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इच्छाओं का निरोध करना ही उत्तम तप है
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दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम तप धर्म की आराधना की
बिनौली। दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन बृहस्पतिवार को श्री दिगंबर जैन पुराना व बड़ा मंदिर में जैन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ उत्तम तप धर्म की आराधना की।
उज्जैन से आए पंडित अशोक शास्त्री, अचल शास्त्री के निर्देशन में जैन अनुयायियों ने संगीतमय वातावरण में प्रात:काल अभिषेक, शांतिधारा, जन्म कल्याणक की नित्य नियम पर्व पूजन क्रियाएं संपन्न कर्राइं। सायं:काल में स्वाध्याय व पर्श्वप्रभू की आराधना भक्तिभाव से की। इस दौरान आयोजित धर्म सभा में पंडित अशोक शाश्त्री ने कहा कि इच्छाओं का निरोध, अभाव तथा नाश करना ही उत्तम तप है। वह तप जब आत्मा के श्रद्धान (सम्यग्दर्शन) पूर्वक होता है तब उत्तम तप धर्म कहलाता है। इसके उपरांत वाणी ग्रुप ने सांस्कृतिक नृत्य, नाटिका प्रश्नोतरी, प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। पूजा-अर्चना में मदनलाल जैन, नीरज जैन, प्रमोद, पप्पल, विनोद, उत्सव, ऋषभ, संभव जैन, अंकुर जैन, सचिन, रजत आदि उपस्थित रहे।
उधर, श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में ऋषभ जैन के निर्देशन में सतेंद्र जैन, धनेंद्र जैन, प्रवीण जैन, अतुल, सचिन, बिजेंद्र, पारस, रजत, विक्की, मोहित आदि समेत जैन समाज के लोगों ने भक्तिभाव से उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना की। सायंकाल भक्ति व स्वाध्याय भी किया।
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श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरनावा में चल रहे 41 दिवसीय अखंड शांतिनाथ विधान में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म के पावन प्रसंग पर 120 श्री फलों द्वारा शांतिनाथ भगवान की पूजा-अर्चना की। धर्म सभा में पंडित महेश जैन ने कहा कि अहिंसा संयम एवं तप की त्रिवेणी संगम से आत्मा पुनीत बनती है। समस्त कर्मों को नष्ट करने का सामर्थ्य तप में है। यहां बादामी देवी, सरिता जैन, मनी जैन, लोकेश जैन, राजेंद्र जैन, सीता, मनीषा, देवेंद्र, मोहित, वीरेंद्र आदि समेत जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।
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बिनौली। दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन बृहस्पतिवार को श्री दिगंबर जैन पुराना व बड़ा मंदिर में जैन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ उत्तम तप धर्म की आराधना की।
उज्जैन से आए पंडित अशोक शास्त्री, अचल शास्त्री के निर्देशन में जैन अनुयायियों ने संगीतमय वातावरण में प्रात:काल अभिषेक, शांतिधारा, जन्म कल्याणक की नित्य नियम पर्व पूजन क्रियाएं संपन्न कर्राइं। सायं:काल में स्वाध्याय व पर्श्वप्रभू की आराधना भक्तिभाव से की। इस दौरान आयोजित धर्म सभा में पंडित अशोक शाश्त्री ने कहा कि इच्छाओं का निरोध, अभाव तथा नाश करना ही उत्तम तप है। वह तप जब आत्मा के श्रद्धान (सम्यग्दर्शन) पूर्वक होता है तब उत्तम तप धर्म कहलाता है। इसके उपरांत वाणी ग्रुप ने सांस्कृतिक नृत्य, नाटिका प्रश्नोतरी, प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। पूजा-अर्चना में मदनलाल जैन, नीरज जैन, प्रमोद, पप्पल, विनोद, उत्सव, ऋषभ, संभव जैन, अंकुर जैन, सचिन, रजत आदि उपस्थित रहे।
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उधर, श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में ऋषभ जैन के निर्देशन में सतेंद्र जैन, धनेंद्र जैन, प्रवीण जैन, अतुल, सचिन, बिजेंद्र, पारस, रजत, विक्की, मोहित आदि समेत जैन समाज के लोगों ने भक्तिभाव से उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना की। सायंकाल भक्ति व स्वाध्याय भी किया।
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श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरनावा में चल रहे 41 दिवसीय अखंड शांतिनाथ विधान में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म के पावन प्रसंग पर 120 श्री फलों द्वारा शांतिनाथ भगवान की पूजा-अर्चना की। धर्म सभा में पंडित महेश जैन ने कहा कि अहिंसा संयम एवं तप की त्रिवेणी संगम से आत्मा पुनीत बनती है। समस्त कर्मों को नष्ट करने का सामर्थ्य तप में है। यहां बादामी देवी, सरिता जैन, मनी जैन, लोकेश जैन, राजेंद्र जैन, सीता, मनीषा, देवेंद्र, मोहित, वीरेंद्र आदि समेत जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।