पानी जमा होने की समस्या है और लोगों को उस दूषित पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। इस तरह ही गांवों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और उससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है। इनके अलावा भी किसी जगह गली नहीं बनी है तो नालियां भी टूटी पड़ी है। इन समस्याओं के समाधान के लिए बजट की जरूर है।

- गांवों में पिछली बार काफी कम बजट दिया गया था और एक गांव के हिस्से में चार-पांच लाख रुपये का बजट आया था। उसमें से मानदेय व बिजली के बिल भी जमा कराए गए थे। ऐसे में विकास कार्य के लिए बजट नहीं बचा था और अप्रैल में बजट मिलने की उम्मीद थी। जिससे कार्य कराए जा सके, लेकिन वह बजट अभी तक नहीं मिला है जो जल्द मिलना चाहिए। - आशीष शर्मा, प्रधान खेड़की

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- बजट पहले ही कम मिल रहा है, जिससे गांवों की सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। इसके बावजूद जितना बजट मिलना चाहिए, वह भी समय पर नहीं आ रहा है। ऐसे में परेशानी बढ़ रही है और विकास कार्य अटक गए है। गांवों में विकास कार्य कराने के लिए बजट काफी जरूरी है। - राजीव, जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय प्रधान संगठन

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- गांवों के लिए करीब 25 करोड़ रुपये का बजट आना था जो अभी तक नहीं आया है। बजट जल्द आने की उम्मीद है, जिसको विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा। बजट मिलने पर गांवों की सभी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। - अमित त्यागी, डीपीआरओ

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