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किसानों को बताएं गाजर घास नियंत्रण के तरीके
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संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली। कृषि विभाग की ओर से 16 अगस्त से 22 अगस्त तक गाजर घास नियंत्रण सप्ताह मनाया जा रहा है। शनिवार को कृषि विभाग के एडीओ महेश कुमार खोखर ने किसानों को गाजर घास नियंत्रण के बारें में जानकारी दी।
एडीओ ने शनिवार को को क्षेत्र के मुकुंदपुर, बासौली, सिलाना, शेरपुर, लूम्ब, तुगाना, टांडा, तिलवाड़ा, हलालपुर में किसानों को गाजर घास नियंत्रण की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि गाजर घास से त्वचा, एक्जिमा, एलर्जी बुखार और दमा जैसी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। गाजर घास वर्षभर फल फूल सकता है, जबकि वर्षा ऋतु में अंकुरण अधिक होता है। ग्लाईफोसेट 1.0 से 1:50 प्रतिशत अथवा मेट्रिब्यूजीन 0.3 से 0.5 प्रतिशत का छिडक़ाव करने से नियंत्रण किया जा सकता है। इसके अलावा मैक्सिकन बीटल नामक कीट को वर्षा ऋतु में गाजर घास पर छोडने से भी गाजर घास पर नियंत्रण किया जा सकता है। गेंदे के पौधे लगाकर भी गाजर घास के फैलाव को रोका जा सकता है। फूल आने से पहले नमक के घोल का छिड़काव करने से नष्ट हो जाते हैं। इस मौके पर अमरीश कुमार ,जयवीर, कुशल पाल, संजीव, यशपाल, स्वराज, योगेश, जितेंद्र देशपाल, नीरज, पप्पन, पिंटू, नीटू ,धर्मेंद्र समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
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छपरौली। कृषि विभाग की ओर से 16 अगस्त से 22 अगस्त तक गाजर घास नियंत्रण सप्ताह मनाया जा रहा है। शनिवार को कृषि विभाग के एडीओ महेश कुमार खोखर ने किसानों को गाजर घास नियंत्रण के बारें में जानकारी दी।
एडीओ ने शनिवार को को क्षेत्र के मुकुंदपुर, बासौली, सिलाना, शेरपुर, लूम्ब, तुगाना, टांडा, तिलवाड़ा, हलालपुर में किसानों को गाजर घास नियंत्रण की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि गाजर घास से त्वचा, एक्जिमा, एलर्जी बुखार और दमा जैसी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। गाजर घास वर्षभर फल फूल सकता है, जबकि वर्षा ऋतु में अंकुरण अधिक होता है। ग्लाईफोसेट 1.0 से 1:50 प्रतिशत अथवा मेट्रिब्यूजीन 0.3 से 0.5 प्रतिशत का छिडक़ाव करने से नियंत्रण किया जा सकता है। इसके अलावा मैक्सिकन बीटल नामक कीट को वर्षा ऋतु में गाजर घास पर छोडने से भी गाजर घास पर नियंत्रण किया जा सकता है। गेंदे के पौधे लगाकर भी गाजर घास के फैलाव को रोका जा सकता है। फूल आने से पहले नमक के घोल का छिड़काव करने से नष्ट हो जाते हैं। इस मौके पर अमरीश कुमार ,जयवीर, कुशल पाल, संजीव, यशपाल, स्वराज, योगेश, जितेंद्र देशपाल, नीरज, पप्पन, पिंटू, नीटू ,धर्मेंद्र समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
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