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इंद्रियों को वश में रखना ही उत्तम संयम धर्म है
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दशलक्षण महा पर्व के छठे दिन जैन अनुयाइयों ने भक्ति भाव के साथ उत्तम संयम धर्म की आराधना की
बिनौली। दशलक्षण महा पर्व के छठे दिन बुधवार को बिनौली के श्री दिगंबर जैन पुराना और बड़ा मंदिर में जैन अनुयाइयों ने भक्ति भाव के साथ उत्तम संयम धर्म की आराधना की।
उज्जैन से आये पंडित अशोक शास्त्री, अचल शास्त्री के निर्देशन में जैन अनुयाइयों ने संगीतमय वातावरण में प्रात:काल अभिषेक, शांतिधारा, जन्म कल्याणक की नित्य नियम पर्व पूजन क्रियाएं कराई। सांय:काल में स्वाध्याय व पर्श्व प्रभु की आराधना जैन समाज के लोगों ने भमतिभाव के साथ की। इस दौरान आयोजित धर्म सभा में पंडित अशोक शास्त्री ने उत्तम संयम धर्म पर आधारित शास्त्र का वचन कर कहा कि हमें जीवन में संयम रखना चाहिए। जैसे घोड़े को यदि लगाम न लगी हो तो घोड़ा बेकाबू होकर अपने सवार को किसी गड्ढे में गिरा देता है। इसी तरह इंद्रियों पर आत्मा यदि अंकुश न लगाएं तो इंद्रियां भी आत्मा को दुर्गति में डाल देती हैं। इस कारण अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण लगाकर इंद्रियों को अपने वश में रखना ही उत्तम संयम धर्म कहलाता है। इसके बाद बच्चों ने सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रम, प्रश्नोत्तरी, चित्र पहचानना प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
प्रधान उपेंद्र धामा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले बच्चों को पुरस्कृत कराया। पूजा अर्चना में मदनलाल जैन, नीरज जैन प्रमोद, पप्पल जैन, विनोद जैन, उत्सव जैन, ऋषभ जैन, संभव जैन, अंकुर जैन, ठेकेदार सचिन जैन, रजत जैन आदि उपस्थित रहे। उधर, श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर बिनौली ऋषभ जैन के निर्देशन में सतेंद्र जैन, धनेंद्र जैन, प्रवीण जैन, अतुल जैन, सचिन जैन, बिजेंद्र जैन, पारस जैन, रजत जैन, विक्की जैन, मोहित जैन, संभव जैन, संयम जैन, रिंकू जैन, शुभम जैन, मोहित जैन, आदि जैन समाज के लोगों ने भक्तिभाव के साथ उत्तम संयम धर्म की पूजा अर्चना की। सायंकाल भक्ति व स्वाध्याय भी किया।
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बिनौली। दशलक्षण महा पर्व के छठे दिन बुधवार को बिनौली के श्री दिगंबर जैन पुराना और बड़ा मंदिर में जैन अनुयाइयों ने भक्ति भाव के साथ उत्तम संयम धर्म की आराधना की।
उज्जैन से आये पंडित अशोक शास्त्री, अचल शास्त्री के निर्देशन में जैन अनुयाइयों ने संगीतमय वातावरण में प्रात:काल अभिषेक, शांतिधारा, जन्म कल्याणक की नित्य नियम पर्व पूजन क्रियाएं कराई। सांय:काल में स्वाध्याय व पर्श्व प्रभु की आराधना जैन समाज के लोगों ने भमतिभाव के साथ की। इस दौरान आयोजित धर्म सभा में पंडित अशोक शास्त्री ने उत्तम संयम धर्म पर आधारित शास्त्र का वचन कर कहा कि हमें जीवन में संयम रखना चाहिए। जैसे घोड़े को यदि लगाम न लगी हो तो घोड़ा बेकाबू होकर अपने सवार को किसी गड्ढे में गिरा देता है। इसी तरह इंद्रियों पर आत्मा यदि अंकुश न लगाएं तो इंद्रियां भी आत्मा को दुर्गति में डाल देती हैं। इस कारण अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण लगाकर इंद्रियों को अपने वश में रखना ही उत्तम संयम धर्म कहलाता है। इसके बाद बच्चों ने सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रम, प्रश्नोत्तरी, चित्र पहचानना प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
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प्रधान उपेंद्र धामा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले बच्चों को पुरस्कृत कराया। पूजा अर्चना में मदनलाल जैन, नीरज जैन प्रमोद, पप्पल जैन, विनोद जैन, उत्सव जैन, ऋषभ जैन, संभव जैन, अंकुर जैन, ठेकेदार सचिन जैन, रजत जैन आदि उपस्थित रहे। उधर, श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर बिनौली ऋषभ जैन के निर्देशन में सतेंद्र जैन, धनेंद्र जैन, प्रवीण जैन, अतुल जैन, सचिन जैन, बिजेंद्र जैन, पारस जैन, रजत जैन, विक्की जैन, मोहित जैन, संभव जैन, संयम जैन, रिंकू जैन, शुभम जैन, मोहित जैन, आदि जैन समाज के लोगों ने भक्तिभाव के साथ उत्तम संयम धर्म की पूजा अर्चना की। सायंकाल भक्ति व स्वाध्याय भी किया।
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